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Nag Panchami at Nagchandreshwar Mahadev Ujjain

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Nagchandreshwar

Nagchandreshwar Ujjain is a unique manifestation of Hindu God Shiva and this rare murti of Shiva is located on the third storey of the Mahakaleshwar Temple in Ujjain in Madhya Pradesh. This rare murti of Shiva as Nagchandreshvar is open to darshan only on the Nagpanchami day in Shravan month. Nagchandreshwar darshan happens in a year only on the fifth day of the Shukla Paksha of Shravan month. In this form Hindu God Shiva is more associated with the Nagas (Snakes) and Chandra (Moon). Thousands of devotees arrive on the day at Mahakaleshwar Temple to have darshan of Shiva as Nagchandreshwar.

The idol of Nagchandreshwar on the third storey is open for darshan only on the day of Nag Panchami. The temple has five levels, one of which is underground. The temple itself is located in a spacious courtyard surrounded by massive walls near a lake. The shikhar or the spire is adorned with sculptural finery. Brass lamps light the way to the underground sanctum. It is believed that prasada (holy offering) offered here to the deity can be re-offered unlike all other shrines.

Kaal Sarpa Yog Mantra | Navnag Stotra | नवनागस्त्रोत्रं

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Navnag Stotra in Sanskrit

Navnag Stotra, this powerful mantra of the nine nagas can be chanted on NagPanchami, Naga Chaturthi & Shasti days. It is also called as KalSarpa Yog Mantra.

ll नवनाग स्तोत्र ll

अनन्तं वासुकिं शेषं पद्मनाभं च कम्बलं
शन्खपालं ध्रूतराष्ट्रं च तक्षकं कालियं तथा
एतानि नव नामानि नागानाम च महात्मनं
सायमकाले पठेन्नीत्यं प्रातक्काले विशेषतः
तस्य विषभयं नास्ति सर्वत्र विजयी भवेत
ll इति श्री नवनागस्त्रोत्रं सम्पूर्णं ll

Navnag Stotra in English

Anant vasunki sensh padmanabha che Kambal
Sankhpal dhutrashtra che takshak kalia tatha
Atayni nav namani naganam che mahatman
Sayamkale patenitya sarvatra vijaye bhavat
ll Iti shree navnag stotram sampurnam ll

Nag Gayatri Mantra in Sanskrit

नाग गायत्री मंत्र
ॐ नव कुलाय विध्महे विषदन्ताय धी माहि
तन्नो सर्प प्रचोदयात ll

Nag Gayatri Mantra in English

Om nav kulaye vidhmahe vishdantaye dhee mahi
tanno sarp prachodayat ll

Nag Panchami Puja and Vrat 2020

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Nag Panchami Puja and Vrat

Nag Panchami puja and fast is highly useful to reduce the effective Kaal Sarp dosh from your Kundli. 25th July 2020, Thursday is Nag Panchami. Know Nag Panchami Katha, puja, mantra and rituals. Seek blessings of Nag devta and stay blessed.

It is believed that any Puja offered to snakes would reach to the serpent Gods. Hence people worship live snakes on the day as representative of serpents Gods who are revered and worshiped in Hinduism. Although there are several serpent Gods, following twelve are worshiped during Nag Panchami Puja

Nag Panchami Puja Mantra

Sarva Nagaah preeyantam mey yey kechit Prithivithaley,
yey cha helimarichistha yentarey Divi samstithah
Yey Nadeeshu Mahanaga ye Sarasvati gaaminah,
yey cha Vaapee tadagashu teshu sarveshu vai namah

Nag Panchami Katha in Hindi

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Nag Panchami Story

किसी राज्य में एक किसान परिवार रहता था। किसान के दो पुत्र व एक पुत्री थी। एक दिन हल जोतते समय हल से नाग के तीन बच्चे कुचल कर मर गए। नागिन पहले तो विलाप करती रही फिर उसने अपनी संतान के हत्यारे से बदला लेने का संकल्प किया। रात्रि को अंधकार में नागिन ने किसान, उसकी पत्नी व दोनों लड़कों को डस लिया।

अगले दिन प्रातः किसान की पुत्री को डसने के उद्देश्य से नागिन फिर चली तो किसान कन्या ने उसके सामने दूध का भरा कटोरा रख दिया। हाथ जोड़ क्षमा मांगने लगी। नागिन ने प्रसन्न होकर उसके माता-पिता व दोनों भाइयों को पुनः जीवित कर दिया। उस दिन श्रावण शुक्ल पंचमी थी। तब से आज तक नागों के कोप से बचने के लिए इस दिन नागों की पूजा की जाती है।

