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श्री सूर्य स्तुती ( Shri Surya Stuti )

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श्री सूर्य स्तुती ( Shri Surya Stuti )

जयाच्या रथा एकची चक्र पाही | नसे भूमि आकाश आधार कांही || असे सारथी पांगुळा ज्या रथासी | नमस्कार त्या सूर्यनारायणासी || १ ||

करी पद्म माथां किरीटी झळाळी | प्रभा कुंडलांची शरीरा निराळी || पहा रश्मि ज्याची त्रिलोकासी कैसी | नमस्कार त्या सुर्यनारायणासी || २ ||

सहस्रद्वये दोनशे आणि दोन | क्रमी योजने जो निमिषार्धतेन || मन कल्पवेना जयाच्या त्वरेसी | नमस्कार त्या सुर्यनारायणासी || ३ ||

विधीवेदकर्मासी आधारकर्ता | स्वधाकार स्वाहादि सर्वत्र भोक्ता || असे अन्नदाता समस्तां जनांसी | नमस्कार त्या सुर्यनारायणासी || ४ ||

युगें मंत्रकल्पांत ज्याचेनि होती | हरीब्रम्हरुद्रादि ज्या बोलिजेती || क्षयांती महाकाळरूप प्रकाशी | नमस्कार त्या सुर्यनारायणासी || ५ ||

शशी तारका गोवुनी जो ग्रहाते | त्वरें मेरू वेष्टोनिया पुर्वपंथे || भ्रमें जो सदा लोक रक्षावयासी | नमस्कार त्या सुर्यनारायणासी || ६ ||

समस्ता सुरांमाजी तू जाण चर्या| म्हणोनिच तू श्रेष्ठ त्या नाम सूर्या || दुजा देव तो दाखवी स्वप्रकाशी | नमस्कार त्या सुर्यनारायणासी || ७ ||

महामोह तो अंधकारासि नाशी | प्रभा शुद्ध सत्वाची अज्ञान नाशी || अनाथां कृपा जो करी नित्य ऐसी | नमस्कार त्या सुर्यनारायणासी || ८ ||

कृपा ज्यावरी होय त्या भास्कराची | न पाहू शके शत्रु त्याला विरंची || उभ्या राहती सिद्धी होऊनी दासी || नमस्कार त्या सुर्यनारायणासी || 9 ||

फळे चंदने आणि पुष्पेकरोनी || पूजावें बरे एकनिष्ठा धरोनी || मानी इच्छिले पाविजे त्या सुखासी | नमस्कार त्या सुर्यनारायणासी || १० ||

नमस्कार साष्टांग बापा स्वभावे | करोनी तया भास्करालागि ध्यावे | दरिद्रे सहस्त्रादी जो क्लेश नाशी | नमस्कार त्या सुर्यनारायणासी || ११ ||

वरी सुर्य आदित्य मित्रादि भानू | विवस्वान इत्यादीही पादरेणू | सदा वांछिती पूज्य ते शंकरासी | नमस्कार त्या सुर्यनारायणासी || १२ |||

Shri Bhairav Chalisa in Hindi – भैरव चालीसा

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Shri Bhairav Chalisa in Hindi Lyrics

श्री गणपति गुरु गौरि पद प्रेम सहित धरि माथ ।
चालीसा वन्दन करौं श्री शिव भैरवनाथ ॥

