Saturday, March 7, 2026
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108 Names of Lord Hanuman

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108 Hanuman Names with Meaning

Ashtottara Shatanamavali of God Hanuman

ॐ आञ्जनेयाय नमः।

Om Anjaneyaya Namah।

ॐ महावीराय नमः।

Om Mahaviraya Namah।

ॐ हनूमते नमः।

Om Hanumate Namah।

ॐ मारुतात्मजाय नमः।

Om Marutatmajaya Namah।

ॐ तत्वज्ञानप्रदाय नमः।

Om Tatvajnanapradaya Namah।

ॐ सीतादेविमुद्राप्रदायकाय नमः।

Om Sitadevimudrapradayakaya Namah।

ॐ अशोकवनकाच्छेत्रे नमः।

Om Ashokavanakachchhetre Namah।

ॐ सर्वमायाविभंजनाय नमः।

Om Sarvamayavibhanjanaya Namah।

ॐ सर्वबन्धविमोक्त्रे नमः।

Om Sarvabandhavimoktre Namah।

ॐ रक्षोविध्वंसकारकाय नमः।

Om Rakshovidhwansakarakaya Namah।

ॐ परविद्या परिहाराय नमः।

Om Paravidya Pariharaya Namah।

ॐ परशौर्य विनाशनाय नमः।

Om Parashaurya Vinashanaya Namah।

ॐ परमन्त्र निराकर्त्रे नमः।

Om Paramantra Nirakartre Namah।

ॐ परयन्त्र प्रभेदकाय नमः।

Om Parayantra Prabhedakaya Namah।

ॐ सर्वग्रह विनाशिने नमः।

Om Sarvagraha Vinashine Namah।

ॐ भीमसेन सहायकृथे नमः।

Om Bhimasena Sahayakrithe Namah।

ॐ सर्वदुखः हराय नमः।

Om Sarvadukha Haraya Namah।

ॐ सर्वलोकचारिणे नमः।

Om Sarvalokacharine Namah।

ॐ मनोजवाय नमः।

Om Manojavaya Namah।

ॐ पारिजात द्रुमूलस्थाय नमः।

Om Parijata Drumulasthaya Namah।

ॐ सर्वमन्त्र स्वरूपवते नमः।

Om Sarvamantra Swarupavate Namah।

ॐ सर्वतन्त्र स्वरूपिणे नमः।

Om Sarvatantra Swarupine Namah।

ॐ सर्वयन्त्रात्मकाय नमः।

Om Sarvayantratmakaya Namah।

ॐ कपीश्वराय नमः।

Om Kapishwaraya Namah।

ॐ महाकायाय नमः।

Om Mahakayaya Namah।

ॐ सर्वरोगहराय नमः।

Om Sarvarogaharaya Namah।

ॐ प्रभवे नमः।

Om Prabhave Namah।

ॐ बल सिद्धिकराय नमः।

Om Bala Siddhikaraya Namah।

ॐ सर्वविद्या सम्पत्तिप्रदायकाय नमः।

Om Sarvavidya Sampattipradayakaya Namah।

ॐ कपिसेनानायकाय नमः।

Om Kapisenanayakaya Namah।

ॐ भविष्यथ्चतुराननाय नमः।

Om Bhavishyathchaturananaya Namah।

ॐ कुमार ब्रह्मचारिणे नमः।

Om Kumara Brahmacharine Namah।

ॐ रत्नकुण्डल दीप्तिमते नमः।

Om Ratnakundala Diptimate Namah।

ॐ चञ्चलद्वाल सन्नद्धलम्बमान शिखोज्वलाय नमः।

Om Chanchaladwala Sannaddhalambamana Shikhojwala Namah।

ॐ गन्धर्व विद्यातत्वज्ञाय नमः।

Om Gandharva Vidyatatvajnaya Namah।

ॐ महाबल पराक्रमाय नमः।

Om Mahabala Parakramaya Namah।

ॐ काराग्रह विमोक्त्रे नमः।

Om Karagraha Vimoktre Namah।

ॐ शृन्खला बन्धमोचकाय नमः।

Om Shrinkhala Bandhamochakaya Namah।

ॐ सागरोत्तारकाय नमः।

Om Sagarottarakaya Namah।

ॐ प्राज्ञाय नमः।

Om Prajnaya Namah।

ॐ रामदूताय नमः।

Om Ramadutaya Namah।

ॐ प्रतापवते नमः।

Om Pratapavate Namah।

ॐ वानराय नमः।

Om Vanaraya Namah।

ॐ केसरीसुताय नमः।

Om Kesarisutaya Namah।

ॐ सीताशोक निवारकाय नमः।

Om Sitashoka Nivarakaya Namah।

ॐ अन्जनागर्भ सम्भूताय नमः।

Om Anjanagarbha Sambhutaya Namah।

ॐ बालार्कसद्रशाननाय नमः।

Om Balarkasadrashananaya Namah।

ॐ विभीषण प्रियकराय नमः।

Om Vibhishana Priyakaraya Namah।

ॐ दशग्रीव कुलान्तकाय नमः।

Om Dashagriva Kulantakaya Namah।

ॐ लक्ष्मणप्राणदात्रे नमः।

Om Lakshmanapranadatre Namah।

ॐ वज्रकायाय नमः।

Om Vajrakayaya Namah।

