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Lakshmi – Kuber Mantra

Lakshmi Kuber Mantra

Diwali – the Festival of light is incomplete without Lakshmi Puja. Chant the given lakshmi puja mantra and make your puja more fruitful.

1) Lakshmi Beej Mantra

ॐ ह्रीं श्रीं लक्ष्मीभयो नमः।।

Om Hreem Shreem Lakshmibhayo Namah1 ||

2) Mahalakshmi Mantra

ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद
ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं महालक्ष्मयै नम:।।

Om Shreem Hreem Shreem Kamale Kamalalaye Praseed Praseed
Om Shreem Hreem Shreem Mahalakshmaye Namah ||

3) Kuber Money Mantra (God of Wealth)

धनदाय नमस्तुभ्यम निधिपद्माधिवाय च I
भवन्तु त्वत्प्रसादान्मे धन धन्यदिसेम्पध II

Om shreem om hreem shreem hreem kleem shreem kleem viteswaraaya namah1

4) Lakshmi Gayatri Mantra

ॐ श्री महालक्ष्म्यै च विद्महे विष्णु पत्न्यै च
धीमहि तन्नो लक्ष्मी प्रचोदयात् ॐ ।।

Om Shree Mahalakshmyai Cha Vidmahe Vishnu Patnyai Cha Dheemahi Tanno Lakshmi Prachodayat Om ||

Maa Siddhidatri – Ninth Form of Nava Durgas

Maa Siddhidatri

सर्व सिद्धियों की दाता “माँ सिद्धिदात्री” देवी दुर्गा का नौवां व अंतिम स्वरुप हैं। नवमी के दिन माँ सिद्धिदात्री की पूजा और कन्या पूजन के साथ ही नवरात्रों का समापन होता है। हिन्दू धर्म के पुराणों में बताया गया है कि देवी सिद्धिदात्री के चार हाथ है जिनमें वह शंख, गदा, कमल का फूल तथा चक्र धारण करे रहती हैं। यह कमल पर विराजमान रहती हैं। इनके गले में सफेद फूलों की माला तथा माथे पर तेज रहता है। इनका वाहन सिंह है। देवीपुराण और ब्रह्मवैवर्त पुराण में देवी की शक्तियों और महिमाओं का बखान किया गया है।

माँ सिद्धिदात्री का मंत्र (Mata Siddhidatri Mantra)
इनका उपासना मंत्र है-
सिद्धगन्धर्वयक्षाघैरसुरैरमरैरपि ।
सेव्यमाना सदा भूयात् सिद्धिदा सिद्धिदायिनी॥

नवरात्र का नौवां दिन (Ninth Day of Navratri): नवरात्र के नौवे दिन मां सिद्धिदात्री की पूजा की जाती है। मां सिद्धिदात्री की पूजा इस साल ७ अक्टूबर २०१९ को होगी।

सिद्धिदात्री की ध्यान (Mata Siddhidatri Dhyan)
वन्दे वांछित मनोरथार्थ चन्द्रार्घकृत शेखराम्।
कमलस्थितां चतुर्भुजा सिद्धीदात्री यशस्वनीम्॥
स्वर्णावर्णा निर्वाणचक्रस्थितां नवम् दुर्गा त्रिनेत्राम्।
शख, चक्र, गदा, पदम, धरां सिद्धीदात्री भजेम्॥
पटाम्बर, परिधानां मृदुहास्या नानालंकार भूषिताम्।
मंजीर, हार, केयूर, किंकिणि रत्नकुण्डल मण्डिताम्॥
प्रफुल्ल वदना पल्लवाधरां कातं कपोला पीनपयोधराम्।
कमनीयां लावण्यां श्रीणकटि निम्ननाभि नितम्बनीम्॥

सिद्धिदात्री की स्तोत्र पाठ (Mata Siddhidatri Stotra)
कंचनाभा शखचक्रगदापद्मधरा मुकुटोज्वलो।
स्मेरमुखी शिवपत्नी सिद्धिदात्री नमोअस्तुते॥
पटाम्बर परिधानां नानालंकारं भूषिता।
नलिस्थितां नलनार्क्षी सिद्धीदात्री नमोअस्तुते॥
परमानंदमयी देवी परब्रह्म परमात्मा।
परमशक्ति, परमभक्ति, सिद्धिदात्री नमोअस्तुते॥
विश्वकर्ती, विश्वभती, विश्वहर्ती, विश्वप्रीता।
विश्व वार्चिता विश्वातीता सिद्धिदात्री नमोअस्तुते॥
भुक्तिमुक्तिकारिणी भक्तकष्टनिवारिणी।
भव सागर तारिणी सिद्धिदात्री नमोअस्तुते॥
धर्मार्थकाम प्रदायिनी महामोह विनाशिनी।
मोक्षदायिनी सिद्धीदायिनी सिद्धिदात्री नमोअस्तुते॥