श्री भैरव सङ्कट हरण मङ्गल करण कृपाल ।
श्याम वरण विकराल वपु लोचन लाल विशाल ॥

जय जय श्री काली के लाला । जयति जयति काशी-कुतवाला ॥

जयति बटुक-भैरव भय हारी । जयति काल-भैरव बलकारी ॥

जयति नाथ-भैरव विख्याता । जयति सर्व-भैरव सुखदाता ॥

भैरव रूप कियो शिव धारण । भव के भार उतारण कारण ॥

भैरव रव सुनि ह्वै भय दूरी । सब विधि होय कामना पूरी ॥

शेष महेश आदि गुण गायो । काशी-कोतवाल कहलायो ॥

जटा जूट शिर चन्द्र विराजत । बाला मुकुट बिजायठ साजत ॥

कटि करधनी घूँघरू बाजत । दर्शन करत सकल भय भाजत ॥

जीवन दान दास को दीन्ह्यो । कीन्ह्यो कृपा नाथ तब चीन्ह्यो ॥

वसि रसना बनि सारद-काली । दीन्ह्यो वर राख्यो मम लाली ॥

धन्य धन्य भैरव भय भञ्जन । जय मनरञ्जन खल दल भञ्जन ॥

कर त्रिशूल डमरू शुचि कोड़ा । कृपा कटाक्श सुयश नहिं थोडा ॥

जो भैरव निर्भय गुण गावत । अष्टसिद्धि नव निधि फल पावत ॥

रूप विशाल कठिन दुख मोचन । क्रोध कराल लाल दुहुँ लोचन ॥

अगणित भूत प्रेत सङ्ग डोलत । बं बं बं शिव बं बं बोलत ॥

रुद्रकाय काली के लाला । महा कालहू के हो काला ॥

बटुक नाथ हो काल गँभीरा । श्वेत रक्त अरु श्याम शरीरा ॥

करत नीनहूँ रूप प्रकाशा । भरत सुभक्तन कहँ शुभ आशा ॥

रत्न जड़ित कञ्चन सिंहासन । व्याघ्र चर्म शुचि नर्म सु‍आनन ॥

तुमहि जा‍इ काशिहिं जन ध्यावहिं । विश्वनाथ कहँ दर्शन पावहिं ॥

जय प्रभु संहारक सुनन्द जय । जय उन्नत हर उमा नन्द जय ॥

भीम त्रिलोचन स्वान साथ जय । वैजनाथ श्री जगतनाथ जय ॥

महा भीम भीषण शरीर जय । रुद्र त्रयम्बक धीर वीर जय ॥

अश्वनाथ जय प्रेतनाथ जय । स्वानारुढ़ सयचन्द्र नाथ जय ॥

निमिष दिगम्बर चक्रनाथ जय । गहत अनाथन नाथ हाथ जय ॥

त्रेशलेश भूतेश चन्द्र जय । क्रोध वत्स अमरेश नन्द जय ॥

श्री वामन नकुलेश चण्ड जय । कृत्या‍ऊ कीरति प्रचण्ड जय ॥

रुद्र बटुक क्रोधेश कालधर । चक्र तुण्ड दश पाणिव्याल धर ॥

करि मद पान शम्भु गुणगावत । चौंसठ योगिन सङ्ग नचावत ॥

करत कृपा जन पर बहु ढङ्गा । काशी कोतवाल अड़बङ्गा ॥

देयँ काल भैरव जब सोटा । नसै पाप मोटा से मोटा ॥

जनकर निर्मल होय शरीरा । मिटै सकल सङ्कट भव पीरा ॥

श्री भैरव भूतोङ्के राजा । बाधा हरत करत शुभ काजा ॥

ऐलादी के दुःख निवारयो । सदा कृपाकरि काज सम्हारयो ॥

सुन्दर दास सहित अनुरागा । श्री दुर्वासा निकट प्रयागा ॥

श्री भैरव जी की जय लेख्यो । सकल कामना पूरण देख्यो ॥

दोहा

जय जय जय भैरव बटुक स्वामी सङ्कट टार ।
कृपा दास पर कीजि‍ए शङ्कर के अवतार ॥

Hanuman Gayatri Mantra in Sanskrit Lyrics

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Hanuman Gayatri Mantra in Sanskrit

हनुमान गायत्री मंत्र

ओम् आंजनेयाय विद्मिहे वायुपुत्राय धीमहि |
तन्नो: हनुमान: प्रचोदयात ||1||

ओम् रामदूताय विद्मिहे कपिराजाय धीमहि |
तन्नो: मारुति: प्रचोदयात ||2||

ओम् अन्जनिसुताय विद्मिहे महाबलाय धीमहि |
तन्नो: मारुति: प्रचोदयात ||3||

ओम् ह्रीं ह्रीं हूँ हौं हृ:
इति मूल मंत्र |

Hanuman Gayatri Mantra in English

Ohm Aanjeyay Vidmahe Vayuputray Dhimahi |
Tanno: Hanuman: Prachodayat ||1||

Ohm Ramdutay Vidmahe Kapirajay Dhimahi |
Tanno: Maruti: Prachodayat ||2||

Ohm Anjanisutay Vidmahe Mahabalaay Dhimahi |
Tanno: Maruti: Prachodayat ||3||

Ohm Hrim Hrim Hum Houm Hri:
Iti Mul Mantra |

Hanuman Gayatri Mantra in Tamil Lyrics

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Hanuman Gayatri Mantra in Tamil