ॐ महाद्युथये नमः।

Om Mahadyuthaye Namah।

ॐ चिरञ्जीविने नमः।

Om Chiranjivine Namah।

ॐ रामभक्ताय नमः।

Om Ramabhaktaya Namah।

ॐ दैत्यकार्य विघातकाय नमः।

Om Daityakarya Vighatakaya Namah।

ॐ अक्षहन्त्रे नमः।

Om Akshahantre Namah।

ॐ काञ्चनाभाय नमः।

Om Kanchanabhaya Namah।

ॐ पञ्चवक्त्राय नमः।

Om Panchavaktraya Namah।

ॐ महातपसे नमः।

Om Mahatapase Namah।

ॐ लन्किनी भञ्जनाय नमः।

Om Lankini Bhanjanaya Namah।

ॐ श्रीमते नमः।

Om Shrimate Namah।

ॐ सिंहिकाप्राण भञ्जनाय नमः।

Om Simhikaprana Bhanjanaya Namah।

ॐ गन्धमादन शैलस्थाय नमः।

Om Gandhamadana Shailasthaya Namah।

ॐ लङ्कापुर विदायकाय नमः।

Om Lankapura Vidayakaya Namah।

ॐ सुग्रीव सचिवाय नमः।

Om Sugriva Sachivaya Namah।

ॐ धीराय नमः।

Om Dhiraya Namah।

ॐ शूराय नमः।

Om Shuraya Namah।

ॐ दैत्यकुलान्तकाय नमः।

Om Daityakulantakaya Namah।

ॐ सुरार्चिताय नमः।

Om Surarchitaya Namah।

ॐ महातेजसे नमः।

Om Mahatejase Namah।

ॐ रामचूडामणिप्रदायकाय नमः।

Om Ramachudamanipradayakaya Namah।

ॐ कामरूपिणे नमः।

Om Kamarupine Namah।

ॐ पिङ्गलाक्षाय नमः।

Om Pingalakshaya Namah।

ॐ वार्धिमैनाक पूजिताय नमः।

Om Vardhimainaka Pujitaya Namah।

ॐ कबळीकृत मार्ताण्डमण्डलाय नमः।

Om Kabalikrita Martandamandalaya Namah।

ॐ विजितेन्द्रियाय नमः।

Om Vijitendriyaya Namah।

ॐ रामसुग्रीव सन्धात्रे नमः।

Om Ramasugriva Sandhatre Namah।

ॐ महारावण मर्धनाय नमः।

Om Maharavana Mardhanaya Namah।

ॐ स्फटिकाभाय नमः।

Om Sphatikabhaya Namah।

ॐ वागधीशाय नमः।

Om Vagadhishaya Namah।

ॐ नवव्याकृतपण्डिताय नमः।

Om Navavyakritapanditaya Namah।

ॐ चतुर्बाहवे नमः।

Om Chaturbahave Namah।

ॐ दीनबन्धुराय नमः।

Om Dinabandhuraya Namah।

ॐ मायात्मने नमः।

Om Mayatmane Namah।

ॐ भक्तवत्सलाय नमः।

Om Bhaktavatsalaya Namah।

ॐ संजीवननगायार्था नमः।

Om Sanjivananagayartha Namah।

ॐ सुचये नमः।

Om Suchaye Namah।

ॐ वाग्मिने नमः।

Om Vagmine Namah।

ॐ दृढव्रताय नमः।

Om Dridhavrataya Namah।

ॐ कालनेमि प्रमथनाय नमः।

Om Kalanemi Pramathanaya Namah।

ॐ हरिमर्कट मर्कटाय नमः।

Om Harimarkata Markataya Namah।

ॐ दान्ताय नमः।

Om Dantaya Namah।

ॐ शान्ताय नमः।

Om Shantaya Namah।

ॐ प्रसन्नात्मने नमः।

Om Prasannatmane Namah।

ॐ शतकन्टमुदापहर्त्रे नमः।

Om Shatakantamudapahartre Namah।

ॐ योगिने नमः।

Om Yogine Namah।

ॐ रामकथा लोलाय नमः।

Om Ramakatha Lolaya Namah।

ॐ सीतान्वेषण पण्डिताय नमः।

Om Sitanveshana Panditaya Namah।

ॐ वज्रद्रनुष्टाय नमः।

Om Vajradranushtaya Namah।

ॐ वज्रनखाय नमः।

Om Vajranakhaya Namah।

ॐ रुद्र वीर्य समुद्भवाय नमः।

Om Rudra Virya Samudbhavaya Namah।

ॐ इन्द्रजित्प्रहितामोघब्रह्मास्त्र विनिवारकाय नमः।

Om Indrajitprahitamoghabrahmastra Vinivarakaya Namah।

ॐ पार्थ ध्वजाग्रसंवासिने नमः।

Om Partha Dhwajagrasamvasine Namah।

ॐ शरपञ्जर भेदकाय नमः।

Om Sharapanjara Bhedakaya Namah।

ॐ दशबाहवे नमः।

Om Dashabahave Namah।

ॐ लोकपूज्याय नमः।

Om Lokapujyaya Namah।

ॐ जाम्बवत्प्रीतिवर्धनाय नमः।

Om Jambavatpritivardhanaya Namah।

ॐ सीतासमेत श्रीरामपाद सेवदुरन्धराय नमः।

Om Sitasameta Shriramapada sevadurandharaya Namah।

Hanuman Janam Katha in Hindi

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Hanuman Janam Katha in Hindi