Shravan Somwar Vrat Katha in Hindi

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Shravan Somwar Vrat Katha in Hindi

Shravan Somwar Vrat Katha in Hindi

Shravan Somwar Vrat Katha

श्रावण सोमवार की कथा के अनुसार अमरपुर नगर में एक धनी व्यापारी रहता था। दूर-दूर तक उसका व्यापार फैला हुआ था। नगर में उस व्यापारी का सभी लोग मान-सम्मान करते थे। इतना सबकुछ होने पर भी वह व्यापारी अंतर्मन से बहुत दुखी था क्योंकि उस व्यापारी का कोई पुत्र नहीं था।

दिन-रात उसे एक ही चिंता सताती रहती थी। उसकी मृत्यु के बाद उसके इतने बड़े व्यापार और धन-संपत्ति को कौन संभालेगा।
पुत्र पाने की इच्छा से वह व्यापारी प्रति सोमवार भगवान शिव की व्रत-पूजा किया करता था। सायंकाल को व्यापारी शिव मंदिर में जाकर भगवान शिव के सामने घी का दीपक जलाया करता था।

उस व्यापारी की भक्ति देखकर एक दिन पार्वती ने भगवान शिव से कहा- ‘हे प्राणनाथ, यह व्यापारी आपका सच्चा भक्त है। कितने दिनों से यह सोमवार का व्रत और पूजा नियमित कर रहा है। भगवान, आप इस व्यापारी की मनोकामना अवश्य पूर्ण करें।’

भगवान शिव ने मुस्कराते हुए कहा- ‘हे पार्वती! इस संसार में सबको उसके कर्म के अनुसार फल की प्राप्ति होती है। प्राणी जैसा कर्म करते हैं, उन्हें वैसा ही फल प्राप्त होता है।’

इसके बावजूद पार्वतीजी नहीं मानीं। उन्होंने आग्रह करते हुए कहा- ‘नहीं प्राणनाथ! आपको इस व्यापारी की इच्छा पूरी करनी ही पड़ेगी। यह आपका अनन्य भक्त है। प्रति सोमवार आपका विधिवत व्रत रखता है और पूजा-अर्चना के बाद आपको भोग लगाकर एक समय भोजन ग्रहण करता है। आपको इसे पुत्र-प्राप्ति का वरदान देना ही होगा।’

पार्वती का इतना आग्रह देखकर भगवान शिव ने कहा- ‘तुम्हारे आग्रह पर मैं इस व्यापारी को पुत्र-प्राप्ति का वरदान देता हूं। लेकिन इसका पुत्र 16 वर्ष से अधिक जीवित नहीं रहेगा।’

उसी रात भगवान शिव ने स्वप्न में उस व्यापारी को दर्शन देकर उसे पुत्र-प्राप्ति का वरदान दिया और उसके पुत्र के 16 वर्ष तक जीवित रहने की बात भी बताई।

भगवान के वरदान से व्यापारी को खुशी तो हुई, लेकिन पुत्र की अल्पायु की चिंता ने उस खुशी को नष्ट कर दिया। व्यापारी पहले की तरह सोमवार का विधिवत व्रत करता रहा। कुछ महीने पश्चात उसके घर अति सुंदर पुत्र उत्पन्न हुआ। पुत्र जन्म से व्यापारी के घर में खुशियां भर गईं। बहुत धूमधाम से पुत्र-जन्म का समारोह मनाया गया।

व्यापारी को पुत्र-जन्म की अधिक खुशी नहीं हुई क्योंकि उसे पुत्र की अल्प आयु के रहस्य का पता था। यह रहस्य घर में किसी को नहीं मालूम था। विद्वान ब्राह्मणों ने उस पुत्र का नाम अमर रखा।

जब अमर 12 वर्ष का हुआ तो शिक्षा के लिए उसे वाराणसी भेजने का निश्चय हुआ। व्यापारी ने अमर के मामा दीपचंद को बुलाया और कहा कि अमर को शिक्षा प्राप्त करने के लिए वाराणसी छोड़ आओ। अमर अपने मामा के साथ शिक्षा प्राप्त करने के लिए चल दिया। रास्ते में जहां भी अमर और दीपचंद रात्रि विश्राम के लिए ठहरते, वहीं यज्ञ करते और ब्राह्मणों को भोजन कराते थे।