ஹனுமான் காயத்ரி மந்திரம்

ஓம் அஞ்சனிசுதாய வித்மஹி
வாயுபுத்ராய தீமஹி
தன்னோ மாருதித் ப்ரசோதயாத்

Hanuman Bajrang Baan – हनुमान बजरंग बाण

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Hanuman Bajrang Baan

दोहा
निश्चय प्रेम प्रतीत ते, विनय करें सनमान ।
तेहि के कारज सकल शुभ, सिद्घ करैं हनुमान ।।

चौपाई
जय हनुमन्त सन्त हितकारी । सुन लीजै प्रभु अरज हमारी ।।
जन के काज विलम्ब न कीजै । आतुर दौरि महा सुख दीजै ।।
जैसे कूदि सुन्धु वहि पारा । सुरसा बद पैठि विस्तारा ।।
आगे जाई लंकिनी रोका । मारेहु लात गई सुर लोका ।।
जाय विभीषण को सुख दीन्हा । सीता निरखि परम पद लीन्हा ।।
बाग़ उजारी सिन्धु महं बोरा । अति आतुर जमकातर तोरा ।।
अक्षय कुमार मारि संहारा । लूम लपेट लंक को जारा ।।
लाह समान लंक जरि गई । जय जय धुनि सुरपुर में भई ।।
अब विलम्ब केहि कारण स्वामी । कृपा करहु उन अन्तर्यामी ।।
जय जय लक्ष्मण प्राण के दाता । आतुर होय दुख हरहु निपाता ।।
जै गिरिधर जै जै सुखसागर । सुर समूह समरथ भटनागर ।।
जय हनु हनु हनुमंत हठीले । बैरिहि मारु बज्र की कीले ।।
गदा बज्र लै बैरिहिं मारो । महाराज प्रभु दास उबारो ।।
ऊँ कार हुंकार महाप्रभु धावो । बज्र गदा हनु विलम्ब न लावो ।।
ॐ ह्नीं ह्नीं ह्नीं हनुमंत कपीसा । ऊँ हुं हुं हनु अरि उर शीशा ।।
सत्य होहु हरि शपथ पाय के । रामदूत धरु मारु जाय के ।।
जय जय जय हनुमन्त अगाधा । दुःख पावत जन केहि अपराधा ।।
पूजा जप तप नेम अचारा । नहिं जानत हौं दास तुम्हारा ।।
वन उपवन, मग गिरि गृह माहीं । तुम्हरे बल हम डरपत नाहीं ।।
पांय परों कर ज़ोरि मनावौं । यहि अवसर अब केहि गोहरावौं ।।
जय अंजनि कुमार बलवन्ता । शंकर सुवन वीर हनुमन्ता ।।
बदन कराल काल कुल घालक । राम सहाय सदा प्रति पालक ।।

भूत प्रेत पिशाच निशाचर । अग्नि बेताल काल मारी मर ।।
इन्हें मारु तोहिं शपथ राम की । राखु नाथ मरजाद नाम की ।।
जनकसुता हरि दास कहावौ । ताकी शपथ विलम्ब न लावो ।।
जय जय जय धुनि होत अकाशा । सुमिरत होत दुसह दुःख नाशा ।।
चरण शरण कर ज़ोरि मनावौ । यहि अवसर अब केहि गौहरावौं ।।
उठु उठु उठु चलु राम दुहाई । पांय परों कर ज़ोरि मनाई ।।
ॐ चं चं चं चं चपल चलंता । ऊँ हनु हनु हनु हनु हनुमन्ता ।।
ऊँ हं हं हांक देत कपि चंचल । ऊँ सं सं सहमि पराने खल दल ।।
अपने जन को तुरत उबारो । सुमिरत होय आनन्द हमारो ।।
यह बजरंग बाण जेहि मारै । ताहि कहो फिर कौन उबारै ।।
पाठ करै बजरंग बाण की । हनुमत रक्षा करैं प्राम की ।।
यह बजरंग बाण जो जापै । ताते भूत प्रेत सब कांपै ।।
धूप देय अरु जपै हमेशा । ताके तन नहिं रहै कलेशा ।।