विवाह के बहुत दिनों के बाद भी जब माता अंजना को संतान सुख प्राप्त नहीं हुआ तब उन्होंने निश्चय करके अत्यंत कठोर तप किया | उन्हें तप करता देख महामुनि मतंग ने उनसे उनके उस तप का कारण पूछा | तब माता अंजना ने कहा, “हे मुनिश्रेष्ठ! केसरी नामक वानरश्रेष्ठ ने मुझे मेरे पिता मांगकर मेरा वरण किया| मैंने अपने पति के संग में सभी सुखों व वैभवों का भोग किया परन्तु संतान सुख से अभी तक वंचित हूँ | मैंने बहुत से व्रत और उपवास भी किये परन्तु संतान की प्राप्ति नहीं हुई | इसीलिए अब मैं कठोर तप कर रही हूँ | मुनिवर! कृपा करके मुझे पुत्र प्राप्ति का कोई उपाय बताएं |”

महामुनि मतंग ने उन्हें वृषभाचल भगवान वेंकटेश्वर के चरणों में प्रणाम कर के आकाश गंगा नामक तीर्थ में स्नान कर, जल ग्रहण करके वायुदेव को प्रसन्न करने को कहा |

माता अंजना ने मतंग ऋषि द्वारा बताई गयी विधि के अनुसार वायु देव को प्रसन्न करने के लिए संयम, धैर्य, श्रद्धा व विशवास के साथ तप आरम्भ किया| उनके तप से प्रसन्न होकर वायुदेव ने मेष राशि सूर्य की स्थिति के समय चित्र नक्षत्र युक्त पूर्णिमा के दिन उन्हें दर्शन देकर वरदान मांगने को कहा | तब माता अंजना ने उत्तम पुत्र का वरदान माँगा | वायुदेव ने वरदान देते हुए माता अंजना को उनके पिछले जन्म का स्मरण कराते हुए कहा, “हे अंजना! तुम्हारे गर्भ से एक अत्यंत बलशाली एवं तेजस्वी पुत्र जन्म लेगा, अपितु स्वयं भगवान शंकर ही ग्यारहवें रुद्र के रूप में तुम्हारे गर्भ से अवतरित होंगे| पिछले जन्म में तुम पुन्जिकस्थला नामक अप्सरा थी और मैं तुम्हारा पति था परन्तु ऋषि श्राप के कारण हमें वियोग सहना पड़ा और तुम इस जनम में अंजना के रूप में इस धरती पर आई हो, इस नाते मैं तुम्हारे होने वाले पुत्र का धर्म-पिता कहलाऊंगा तथा तुम्हारा वो पुत्र पवनपुत्र नाम से भी तीनो लोकों में जाना जाएगा|”

Khel Mandiyela Valvanti Ghai Lyrics in Marathi

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Khel Mandiyela Valvanti Ghai

खेळ मांडीयेला वाळवंटी घाई ।
नाचती वैष्णव भाईं रे ।
क्रोध अभिमान गेला पावटणी ।
एक एका लागतील पायीं रे ।।

गोपीचंदनउटी तुळसीच्या माळा
हार मिरविती गळां ।
टाळ मृदुंग घाई पुष्प वर्षाव ।
अनुपम्य सुखसोंहळा रे ।।

वर्णअभिमान विसरली याती
एकएकां लोटांगणीं जाती ।
निर्मळ चित्तें जालीं नवनीतें ।
पाषाणा पाझर सुटती रे ।।

होतो जयजयकार गर्जत अंबर
मातले हे वैष्णव वीर रे ।
तुका म्हणे सोपी केली पायवाट ।
उतरावया भवसागर रे ।।

-संत तुकाराम

Shani Kavacham in Sanskrit | शनि कवचं

Shani Kavacham in Sanskrit

अथ श्री शनिकवचम्
अस्य श्री शनैश्चरकवचस्तोत्रमंत्रस्य कश्यप ऋषिः ||
अनुष्टुप् छन्दः II शनैश्चरो देवता II शीं शक्तिः ||
शूं कीलकम् II शनैश्चरप्रीत्यर्थं जपे विनियोगः ||
निलांबरो नीलवपुः किरीटी गृध्रस्थितस्त्रासकरो धनुष्मान् ||

चतुर्भुजः सूर्यसुतः प्रसन्नः सदा मम स्याद्वरदः प्रशान्तः || १ ||
ब्रह्मोवाच ||
श्रुणूध्वमृषयः सर्वे शनिपीडाहरं महत् |
कवचं शनिराजस्य सौरेरिदमनुत्तमम् || २ ||
कवचं देवतावासं वज्रपंजरसंज्ञकम् |
शनैश्चरप्रीतिकरं सर्वसौभाग्यदायकम् || ३ ||
ॐ श्रीशनैश्चरः पातु भालं मे सूर्यनंदनः |
नेत्रे छायात्मजः पातु पातु कर्णौ यमानुजः || ४ ||
नासां वैवस्वतः पातु मुखं मे भास्करः सदा |
स्निग्धकंठःश्च मे कंठं भुजौ पातु महाभुजः || ५||