लंबी यात्रा के बाद अमर और दीपचंद एक नगर में पहुंचे। उस नगर के राजा की कन्या के विवाह की खुशी में पूरे नगर को सजाया गया था। निश्चित समय पर बारात आ गई लेकिन वर का पिता अपने बेटे के एक आंख से काने होने के कारण बहुत चिंतित था। उसे इस बात का भय सता रहा था कि राजा को इस बात का पता चलने पर कहीं वह विवाह से इनकार न कर दें। इससे उसकी बदनामी होगी।

वर के पिता ने अमर को देखा तो उसके मस्तिष्क में एक विचार आया। उसने सोचा क्यों न इस लड़के को दूल्हा बनाकर राजकुमारी से विवाह करा दूं। विवाह के बाद इसको धन देकर विदा कर दूंगा और राजकुमारी को अपने नगर में ले जाऊंगा।

वर के पिता ने इसी संबंध में अमर और दीपचंद से बात की। दीपचंद ने धन मिलने के लालच में वर के पिता की बात स्वीकार कर ली। अमर को दूल्हे के वस्त्र पहनाकर राजकुमारी चंद्रिका से विवाह करा दिया गया। राजा ने बहुत-सा धन देकर राजकुमारी को विदा किया।

अमर जब लौट रहा था तो सच नहीं छिपा सका और उसने राजकुमारी की ओढ़नी पर लिख दिया- ‘राजकुमारी चंद्रिका, तुम्हारा विवाह तो मेरे साथ हुआ था, मैं तो वाराणसी में शिक्षा प्राप्त करने जा रहा हूं। अब तुम्हें जिस नवयुवक की पत्नी बनना पड़ेगा, वह काना है।’

जब राजकुमारी ने अपनी ओढ़नी पर लिखा हुआ पढ़ा तो उसने काने लड़के के साथ जाने से इनकार कर दिया। राजा ने सब बातें जानकर राजकुमारी को महल में रख लिया। उधर अमर अपने मामा दीपचंद के साथ वाराणसी पहुंच गया। अमर ने गुरुकुल में पढ़ना शुरू कर दिया।

जब अमर की आयु 16 वर्ष पूरी हुई तो उसने एक यज्ञ किया। यज्ञ की समाप्ति पर ब्राह्मणों को भोजन कराया और खूब अन्न, वस्त्र दान किए। रात को अमर अपने शयनकक्ष में सो गया। शिव के वरदान के अनुसार शयनावस्था में ही अमर के प्राण-पखेरू उड़ गए। सूर्योदय पर मामा अमर को मृत देखकर रोने-पीटने लगा। आसपास के लोग भी एकत्र होकर दुःख प्रकट करने लगे।

मामा के रोने, विलाप करने के स्वर समीप से गुजरते हुए भगवान शिव और माता पार्वती ने भी सुने। पार्वतीजी ने भगवान से कहा- ‘प्राणनाथ! मुझसे इसके रोने के स्वर सहन नहीं हो रहे। आप इस व्यक्ति के कष्ट अवश्य दूर करें।’

भगवान शिव ने पार्वतीजी के साथ अदृश्य रूप में समीप जाकर अमर को देखा तो पार्वतीजी से बोले- ‘पार्वती! यह तो उसी व्यापारी का पुत्र है। मैंने इसे 16 वर्ष की आयु का वरदान दिया था। इसकी आयु तो पूरी हो गई।’

पार्वतीजी ने फिर भगवान शिव से निवेदन किया- ‘हे प्राणनाथ! आप इस लड़के को जीवित करें। नहीं तो इसके माता-पिता पुत्र की मृत्यु के कारण रो-रोकर अपने प्राणों का त्याग कर देंगे। इस लड़के का पिता तो आपका परम भक्त है। वर्षों से सोमवार का व्रत करते हुए आपको भोग लगा रहा है।’ पार्वती के आग्रह करने पर भगवान शिव ने उस लड़के को जीवित होने का वरदान दिया और कुछ ही पल में वह जीवित होकर उठ बैठा।

शिक्षा समाप्त करके अमर मामा के साथ अपने नगर की ओर चल दिया। दोनों चलते हुए उसी नगर में पहुंचे, जहां अमर का विवाह हुआ था। उस नगर में भी अमर ने यज्ञ का आयोजन किया। समीप से गुजरते हुए नगर के राजा ने यज्ञ का आयोजन देखा।