दोहा
प्रेम प्रतीतहि कपि भजै, सदा धरैं उर ध्यान ।
तेहि के कारज सकल शुभ, सिद्घ करैं हनुमान ।।

Sankat Mochan Hanuman Ashtak | संकट मोचन हनुमानाष्टक

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Sankat Mochan Hanuman Ashtak

संकट मोचन हनुमानाष्टक

रचयिता – गोस्वामी तुलसीदास
छन्द – मत्तगयन्द (प्राय: सात बार गा-ल-ल, फिर अन्त में दो गुरु वर्ण)

बाल समय रबि भक्षि लियो तब तीनहुँ लोक भयो अँधियारो।
ताहि सों त्रास भयो जग को यह संकट काहु सों जात न टारो।
देवन आनि करी बिनती तब छाँड़ि दियो रबि कष्ट निवारो।
को नहिं जानत है जग में कपि संकटमोचन नाम तिहारो॥१॥

बालि की त्रास कपीस बसै गिरि जात महाप्रभु पंथ निहारो।
चौंकि महा मुनि साप दियो तब चाहिय कौन बिचार बिचारो।
कै द्विज रूप लिवाय महाप्रभु सो तुम दास के सोक निवारो।
को नहिं जानत है जग में कपि संकटमोचन नाम तिहारो॥२॥

अंगद के सँग लेन गये सिय खोज कपीस यह बैन उचारो।
जीवत ना बचिहौ हम सो जु बिना सुधि लाए इहाँ पगु धारो।
हेरि थके तट सिंधु सबै तब लाय सिया-सुधि प्रान उबारो।
को नहिं जानत है जग में कपि संकटमोचन नाम तिहारो॥३॥

रावन त्रास दई सिय को सब राक्षसि सों कहि सोक निवारो।
ताहि समय हनुमान महाप्रभु जाय महा रजनीचर मारो।
चाहत सीय असोक सों आगि सु दै प्रभु मुद्रिका सोक निवारो।
को नहिं जानत है जग में कपि संकटमोचन नाम तिहारो॥४॥

बान लग्यो उर लछिमन के तब प्रान तजे सुत रावन मारो।
लै गृह बैद्य सुषेन समेत तबै गिरि द्रोन सु बीर उपारो।
आनि सजीवन हाथ दई तब लछिमन के तुम प्रान उबारो।
को नहिं जानत है जग में कपि संकटमोचन नाम तिहारो॥५॥

रावन जुद्ध अजान कियो तब नाग कि फाँस सबै सिर डारो।
श्रीरघुनाथ समेत सबै दल मोह भयो यह संकट भारो।
आनि खगेस तबै हनुमान जु बंधन काटि सुत्रास निवारो।
को नहिं जानत है जग में कपि संकटमोचन नाम तिहारो॥६॥

बंधु समेत जबै अहिरावन लै रघुनाथ पताल सिधारो।
देबिहिं पूजि भली बिधि सों बलि देउ सबै मिलि मंत्र बिचारो।
जाय सहाय भयो तब ही अहिरावन सैन्य समेत सँहारो।
को नहिं जानत है जग में कपि संकटमोचन नाम तिहारो॥७॥

काज कियो बड़ देवन के तुम बीर महाप्रभु देखि बिचारो।
कौन सो संकट मोर गरीब को जो तुमसों नहिं जात है टारो।
बेगि हरो हनुमान महाप्रभु जो कुछ संकट होय हमारो।
को नहिं जानत है जग में कपि संकटमोचन नाम तिहारो॥८॥
दोहा
लाल देह लाली लसे अरू धरि लाल लँगूर।
बज्र देह दानव दलन जय जय जय कपि सूर॥

108 Names of Lord Hanuman

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108 Hanuman Names with Meaning