स्कंधौ पातु शनिश्चैव करौ पातु शुभप्रदः |
वक्षः पातु यमभ्राता कुक्षिं पात्वसितत्सथा || ६ ||
नाभिं ग्रहपतिः पातु मंदः पातु कटिं तथा |
ऊरू ममांतकः पातु यमो जानुयुगं तथा || ७ ||
पादौ मंदगतिः पातु सर्वांगं पातु पिप्पलः |
अङ्गोपाङ्गानि सर्वाणि रक्षेन्मे सूर्यनंदनः || ८ ||
इत्येतत्कवचं दिव्यं पठेत्सूर्यसुतस्य यः |
न तस्य जायते पीडा प्रीतो भवति सूर्यजः || ९ ||
व्ययजन्मद्वितीयस्थो मृत्युस्थानगतोSपि वा |
कलत्रस्थो गतो वापि सुप्रीतस्तु सदा शनिः || १० ||
अष्टमस्थे सूर्यसुते व्यये जन्मद्वितीयगे |
कवचं पठतो नित्यं न पीडा जायते क्वचित् || ११ ||
इत्येतत्कवचं दिव्यं सौरेर्यनिर्मितं पुरा |
द्वादशाष्टमजन्मस्थदोषान्नाशायते सदा |
जन्मलग्नास्थितान्दोषान्सर्वान्नाशयते प्रभुः || १२ ||
|| इति श्रीब्रह्मांडपुराणे ब्रह्म-नारदसंवादे शनैश्चरकवचं संपूर्णं ||

Aditya Hrudayam Stotra in Sanskrit Lyrics

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Aditya Hrudayam Stotra in Sanskrit

आदित्यहृदयम् – ततो युद्धपरिश्रान्तं समरे चिन्तया स्थितम्

ततो युद्धपरिश्रान्तं समरे चिन्तया स्थितम् ।
रावणं चाग्रतो दृष्ट्वा युद्धाय समुपस्थितम् ॥१॥

दैवतैश्च समागम्य द्रष्टुमभ्यागतो रणम् ।
उपागम्याब्रवीद्राममगस्त्यो भगवानृषिः ॥२॥

राम राम महाबाहो शृणु गुह्यं सनातनम् ।
येन सर्वानरीन्वत्स समरे विजयिष्यसि ॥३॥

आदित्यहृदयं पुण्यं सर्वशत्रुविनाशनम् ।
जयावहं जपेन्नित्यमक्षय्यं परमं शिवम् ॥४॥

सर्वमङ्गलमाङ्गल्यं सर्वपापप्रणाशनम् ।
चिन्ताशोकप्रशमनमायुर्वर्धनमुत्तमम् ॥५॥

रश्मिमन्तं समुद्यन्तं देवासुरनमस्कृतम् ।
पूजयस्व विवस्वन्तं भास्करं भुवनेश्वरम् ॥६॥

सर्वदेवात्मको ह्येषः तेजस्वी रश्मिभावनः ।
एष देवासुरगणान् लोकान् पाति गभस्तिभिः ॥७॥

एष ब्रह्मा च विष्णुश्च शिवः स्कन्दः प्रजापतिः ।
माहेन्द्रो धनदः कालो यमस्सोमो ह्यपां पतिः ॥८॥

पितरो वसवस्साध्याः ह्यश्विनौ मरुतो मनुः ।
वायुर्वह्निः प्रजाप्राणा ऋतुकर्ता प्रभाकरः ॥९॥

आदित्यः सविता सूर्यः खगः पूषा गभस्तिमान् ।
सुवर्णसदृशो भानुर्हिरण्यरेतो दिवाकरः ॥१०॥

हरिदश्वस्सहस्रार्चिस्सप्तसप्तिर्मरीचिमान् ।
तिमिरोन्मथनश्शम्भुस्त्वष्टा मार्ताण्ड अंशुमान् ॥११॥

हिरण्यगर्भश्शिशिरस्तपनो भास्करो रविः ।
अग्निगर्भोऽदितेः पुत्रः शङ्खश्शिशिरनाशनः ॥१२॥

व्योमनाथस्तमोभेदी ऋग्यजुस्सामपारगः ।
घनवृष्टिरपां मित्रो विन्ध्यवीथीप्लवङ्गमः ॥१३॥

आतपी मण्डली मृत्युः पिङ्गलस्सर्वतापनः ।
कविर्विश्वो महातेजाः रक्तस्सर्वभवोद्भवः ॥१४॥

नक्षत्रग्रहताराणामधिपो विश्वभावनः ।
तेजसामपि तेजस्वी द्वादशात्मन्नमोऽस्तु ते ॥१५॥

नमः पूर्वाय गिरये पश्चिमायाद्रये नमः ।
ज्योतिर्गणानां पतये दिनाधिपतये नमः ॥१६॥

जयाय जयभद्राय हर्यश्वाय नमो नमः ।
नमो नमस्सहस्रांशो आदित्याय नमो नमः ॥१७॥

नम उग्राय वीराय सारङ्गाय नमो नमः ।
नमः पद्मप्रबोधाय मार्तण्डाय नमो नमः ॥१८॥

ब्रह्मेशानाच्युतेशाय सूर्यादित्यवर्चसे ।
भास्वते सर्वभक्षाय रौद्राय वपुषे नमः ॥१९॥

तमोघ्नाय हिमघ्नाय शत्रुघ्नायामितात्मने ।
कृतघ्नघ्नाय देवाय ज्योतिषां पतये नमः ॥२०॥

तप्तचामीकराभाय वह्नये विश्वकर्मणे ।
नमस्तमोऽभिनिघ्नाय रुचये लोकसाक्षिणे ॥२१॥

नाशयत्येष वै भूतं तदेव सृजति प्रभुः ।
पायत्येष तपत्येष वर्षत्येष गभस्तिभिः ॥२२॥

एष सुप्तेषु जागर्ति भूतेषु परिनिष्ठितः ।
एष चैवाग्निहोत्रं च फलं चैवाग्निहोत्रिणाम् ॥२३॥