राजा ने अमर को तुरंत पहचान लिया। यज्ञ समाप्त होने पर राजा अमर और उसके मामा को महल में ले गया और कुछ दिन उन्हें महल में रखकर बहुत-सा धन, वस्त्र देकर राजकुमारी के साथ विदा किया।

रास्ते में सुरक्षा के लिए राजा ने बहुत से सैनिकों को भी साथ भेजा। दीपचंद ने नगर में पहुंचते ही एक दूत को घर भेजकर अपने आगमन की सूचना भेजी। अपने बेटे अमर के जीवित वापस लौटने की सूचना से व्यापारी बहुत प्रसन्न हुआ।

व्यापारी ने अपनी पत्नी के साथ स्वयं को एक कमरे में बंद कर रखा था। भूखे-प्यासे रहकर व्यापारी और उसकी पत्नी बेटे की प्रतीक्षा कर रहे थे। उन्होंने प्रतिज्ञा कर रखी थी कि यदि उन्हें अपने बेटे की मृत्यु का समाचार मिला तो दोनों अपने प्राण त्याग देंगे।

व्यापारी अपनी पत्नी और मित्रों के साथ नगर के द्वार पर पहुंचा। अपने बेटे के विवाह का समाचार सुनकर, पुत्रवधू राजकुमारी चंद्रिका को देखकर उसकी खुशी का ठिकाना न रहा। उसी रात भगवान शिव ने व्यापारी के स्वप्न में आकर कहा- ‘हे श्रेष्ठी! मैंने तेरे सोमवार के व्रत करने और व्रतकथा सुनने से प्रसन्न होकर तेरे पुत्र को लंबी आयु प्रदान की है।’ व्यापारी बहुत प्रसन्न हुआ।

सोमवार का व्रत करने से व्यापारी के घर में खुशियां लौट आईं। शास्त्रों में लिखा है कि जो स्त्री-पुरुष सोमवार का विधिवत व्रत करते और व्रतकथा सुनते हैं उनकी सभी इच्छाएं पूरी होती हैं।

Mangala Gauri Vrat Katha in Hindi

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Mangala Gauri Vrat Katha

Mangla Gauri Pooja and Vrat, मंगला गौरी व्रत. The Mangla Gari Vrat is observed on every tuesday of the month of Shravan or Sawan.

मंगला गौरी व्रत कथा
इस व्रत के विषय में कथा है कि एक सेठ का कोई पुत्र नहीं था। काफी प्रतीक्षा के बाद उसे एक संतान की प्राप्ति हुई, लेकिन उसकी आयु कम थी। सोलहवें वर्ष में सांप के काटने से उसकी मृत्यु होनी थी। संयोग से उसकी शादी एक ऐसी कन्या से हुई जिसकी मां मंगला गौरी का व्रत करती थी। इस व्रत के प्रभाव के कारण उत्पन्न कन्या के जीवन में वैधव्य का दुःख आ नहीं सकता था। इससे सेठ के पुत्र की अकाल मृत्यु टल गयी और वह दीर्घायु हो गया।

Mangala Gauri Vrat Puja Vidhi in Hindi | मंगला गौरी 2020

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Mangala Gauri Puja Vidhi

The Mangla Gari Vrat is observed on every Tuesday of the month of Shravan, around July-August. As Mondays of this month are the day for worship of Lord Shiva. The Tuesday of this month are the adoration of Mangla Gauri (one of the nine Durga Shobshi). This Fast is mainly observed by Maharashtrian women. Mainly this is done for 16 or 20 Tuesdays. This vrat is dedicated to Goddess Parvati.

मंगला गौरी व्रत की विधि (Mangala Gauri Puja Vidhi)

इस व्रत की विधि के विषय में बताया गया है कि व्रत करने वाले को माता मंगला गौरी की प्रतिमा को सामने रखकर संकल्प करना चाहिए कि वह संतान, सौभाग्य और सुख की प्राप्ति के लिए मंगला गौरी का व्रत रख रही है।

व्रती को एक आटे का दीपक बनाकर उसमें सोलह बातियां जलानी चाहिए इसके बाद सोलह लड्डू,सोलह फल,सोलह पान,सोलह लवंग और ईलायची के साथ सुहाग की सामग्री माता के सामने रखकर उनकी पूजा करें। पूजा के बाद लड्डू सासु मां को दें और शेष सामग्री किसी ब्राह्मण को दें। अगले दिन मंगला गौरी की प्रतिमा को नदी अथवा तालाब में विसर्जित कर दें।

Mangla Gauri Vrat Dates

Mangla Gauri fast will be observed on the following Tuesdays of Shravan month in Maharashtra.