Ashtottara Shatanamavali of God Hanuman

ॐ आञ्जनेयाय नमः।

Om Anjaneyaya Namah।

ॐ महावीराय नमः।

Om Mahaviraya Namah।

ॐ हनूमते नमः।

Om Hanumate Namah।

ॐ मारुतात्मजाय नमः।

Om Marutatmajaya Namah।

ॐ तत्वज्ञानप्रदाय नमः।

Om Tatvajnanapradaya Namah।

ॐ सीतादेविमुद्राप्रदायकाय नमः।

Om Sitadevimudrapradayakaya Namah।

ॐ अशोकवनकाच्छेत्रे नमः।

Om Ashokavanakachchhetre Namah।

ॐ सर्वमायाविभंजनाय नमः।

Om Sarvamayavibhanjanaya Namah।

ॐ सर्वबन्धविमोक्त्रे नमः।

Om Sarvabandhavimoktre Namah।

ॐ रक्षोविध्वंसकारकाय नमः।

Om Rakshovidhwansakarakaya Namah।

ॐ परविद्या परिहाराय नमः।

Om Paravidya Pariharaya Namah।

ॐ परशौर्य विनाशनाय नमः।

Om Parashaurya Vinashanaya Namah।

ॐ परमन्त्र निराकर्त्रे नमः।

Om Paramantra Nirakartre Namah।

ॐ परयन्त्र प्रभेदकाय नमः।

Om Parayantra Prabhedakaya Namah।

ॐ सर्वग्रह विनाशिने नमः।

Om Sarvagraha Vinashine Namah।

ॐ भीमसेन सहायकृथे नमः।

Om Bhimasena Sahayakrithe Namah।

ॐ सर्वदुखः हराय नमः।

Om Sarvadukha Haraya Namah।

ॐ सर्वलोकचारिणे नमः।

Om Sarvalokacharine Namah।

ॐ मनोजवाय नमः।

Om Manojavaya Namah।

ॐ पारिजात द्रुमूलस्थाय नमः।

Om Parijata Drumulasthaya Namah।

ॐ सर्वमन्त्र स्वरूपवते नमः।

Om Sarvamantra Swarupavate Namah।

ॐ सर्वतन्त्र स्वरूपिणे नमः।

Om Sarvatantra Swarupine Namah।

ॐ सर्वयन्त्रात्मकाय नमः।

Om Sarvayantratmakaya Namah।

ॐ कपीश्वराय नमः।

Om Kapishwaraya Namah।

ॐ महाकायाय नमः।

Om Mahakayaya Namah।

ॐ सर्वरोगहराय नमः।

Om Sarvarogaharaya Namah।

ॐ प्रभवे नमः।

Om Prabhave Namah।

ॐ बल सिद्धिकराय नमः।

Om Bala Siddhikaraya Namah।

ॐ सर्वविद्या सम्पत्तिप्रदायकाय नमः।

Om Sarvavidya Sampattipradayakaya Namah।

ॐ कपिसेनानायकाय नमः।

Om Kapisenanayakaya Namah।

ॐ भविष्यथ्चतुराननाय नमः।

Om Bhavishyathchaturananaya Namah।

ॐ कुमार ब्रह्मचारिणे नमः।

Om Kumara Brahmacharine Namah।

ॐ रत्नकुण्डल दीप्तिमते नमः।

Om Ratnakundala Diptimate Namah।

ॐ चञ्चलद्वाल सन्नद्धलम्बमान शिखोज्वलाय नमः।

Om Chanchaladwala Sannaddhalambamana Shikhojwala Namah।

ॐ गन्धर्व विद्यातत्वज्ञाय नमः।

Om Gandharva Vidyatatvajnaya Namah।

ॐ महाबल पराक्रमाय नमः।

Om Mahabala Parakramaya Namah।

ॐ काराग्रह विमोक्त्रे नमः।

Om Karagraha Vimoktre Namah।

ॐ शृन्खला बन्धमोचकाय नमः।

Om Shrinkhala Bandhamochakaya Namah।

ॐ सागरोत्तारकाय नमः।

Om Sagarottarakaya Namah।

ॐ प्राज्ञाय नमः।

Om Prajnaya Namah।

ॐ रामदूताय नमः।

Om Ramadutaya Namah।

ॐ प्रतापवते नमः।

Om Pratapavate Namah।

ॐ वानराय नमः।

Om Vanaraya Namah।

ॐ केसरीसुताय नमः।

Om Kesarisutaya Namah।

ॐ सीताशोक निवारकाय नमः।

Om Sitashoka Nivarakaya Namah।