वेदाश्च क्रतवश्चैव क्रतूनां फलमेव च ।
यानि कृत्यानि लोकेषु सर्व एष रविः प्रभुः ॥२४॥

एनमापत्सु कृच्छ्रेषु कान्तारेषु भयेषु च ।
कीर्तयन् पुरुषः कश्चिन्नावसीदति राघव ॥२५॥

पूजयस्वैनमेकाग्रो देवदेवं जगत्पतिम् ।
एतत्त्रिगुणितं जप्त्वा युद्धेषु विजयिष्यसि ॥२६॥

अस्मिन् क्षणे महाबाहो रावणं त्वं वधिष्यसि ।
एवमुक्त्वा ततोऽगस्त्यो जगाम च यथागतम् ॥२७॥

एतच्छ्रुत्वा महातेजाः नष्टशोकोऽभवत्तदा ।
धारयामास सुप्रीतो राघवः प्रयतात्मवान् ॥२८॥

आदित्यं प्रेक्ष्य जप्त्वा तु परं हर्षमवाप्तवान् ।
त्रिराचम्य शुचिर्भूत्वा धनुरादाय वीर्यवान् ॥२९॥

रावणं प्रेक्ष्य हृष्टात्मा युद्धाय समुपागमत् ।
सर्वयत्नेन महता वधे तस्य धृतोऽभवत् ॥३०॥

अथ रविरवदन्निरीक्ष्य रामं मुदितमनाः परमं प्रहृष्यमाणः ।
निशिचरपतिसंक्षयं विदित्वा सुरगणमध्यगतो वचस्त्वरेति ॥३१॥

Kanakadhara Stotram in Telugu Lyrics

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Kanakadhara Stotram in Telugu

వందే వందారు మందారం ఇందిరానంద కందలమ్ |
అమందానందసందోహం బంధురం సింధురాననం ||

అంగం హరేః పులకభూషణమాశ్రయంతీ
భృంగాంగనేవ ముకుళాభరణం తమాలమ్ |
అంగీకృతాఖిలవిభూతిరపాంగలీలా
మాంగళ్యదాస్తు మమ మంగళదేవతాయాః || ౧ ||

ముగ్ధా ముహుర్విదధతీ వదనే మురారేః
ప్రేమత్రపాప్రణిహితాని గతాగతాని |
మాలా దృశోర్మధుకరీవ మహోత్పలే యా
సా మే శ్రియం దిశతు సాగరసంభవాయాః || ౨ ||

ఆమీలితాక్షమధిగమ్య ముదా ముకుందమ్-
ఆనందకందమనిమేషమనంగతంత్రమ్ |
ఆకేకరస్థితకనీనికపక్ష్మనేత్రం
భూత్యై భవేన్మమ భుజంగశయాంగనాయాః || ౩ ||

బాహ్వంతరే మధుజితః శ్రితకౌస్తుభే యా
హారావళీవ హరినీలమయీ విభాతి |
కామప్రదా భగవతోఽపి కటాక్షమాలా
కళ్యాణమావహతు మే కమలాలయాయాః || ౪ ||

కాలాంబుదాళిలలితోరసి కైటభారేః
ధారాధరే స్ఫురతి యా తటిదంగనేవ |
మాతుస్సమస్తజగతాం మహనీయమూర్తిః
భద్రాణి మే దిశతు భార్గవనందనాయాః || ౫ ||

ప్రాప్తం పదం ప్రథమతః ఖలు యత్ప్రభావాత్
మాంగళ్యభాజి మధుమాథిని మన్మథేన |
మయ్యాపతేత్తదిహ మంథరమీక్షణార్ధం
మందాలసం చ మకరాలయకన్యకాయాః || ౬ ||

విశ్వామరేంద్రపదవిభ్రమదానదక్షం
ఆనందహేతురధికం మురవిద్విషోఽపి |
ఈషన్నిషీదతు మయి క్షణమీక్షణార్థం
ఇందీవరోదరసహోదరమిందిరాయాః || ౭ ||

ఇష్టా విశిష్టమతయోఽపి యయా దయార్ద్ర
దృష్ట్యా త్రివిష్టపపదం సులభం లభంతే |
దృష్టిః ప్రహృష్ట కమలోదరదీప్తిరిష్టాం
పుష్టిం కృషీష్ట మమ పుష్కరవిష్టరాయాః || ౮ ||

దద్యాద్దయానుపవనో ద్రవిణాంబుధారా-
మస్మిన్న కించన విహంగశిశౌ విషణ్ణే |
దుష్కర్మఘర్మమపనీయ చిరాయ దూరం
నారాయణప్రణయినీనయనాంబువాహః || ౯ ||

గీర్దేవతేతి గరుడధ్వజసుందరీతి
శాకంభరీతి శశిశేఖరవల్లభేతి |
సృష్టిస్థితిప్రళయకేలిషు సంస్థితాయై
తస్యై నమస్త్రిభువనైకగురోస్తరుణ్యై || ౧౦ ||

శ్రుత్యై నమోఽస్తు శుభకర్మఫలప్రసూత్యై
రత్యై నమోఽస్తు రమణీయగుణార్ణవాయై |
శక్త్యై నమోఽస్తు శతపత్రనికేతనాయై
పుష్ట్యై నమోఽస్తు పురుషోత్తమవల్లభాయై || ౧౧ ||

నమోఽస్తు నాళీకనిభాననాయై
నమోఽస్తు దుగ్ధోదధిజన్మభూమ్యై |
నమోఽస్తు సోమామృతసోదరాయై
నమోఽస్తు నారాయణవల్లభాయై || ౧౨ ||

