Ram Navami Katha in Hindi

राम नवमी कथा (Ram Navami Katha in Hindi)

Ram Navami Katha in Hindi

पौराणिक कथानुसार राम नवमी के ही दिन त्रेता युग में महाराज दशरथ के घर विष्णु जी के अवतार भगवान श्री राम का जन्म हुआ था। मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान राम का जन्म रावण के अंत के लिए हुआ था। श्रीराम को लोग उनके सुशासन, मर्यादित व्यवहार और सदाचार युक्त शासन के लिए याद करते हैं। उत्तर भारत समेत देश के कई हिस्सों में राम नवमी का त्यौहार पूरे हर्षोत्पादक के साथ मनाया जाता है।

इस दिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु श्री राम की जन्मभूमि अयोध्या आते हैं और प्रातःकाल सरयू नदी में स्नान कर भगवान के मंदिर में जाकर भक्तिपूर्वक उनकी पूजा-अर्चना करते हैं। राम नवमी के दिन जगह-जगह रामायण का पाठ होता है। कई जगह भगवान राम, सीता, लक्ष्मण और भक्त हनुमान की रथयात्रा निकाली जाती है, जिसमें हजारों की संख्या में श्रद्धालु भाग लेते हैं।

रामायण में भगवान राम और उनके तीन भाईयों लक्ष्मण, भरत और शत्रुघ्न का उल्लेख तो कई जगह मिलता है लेकिन इनकी बहन भी थी इसका उल्लेख कम ही मिलता है। भागवत में भगवान राम के अवतार लेने के संदर्भ में इनकी बहन का जिक्र आया है।

राजा दशरथ और इनकी तीनों रानियां इस बात को लेकर चिंतित रहती हैं कि पुत्र नहीं होने पर उत्तराधिकारी कौन होगा। इनकी चिंता दूर करने के लिए ऋषि वशिष्ठ सलाह देते हैं कि आप अपने दामाद ऋंग ऋषि से पुत्रेष्ठी यज्ञ करवाएं। इससे पुत्र की प्राप्ति होगी।

ऋंग ऋषि का विवाह राजा दशरथ की इकलौती पुत्री शांता से हुआ था। राजा दशरथ ने अपनी पुत्री शांता को रोमपाद नामक के राजा को गोद दे दिया था। शांता के कहने पर ही ऋंग ऋषि राजा दशरथ के लिए पुत्रेष्ठी यज्ञ करने के लिए तैयार हुए थे।

इसका कारण यह था कि यज्ञ कराने वाले का जीवन भर का पुण्य इस यज्ञ की आहुति में नष्ट हो जाता। राजा दशरथ ने ऋंग ऋषि को यज्ञ करवाने के बदले बहुत सा धन दिया जिससे इनके पुत्र और कन्या का भरण-पोषण हुआ। यग्य के  परिणाम रूप में, अग्नि देव राजा दशरथ के सामने प्रकट हुए और दिव्य खीर का कटोरा प्रदान की है। उन्होंने राजा दशरथ को खीर अपनी पत्नियों के बीच विभाजित करने का अनुरोध किया। राजा दशरथ आदेश का पालन किया और उनके बड़े पत्नी कौसल्या और छोटी पत्नी कैकई को खीर आधी आधी बाट दी । दोनों रानियों आगे सुमित्रा को अपने हिस्से में से एक आधा हिस्सा दे दिया । चैत्र (अप्रैल- मई) के महीने में नौवें दिन ( नवमी ) पर, कौशल्या को   राम, कैकेयी को भरत और सुमित्रा को लक्ष्मण और शत्रुघ्न पुत्र रूप मे प्राप्त हुवे । तब से यह दिन राम नवमी के रूप में , बड़ी उत्साह के साथ मनाया जाता है।

ऋंग ऋषि फिर से पुण्य अर्जित करने के लिए वन में जाकर तपस्या करने लगे।

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1 Response

  1. April 9, 2016

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