ॐ अन्जनागर्भ सम्भूताय नमः।

Om Anjanagarbha Sambhutaya Namah।

ॐ बालार्कसद्रशाननाय नमः।

Om Balarkasadrashananaya Namah।

ॐ विभीषण प्रियकराय नमः।

Om Vibhishana Priyakaraya Namah।

ॐ दशग्रीव कुलान्तकाय नमः।

Om Dashagriva Kulantakaya Namah।

ॐ लक्ष्मणप्राणदात्रे नमः।

Om Lakshmanapranadatre Namah।

ॐ वज्रकायाय नमः।

Om Vajrakayaya Namah।

ॐ महाद्युथये नमः।

Om Mahadyuthaye Namah।

ॐ चिरञ्जीविने नमः।

Om Chiranjivine Namah।

ॐ रामभक्ताय नमः।

Om Ramabhaktaya Namah।

ॐ दैत्यकार्य विघातकाय नमः।

Om Daityakarya Vighatakaya Namah।

ॐ अक्षहन्त्रे नमः।

Om Akshahantre Namah।

ॐ काञ्चनाभाय नमः।

Om Kanchanabhaya Namah।

ॐ पञ्चवक्त्राय नमः।

Om Panchavaktraya Namah।

ॐ महातपसे नमः।

Om Mahatapase Namah।

ॐ लन्किनी भञ्जनाय नमः।

Om Lankini Bhanjanaya Namah।

ॐ श्रीमते नमः।

Om Shrimate Namah।

ॐ सिंहिकाप्राण भञ्जनाय नमः।

Om Simhikaprana Bhanjanaya Namah।

ॐ गन्धमादन शैलस्थाय नमः।

Om Gandhamadana Shailasthaya Namah।

ॐ लङ्कापुर विदायकाय नमः।

Om Lankapura Vidayakaya Namah।

ॐ सुग्रीव सचिवाय नमः।

Om Sugriva Sachivaya Namah।

ॐ धीराय नमः।

Om Dhiraya Namah।

ॐ शूराय नमः।

Om Shuraya Namah।

ॐ दैत्यकुलान्तकाय नमः।

Om Daityakulantakaya Namah।

ॐ सुरार्चिताय नमः।

Om Surarchitaya Namah।

ॐ महातेजसे नमः।

Om Mahatejase Namah।

ॐ रामचूडामणिप्रदायकाय नमः।

Om Ramachudamanipradayakaya Namah।

ॐ कामरूपिणे नमः।

Om Kamarupine Namah।

ॐ पिङ्गलाक्षाय नमः।

Om Pingalakshaya Namah।

ॐ वार्धिमैनाक पूजिताय नमः।

Om Vardhimainaka Pujitaya Namah।

ॐ कबळीकृत मार्ताण्डमण्डलाय नमः।

Om Kabalikrita Martandamandalaya Namah।

ॐ विजितेन्द्रियाय नमः।

Om Vijitendriyaya Namah।

ॐ रामसुग्रीव सन्धात्रे नमः।

Om Ramasugriva Sandhatre Namah।

ॐ महारावण मर्धनाय नमः।

Om Maharavana Mardhanaya Namah।

ॐ स्फटिकाभाय नमः।

Om Sphatikabhaya Namah।

ॐ वागधीशाय नमः।

Om Vagadhishaya Namah।

ॐ नवव्याकृतपण्डिताय नमः।

Om Navavyakritapanditaya Namah।

ॐ चतुर्बाहवे नमः।

Om Chaturbahave Namah।

ॐ दीनबन्धुराय नमः।

Om Dinabandhuraya Namah।

ॐ मायात्मने नमः।

Om Mayatmane Namah।

ॐ भक्तवत्सलाय नमः।

Om Bhaktavatsalaya Namah।

ॐ संजीवननगायार्था नमः।

Om Sanjivananagayartha Namah।

ॐ सुचये नमः।

Om Suchaye Namah।

ॐ वाग्मिने नमः।

Om Vagmine Namah।

ॐ दृढव्रताय नमः।

Om Dridhavrataya Namah।

ॐ कालनेमि प्रमथनाय नमः।

Om Kalanemi Pramathanaya Namah।

ॐ हरिमर्कट मर्कटाय नमः।

Om Harimarkata Markataya Namah।

ॐ दान्ताय नमः।

Om Dantaya Namah।

ॐ शान्ताय नमः।

Om Shantaya Namah।

ॐ प्रसन्नात्मने नमः।

Om Prasannatmane Namah।

ॐ शतकन्टमुदापहर्त्रे नमः।

Om Shatakantamudapahartre Namah।