నమోఽస్తు హేమాంబుజపీఠికాయై
నమోఽస్తు భూమండలనాయికాయై |
నమోఽస్తు దేవాదిదయాపరాయై
నమోఽస్తు శార్ఙ్గాయుధవల్లభాయై || ౧౩ ||

నమోఽస్తు దేవ్యై భృగునందనాయై
నమోఽస్తు విష్ణోరురసిస్థితాయై |
నమోఽస్తు లక్ష్మ్యై కమలాలయాయై
నమోఽస్తు దామోదరవల్లభాయై || ౧౪ ||

నమోఽస్తు కాంత్యై కమలేక్షణాయై
నమోఽస్తు భూత్యై భువనప్రసూత్యై |
నమోఽస్తు దేవాదిభిరర్చితాయై
నమోఽస్తు నందాత్మజవల్లభాయై || ౧౫ ||

సంపత్కరాణి సకలేంద్రియనందనాని
సామ్రాజ్యదానవిభవాని సరోరుహాక్షి |
త్వద్వందనాని దురితాహరణోద్యతాని
మామేవ మాతరనిశం కలయంతు మాన్యే || ౧౬ ||

యత్కటాక్షసముపాసనావిధిః
సేవకస్య సకలార్థసంపదః |
సంతనోతి వచనాంగమానసైః
త్వాం మురారిహృదయేశ్వరీం భజే || ౧౭ ||

సరసిజనిలయే సరోజహస్తే
ధవళతమాంశుకగంధమాల్యశోభే |
భగవతి హరివల్లభే మనోజ్ఞే
త్రిభువనభూతికరి ప్రసీద మహ్యమ్ || ౧౮ ||

దిగ్ఘస్తిభిః కనకకుంభముఖావసృష్ట
స్వర్వాహినీ విమలచారుజలప్లుతాంగీమ్ |
ప్రాతర్నమామి జగతాం జననీమశేష
లోకాధినాథగృహిణీమమృతాబ్ధిపుత్రీమ్ || ౧౯ ||

కమలే కమలాక్షవల్లభే త్వం
కరుణాపూరతరంగితైరపాంగైః |
అవలోకయ మామకించనానాం
ప్రథమం పాత్రమకృత్రిమం దయాయాః || ౨౦ ||

దేవి ప్రసీద జగదీశ్వరి లోకమాతః
కళ్యాణదాత్రి కమలేక్షణజీవనాథే |
దారిద్ర్యభీతిహృదయం శరణాగతం మామ్
ఆలోకయ ప్రతిదినం సదయైరపాంగైః || ౨౧ ||

స్తువంతి యే స్తుతిభిరమీభిరన్వహం
త్రయీమయీం త్రిభువనమాతరం రమామ్ |
గుణాధికా గురుతరభాగ్యభాగినో
భవంతి తే భువి బుధభావితాశయాః || ౨౨ ||

Ram Navmi Katha – Birth of Lord Ram

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Ram Navmi Katha in English – Birth of Lord Ram

Come the month of March and April and the Hindus in India get ready to celebrate the festival of Ramnavami which is a very important Indian festival and is celebrated across the Indian subcontinent.

This year too in 2017, the festival of Ramnavami would be once again celebrated with a lot of fervour and enthusiasm. This is the festival that is celebrated as the birthday of Lord Ram and is one of the most eagerly awaited festivals amongst the Hindus. Lord Ram is one of the famous Hindu deities and is believed to be the seventh incarnation of Lord Vishnu in his Dashavatara forms. Lord Rama was born to Queen Kausalya and King Dasarath and this birth day is revered as Ram Navmi and there are lot of celebrations on this occasion. Ram Navami falls on the Chaitra month of the Hindu calendar.

To mark the birth anniversary of Lord Rama, Ram Navami is celebrated by Hindus worldwide. Ram Navami will be celebrated on April 4, 2017 in India.

On the pious occasion of Lord Ram’s birthday, lets read the Ram Navami Katha!

Read Here Ram Navami Katha in Hindi

Ram Navmi Story

Bala Kanda, a part of the great epic ‘Ramayana’ attributed to the great Sant Valmiki and Tulsidasa, brings out the birth story of Lord Ram, his brothers Lakshma, Bharata and Shatrugana, his loyal wife Sita and his true devotee Hanumana in a very astonishing way.

According to the scripts in Ramayana, Lord Ram was born in Treyta Yuga. The legend goes like this – Dashratha, the King of Ayodhya lived with his three wives, Kaushalya, Kaikeyi and Sumitra. During the reign of Dashratha, Ayodhya reached a period of great prosperity. However, Dasaratha faced a big problem – he has no child and therefore no heir to the throne in Ikshvaku Kula. Hence, he performed a fire sacrifice known as Putra-Kameshti Yagya on the suggestion of Rishi Vashishta to get a desired child. A very holy saint, rishi Rishyashring performed the sacrificial offerings. As a consequence, Agni Dev or Yagneshwara appeared in front of Dashratha and provided him with a bowl of divine Kheer/Payasam. He requested Dashrartha to divide the pudding between his wives. Dashratrtha followed the order and gave half of the kheer to his elder wife Kaushyala and another half to younger wife Kaitkeyi. Both queens further gave one half of their portions to Sumitra. On the ninth day (navami) in the month of Chaitra (April-May), Kaushalya gave birth to Rama, Kaikeyi to Bharata and Sumitra to Lakshma and Shatrugna. Since then, this day is celebrated as Rama Navami, with great zeal through out the world.