  1. 9th August 2016
  2. 16th August 2016
  3. 23th August 2016
  4. 30th August 2016

Deep Puja Mantra in Sanskrit | शुभम करोति

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Deep Puja on Ashada Amavasya

Deep Puja Mantra

Deep Puja, also known as Deepa Pooja, is observed on the Amavasi (No moon) day in Ashada month in Maharashtra and in some parts of Andhra Pradesh and Karnataka. It is observed to welcome the holy Shravan month by some Hindu communities. All the diyas or lamps in house are cleaned on the day. In different regions, Deep Puja is offered for different reasons.

Some people offer it to welcome the Shravan month which is a holy month and numerous rituals and vratas are offered during the month. Ashada Amavas is the last in Ashada Month and next is the Sawan or Shrawan month. With lightning the diya they pray to god with Shubham karoti Mantra.

दीप प्रज्वलन मंत्र
शुभम करोति कल्याणम आरोग्यं धन सम्प्रद्य |
शत्रु वृद्धि विनाशाय दीप ज्योति नमोस्तुते ||

Ashada Amavasya is Gatari Amavasya. Most popularly known as Gatari, is a Marathi regional festival celebrated especially in Maharashtra and some parts of Goa.

Sant Namdev Aarti – संत नामदेव आरती

Sant Namdev Aarti in Marathi Lyrics

Sant Namdev is one of the most popular and worshiped saint in Maharashtra. Namdev is believed to have been born on 29 October 1230 and left for his heavenly abode at the age of 80 in 1350.

संत नामदेव आरती

जन्मता पांडुरंगे | जिव्हेवरी लिहिले | शतकोटी अभंग | प्रमाण कवित्व रचिले || १ ||
जय जयाजी भक्तरायां | जिवलग नामया | आरती ओवाळिता | चित्त पालटे काया || धृ.||
घ्यावया भक्तिसुख | पांडुरंगे अवतार | धरुनियां तीर्थमिषें | केला जगाचा उद्धार || जय.|| २ ||
प्रत्यक्ष प्रचीती हे | वाळवंट परिस केला | हारपली विषमता | द्दैतबुद्धी निरसली || जय.|| ३ ||
समाधि माहाद्वारी श्रीविठ्ठलचरणी | आरती ओवाळितो | परिसा कर जोडू || जय जयाजी||४ ||

Shravan Somvar Vrat Dates 2020

Shravan Somvar Vrat

In the Hindu calendar, Shravan month is dedicated to Lord Shiva. The whole month is considered auspicious to seek the blessing of Lord Shiva. Devotees keep various fasts during Shravan Month to please Lord Shiva.

Devotee performs ‘Shiva Muth’ on Shravan Somvar and do puja of Shiva-Parvati with Ganesha and Nandi along with panchamritam and other pleasant substances. Offer Water, Milk, Curd, Honey, Ghee, Sugar, Moli, Roli, Janeu, Belpatra, Bhang, Dhtura, Dhoop, Lamp and donations. After puja devotee listen the Shravan Somvar Katha and perform Shiv Shankar aarti along with ‘Om Namah Shivay’ (ॐ नमः शिवाय) Mantra jaap.

Shravani Somvar (श्रावणी सोमवार) Vrat Vidhi and Shiv Muth

Sawan Somwar Vrat Dates for Rajasthan, Uttar Pradesh, Madhya Pradesh, Punjab, Himachal Pradesh and Bihar

17th July (Wednesday) First day of Shravana Month
22nd July (Monday) Sawan Somwar Vrat
29th July (Monday) Sawan Somwar Vrat
5th August (Monday) Sawan Somwar Vrat

12th August (Monday) Sawan Somwar Vrat
15th August (Thursday) Last day of Shravana Month

Sawan Somwar Vrat Dates for Andhra Pradesh, Goa, Maharashtra, Gujarat, Karnataka and Tamil Nadu

2nd August (Friday) First day of Shravana Month
5th August (Monday) Sawan Somwar Vrat
12th August (Monday) Sawan Somwar Vrat
19th August (Monday) Sawan Somwar Vrat

26th August (Monday) Sawan Somwar Vrat
30th August (Thursday) Last day of Shravana Month