ॐ योगिने नमः।

Om Yogine Namah।

ॐ रामकथा लोलाय नमः।

Om Ramakatha Lolaya Namah।

ॐ सीतान्वेषण पण्डिताय नमः।

Om Sitanveshana Panditaya Namah।

ॐ वज्रद्रनुष्टाय नमः।

Om Vajradranushtaya Namah।

ॐ वज्रनखाय नमः।

Om Vajranakhaya Namah।

ॐ रुद्र वीर्य समुद्भवाय नमः।

Om Rudra Virya Samudbhavaya Namah।

ॐ इन्द्रजित्प्रहितामोघब्रह्मास्त्र विनिवारकाय नमः।

Om Indrajitprahitamoghabrahmastra Vinivarakaya Namah।

ॐ पार्थ ध्वजाग्रसंवासिने नमः।

Om Partha Dhwajagrasamvasine Namah।

ॐ शरपञ्जर भेदकाय नमः।

Om Sharapanjara Bhedakaya Namah।

ॐ दशबाहवे नमः।

Om Dashabahave Namah।

ॐ लोकपूज्याय नमः।

Om Lokapujyaya Namah।

ॐ जाम्बवत्प्रीतिवर्धनाय नमः।

Om Jambavatpritivardhanaya Namah।

ॐ सीतासमेत श्रीरामपाद सेवदुरन्धराय नमः।

Om Sitasameta Shriramapada sevadurandharaya Namah।

Hanuman Janam Katha in Hindi

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Hanuman Janam Katha in Hindi

विवाह के बहुत दिनों के बाद भी जब माता अंजना को संतान सुख प्राप्त नहीं हुआ तब उन्होंने निश्चय करके अत्यंत कठोर तप किया | उन्हें तप करता देख महामुनि मतंग ने उनसे उनके उस तप का कारण पूछा | तब माता अंजना ने कहा, “हे मुनिश्रेष्ठ! केसरी नामक वानरश्रेष्ठ ने मुझे मेरे पिता मांगकर मेरा वरण किया| मैंने अपने पति के संग में सभी सुखों व वैभवों का भोग किया परन्तु संतान सुख से अभी तक वंचित हूँ | मैंने बहुत से व्रत और उपवास भी किये परन्तु संतान की प्राप्ति नहीं हुई | इसीलिए अब मैं कठोर तप कर रही हूँ | मुनिवर! कृपा करके मुझे पुत्र प्राप्ति का कोई उपाय बताएं |”

महामुनि मतंग ने उन्हें वृषभाचल भगवान वेंकटेश्वर के चरणों में प्रणाम कर के आकाश गंगा नामक तीर्थ में स्नान कर, जल ग्रहण करके वायुदेव को प्रसन्न करने को कहा |

माता अंजना ने मतंग ऋषि द्वारा बताई गयी विधि के अनुसार वायु देव को प्रसन्न करने के लिए संयम, धैर्य, श्रद्धा व विशवास के साथ तप आरम्भ किया| उनके तप से प्रसन्न होकर वायुदेव ने मेष राशि सूर्य की स्थिति के समय चित्र नक्षत्र युक्त पूर्णिमा के दिन उन्हें दर्शन देकर वरदान मांगने को कहा | तब माता अंजना ने उत्तम पुत्र का वरदान माँगा | वायुदेव ने वरदान देते हुए माता अंजना को उनके पिछले जन्म का स्मरण कराते हुए कहा, “हे अंजना! तुम्हारे गर्भ से एक अत्यंत बलशाली एवं तेजस्वी पुत्र जन्म लेगा, अपितु स्वयं भगवान शंकर ही ग्यारहवें रुद्र के रूप में तुम्हारे गर्भ से अवतरित होंगे| पिछले जन्म में तुम पुन्जिकस्थला नामक अप्सरा थी और मैं तुम्हारा पति था परन्तु ऋषि श्राप के कारण हमें वियोग सहना पड़ा और तुम इस जनम में अंजना के रूप में इस धरती पर आई हो, इस नाते मैं तुम्हारे होने वाले पुत्र का धर्म-पिता कहलाऊंगा तथा तुम्हारा वो पुत्र पवनपुत्र नाम से भी तीनो लोकों में जाना जाएगा|”