Santoshi Mata Chalisa in Hindi Lyrics

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Santoshi Mata Chalisa in Hindi

॥ श्री संतोषी माता चालीसा ॥

दोहा

बन्दौं सन्तोषी चरण रिद्धि-सिद्धि दातार ।
ध्यान धरत ही होत नर दुःख सागर से पार ॥

भक्तन को सन्तोष दे सन्तोषी तव नाम ।
कृपा करहु जगदम्ब अब आया तेरे धाम ॥

जय सन्तोषी मात अनूपम । शान्ति दायिनी रूप मनोरम ॥

सुन्दर वरण चतुर्भुज रूपा । वेश मनोहर ललित अनुपा ॥

श्वेताम्बर रूप मनहारी । माँ तुम्हारी छवि जग से न्यारी ॥

दिव्य स्वरूपा आयत लोचन । दर्शन से हो संकट मोचन ॥

जय गणेश की सुता भवानी । रिद्धि-सिद्धि की पुत्री ज्ञानी ॥

अगम अगोचर तुम्हरी माया । सब पर करो कृपा की छाया ॥

नाम अनेक तुम्हारे माता । अखिल विश्व है तुमको ध्याता ॥

तुमने रूप अनेकों धारे । को कहि सके चरित्र तुम्हारे ॥

धाम अनेक कहाँ तक कहिये । सुमिरन तब करके सुख लहिये ॥

विन्ध्याचल में विन्ध्यवासिनी । कोटेश्वर सरस्वती सुहासिनी ॥

कलकत्ते में तू ही काली । दुष्ट नाशिनी महाकराली ॥

सम्बल पुर बहुचरा कहाती । भक्तजनों का दुःख मिटाती ॥

ज्वाला जी में ज्वाला देवी । पूजत नित्य भक्त जन सेवी ॥

नगर बम्बई की महारानी । महा लक्श्मी तुम कल्याणी ॥

मदुरा में मीनाक्शी तुम हो । सुख दुख सबकी साक्शी तुम हो ॥

राजनगर में तुम जगदम्बे । बनी भद्रकाली तुम अम्बे ॥

पावागढ़ में दुर्गा माता । अखिल विश्व तेरा यश गाता ॥

काशी पुराधीश्वरी माता । अन्नपूर्णा नाम सुहाता ॥

सर्वानन्द करो कल्याणी । तुम्हीं शारदा अमृत वाणी ॥

तुम्हरी महिमा जल में थल में । दुःख दारिद्र सब मेटो पल में ॥

जेते ऋषि और मुनीशा । नारद देव और देवेशा ।
इस जगती के नर और नारी । ध्यान धरत हैं मात तुम्हारी ॥

जापर कृपा तुम्हारी होती । वह पाता भक्ति का मोती ॥

दुःख दारिद्र संकट मिट जाता । ध्यान तुम्हारा जो जन ध्याता ॥

जो जन तुम्हरी महिमा गावै । ध्यान तुम्हारा कर सुख पावै ॥

जो मन राखे शुद्ध भावना । ताकी पूरण करो कामना ॥

कुमति निवारि सुमति की दात्री । जयति जयति माता जगधात्री ॥

शुक्रवार का दिवस सुहावन । जो व्रत करे तुम्हारा पावन ॥

गुड़ छोले का भोग लगावै । कथा तुम्हारी सुने सुनावै ॥

विधिवत पूजा करे तुम्हारी । फिर प्रसाद पावे शुभकारी ॥

शक्ति-सामरथ हो जो धनको । दान-दक्शिणा दे विप्रन को ॥

वे जगती के नर औ नारी । मनवांछित फल पावें भारी ॥

जो जन शरण तुम्हारी जावे । सो निश्चय भव से तर जावे ॥

तुम्हरो ध्यान कुमारी ध्यावे । निश्चय मनवांछित वर पावै ॥

सधवा पूजा करे तुम्हारी । अमर सुहागिन हो वह नारी ॥

विधवा धर के ध्यान तुम्हारा । भवसागर से उतरे पारा ॥

जयति जयति जय सन्कट हरणी । विघ्न विनाशन मंगल करनी ॥

हम पर संकट है अति भारी । वेगि खबर लो मात हमारी ॥

निशिदिन ध्यान तुम्हारो ध्याता । देह भक्ति वर हम को माता ॥

यह चालीसा जो नित गावे । सो भवसागर से तर जावे ॥

Navagraha Stotram in Telugu

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Navagraha Stotram in Telugu Lyrics

జపాకుసుమసంకాశం కాశ్యపేయం మహద్యుతిమ్ |
తమోఽరిం సర్వపాపఘ్నం ప్రణతోఽస్మి దివాకరమ్ || ౧ ||

దధిశంఖతుషారాభం క్షీరోదార్ణవసంభవమ్ |
నమామి శశినం సోమం శంభోర్ముకుటభూషణమ్ || ౨ ||

ధరణీగర్భసంభూతం విద్యుత్కాంతిసమప్రభమ్ |
కుమారం శక్తిహస్తం చ మంగళం ప్రణమామ్యహమ్ || ౩ ||

ప్రియంగుకలికాశ్యామం రూపేణాప్రతిమం బుధమ్ |
సౌమ్యం సౌమ్యగుణోపేతం తం బుధం ప్రణమామ్యహమ్ || ౪ ||

దేవానాం చ ఋషీణాం చ గురుం కాంచనసంనిభమ్ |
బుద్ధిభూతం త్రిలోకేశం తం నమామి బృహస్పతిమ్ || ౫ ||

హిమకుందమృణాలాభం దైత్యానాం పరమం గురుమ్ |
సర్వశాస్త్రప్రవక్తారం భార్గవం ప్రణమామ్యహమ్ || ౬ ||

నీలాంజనసమాభాసం రవిపుత్రం యమాగ్రజమ్ |
ఛాయామార్తండసంభూతం తం నమామి శనైశ్చరమ్ || ౭ ||

అర్ధకాయం మహావీర్యం చంద్రాదిత్యవిమర్దనమ్ |
సింహికాగర్భసంభూతం తం రాహుం ప్రణమామ్యహమ్ || ౮ ||

పలాశపుష్పసంకాశం తారకాగ్రహమస్తకమ్ |
రౌద్రం రౌద్రాత్మకం ఘోరం తం కేతుం ప్రణమామ్యహమ్ || ౯ ||

ఇతి వ్యాసముఖోద్గీతం యః పఠేత్సుసమాహితః |
దివా వా యది వా రాత్రౌ విఘ్నశాంతిర్భవిష్యతి || ౧౦ ||

నరనారీనృపాణాం చ భవేద్దుఃస్వప్ననాశనమ్ |
ఐశ్వర్యమతులం తేషామారోగ్యం పుష్టివర్ధనమ్ || ౧౧ ||

గృహనక్షత్రజాః పీడాస్తస్కరాగ్నిసముద్భవాః |
తాః సర్వాః ప్రశమం యాంతి వ్యాసో బ్రూతే న సంశయః || ౧౨ ||

Ram Navami Katha in Hindi

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राम नवमी कथा (Ram Navami Katha in Hindi)

पौराणिक कथानुसार राम नवमी के ही दिन त्रेता युग में महाराज दशरथ के घर विष्णु जी के अवतार भगवान श्री राम का जन्म हुआ था। मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान राम का जन्म रावण के अंत के लिए हुआ था। श्रीराम को लोग उनके सुशासन, मर्यादित व्यवहार और सदाचार युक्त शासन के लिए याद करते हैं। उत्तर भारत समेत देश के कई हिस्सों में राम नवमी का त्यौहार पूरे हर्षोत्पादक के साथ मनाया जाता है।

इस दिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु श्री राम की जन्मभूमि अयोध्या आते हैं और प्रातःकाल सरयू नदी में स्नान कर भगवान के मंदिर में जाकर भक्तिपूर्वक उनकी पूजा-अर्चना करते हैं। राम नवमी के दिन जगह-जगह रामायण का पाठ होता है। कई जगह भगवान राम, सीता, लक्ष्मण और भक्त हनुमान की रथयात्रा निकाली जाती है, जिसमें हजारों की संख्या में श्रद्धालु भाग लेते हैं।

रामायण में भगवान राम और उनके तीन भाईयों लक्ष्मण, भरत और शत्रुघ्न का उल्लेख तो कई जगह मिलता है लेकिन इनकी बहन भी थी इसका उल्लेख कम ही मिलता है। भागवत में भगवान राम के अवतार लेने के संदर्भ में इनकी बहन का जिक्र आया है।

राजा दशरथ और इनकी तीनों रानियां इस बात को लेकर चिंतित रहती हैं कि पुत्र नहीं होने पर उत्तराधिकारी कौन होगा। इनकी चिंता दूर करने के लिए ऋषि वशिष्ठ सलाह देते हैं कि आप अपने दामाद ऋंग ऋषि से पुत्रेष्ठी यज्ञ करवाएं। इससे पुत्र की प्राप्ति होगी।

ऋंग ऋषि का विवाह राजा दशरथ की इकलौती पुत्री शांता से हुआ था। राजा दशरथ ने अपनी पुत्री शांता को रोमपाद नामक के राजा को गोद दे दिया था। शांता के कहने पर ही ऋंग ऋषि राजा दशरथ के लिए पुत्रेष्ठी यज्ञ करने के लिए तैयार हुए थे।

इसका कारण यह था कि यज्ञ कराने वाले का जीवन भर का पुण्य इस यज्ञ की आहुति में नष्ट हो जाता। राजा दशरथ ने ऋंग ऋषि को यज्ञ करवाने के बदले बहुत सा धन दिया जिससे इनके पुत्र और कन्या का भरण-पोषण हुआ। यग्य के  परिणाम रूप में, अग्नि देव राजा दशरथ के सामने प्रकट हुए और दिव्य खीर का कटोरा प्रदान की है। उन्होंने राजा दशरथ को खीर अपनी पत्नियों के बीच विभाजित करने का अनुरोध किया। राजा दशरथ आदेश का पालन किया और उनके बड़े पत्नी कौसल्या और छोटी पत्नी कैकई को खीर आधी आधी बाट दी । दोनों रानियों आगे सुमित्रा को अपने हिस्से में से एक आधा हिस्सा दे दिया । चैत्र (अप्रैल- मई) के महीने में नौवें दिन ( नवमी ) पर, कौशल्या को   राम, कैकेयी को भरत और सुमित्रा को लक्ष्मण और शत्रुघ्न पुत्र रूप मे प्राप्त हुवे । तब से यह दिन राम नवमी के रूप में , बड़ी उत्साह के साथ मनाया जाता है।

ऋंग ऋषि फिर से पुण्य अर्जित करने के लिए वन में जाकर तपस्या करने लगे।