Khel Mandiyela Valvanti Ghai Lyrics in Marathi

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Khel Mandiyela Valvanti Ghai

खेळ मांडीयेला वाळवंटी घाई ।
नाचती वैष्णव भाईं रे ।
क्रोध अभिमान गेला पावटणी ।
एक एका लागतील पायीं रे ।।

गोपीचंदनउटी तुळसीच्या माळा
हार मिरविती गळां ।
टाळ मृदुंग घाई पुष्प वर्षाव ।
अनुपम्य सुखसोंहळा रे ।।

वर्णअभिमान विसरली याती
एकएकां लोटांगणीं जाती ।
निर्मळ चित्तें जालीं नवनीतें ।
पाषाणा पाझर सुटती रे ।।

होतो जयजयकार गर्जत अंबर
मातले हे वैष्णव वीर रे ।
तुका म्हणे सोपी केली पायवाट ।
उतरावया भवसागर रे ।।

-संत तुकाराम

Shani Kavacham in Sanskrit | शनि कवचं

Shani Kavacham in Sanskrit

अथ श्री शनिकवचम्
अस्य श्री शनैश्चरकवचस्तोत्रमंत्रस्य कश्यप ऋषिः ||
अनुष्टुप् छन्दः II शनैश्चरो देवता II शीं शक्तिः ||
शूं कीलकम् II शनैश्चरप्रीत्यर्थं जपे विनियोगः ||
निलांबरो नीलवपुः किरीटी गृध्रस्थितस्त्रासकरो धनुष्मान् ||

चतुर्भुजः सूर्यसुतः प्रसन्नः सदा मम स्याद्वरदः प्रशान्तः || १ ||
ब्रह्मोवाच ||
श्रुणूध्वमृषयः सर्वे शनिपीडाहरं महत् |
कवचं शनिराजस्य सौरेरिदमनुत्तमम् || २ ||
कवचं देवतावासं वज्रपंजरसंज्ञकम् |
शनैश्चरप्रीतिकरं सर्वसौभाग्यदायकम् || ३ ||
ॐ श्रीशनैश्चरः पातु भालं मे सूर्यनंदनः |
नेत्रे छायात्मजः पातु पातु कर्णौ यमानुजः || ४ ||
नासां वैवस्वतः पातु मुखं मे भास्करः सदा |
स्निग्धकंठःश्च मे कंठं भुजौ पातु महाभुजः || ५||

स्कंधौ पातु शनिश्चैव करौ पातु शुभप्रदः |
वक्षः पातु यमभ्राता कुक्षिं पात्वसितत्सथा || ६ ||
नाभिं ग्रहपतिः पातु मंदः पातु कटिं तथा |
ऊरू ममांतकः पातु यमो जानुयुगं तथा || ७ ||
पादौ मंदगतिः पातु सर्वांगं पातु पिप्पलः |
अङ्गोपाङ्गानि सर्वाणि रक्षेन्मे सूर्यनंदनः || ८ ||
इत्येतत्कवचं दिव्यं पठेत्सूर्यसुतस्य यः |
न तस्य जायते पीडा प्रीतो भवति सूर्यजः || ९ ||
व्ययजन्मद्वितीयस्थो मृत्युस्थानगतोSपि वा |
कलत्रस्थो गतो वापि सुप्रीतस्तु सदा शनिः || १० ||
अष्टमस्थे सूर्यसुते व्यये जन्मद्वितीयगे |
कवचं पठतो नित्यं न पीडा जायते क्वचित् || ११ ||
इत्येतत्कवचं दिव्यं सौरेर्यनिर्मितं पुरा |
द्वादशाष्टमजन्मस्थदोषान्नाशायते सदा |
जन्मलग्नास्थितान्दोषान्सर्वान्नाशयते प्रभुः || १२ ||
|| इति श्रीब्रह्मांडपुराणे ब्रह्म-नारदसंवादे शनैश्चरकवचं संपूर्णं ||