सिद्धिदात्री की कवच ( Mata Siddhidatri Kavach)
ओंकारपातु शीर्षो मां ऐं बीजं मां हृदयो।
हीं बीजं सदापातु नभो, गुहो च पादयो॥
ललाट कर्णो श्रीं बीजपातु क्लीं बीजं मां नेत्र घ्राणो।
कपोल चिबुको हसौ पातु जगत्प्रसूत्यै मां सर्व वदनो॥

Maa Mahagauri – Eighth Form of Nava Durgas

Maa Mahagauri

शंख और चन्द्र के समान अत्यंत श्वेत वर्ण धारी “माँ महागौरी” माँ दुर्गा का आठवां स्वरुप हैं। नवरात्रि के आठवें दिन देवी महागौरा की पूजा की जाती है। यह शिव जी की अर्धांगिनी है। कठोर तपस्या के बाद देवी ने शिव जी को अपने पति के रुप में प्राप्त किया था। देवी महागौरा के शरीर बहुत गोरा है। महागौरा के वस्त्र और अभुषण श्वेत होने के कारण उन्हें श्वेताम्बरधरा भी कहा गया है। महागौरा की चार भुजाएं है जिनमें से उनके दो हाथों में डमरु और त्रिशुल है तथा अन्य दो हाथ अभय और वर मुद्रा में है। इनका वाहन गाय है। इनके महागौरा नाम पड़ने की कथा

माँ महागौरी का मंत्र (Mata Mahagauri Mantra)
महागौरी की उपासना का मंत्र है-

श्वेते वृषे समारुढा श्वेताम्बरधरा शुचिः।
महागौरी शुभं दघान्महादेवप्रमोददा॥

नवरात्र का आठवां दिन (Eight Day of Navratri): नवरात्र के आठवें दिन मां महागौरी की पूजा की जाती है। कई लोग इस दिन कन्या पूजन भी करते हैं। मां महागौरी की पूजा इस साल ६ अक्टूबर २०१९ को होगी।

महागौरी की ध्यान (Mata Mahagauri Dhyan)
वन्दे वांछित कामार्थे चन्द्रार्घकृत शेखराम्।
सिंहरूढ़ा चतुर्भुजा महागौरी यशस्वनीम्॥
पूर्णन्दु निभां गौरी सोमचक्रस्थितां अष्टमं महागौरी त्रिनेत्राम्।
वराभीतिकरां त्रिशूल डमरूधरां महागौरी भजेम्॥
पटाम्बर परिधानां मृदुहास्या नानालंकार भूषिताम्।
मंजीर, हार, केयूर किंकिणी रत्नकुण्डल मण्डिताम्॥
प्रफुल्ल वंदना पल्ल्वाधरां कातं कपोलां त्रैलोक्य मोहनम्।
कमनीया लावण्यां मृणांल चंदनगंधलिप्ताम्॥

महागौरी की स्तोत्र पाठ (Mata Mahagauri Stotra)
सर्वसंकट हंत्री त्वंहि धन ऐश्वर्य प्रदायनीम्।
ज्ञानदा चतुर्वेदमयी महागौरी प्रणमाभ्यहम्॥
सुख शान्तिदात्री धन धान्य प्रदीयनीम्।
डमरूवाद्य प्रिया अद्या महागौरी प्रणमाभ्यहम्॥
त्रैलोक्यमंगल त्वंहि तापत्रय हारिणीम्।
वददं चैतन्यमयी महागौरी प्रणमाम्यहम्॥

महागौरी की कवच ( Mata Mahagauri Kavach)
ओंकारः पातु शीर्षो मां, हीं बीजं मां, हृदयो।
क्लीं बीजं सदापातु नभो गृहो च पादयो॥
ललाटं कर्णो हुं बीजं पातु महागौरी मां नेत्रं घ्राणो।
कपोत चिबुको फट् पातु स्वाहा मा सर्ववदनो॥

Maa Kaalratri – Seventh Form of Nava Durgas

Maa Kaalratri

दुर्गा जी का सातवां स्वरूप कालरात्रि है। इनका रंग काला होने के कारण ही इन्हें कालरात्रि कहते हैं। असुरों के राजा रक्तबीज का वध करने के लिए देवी दुर्गा ने अपने तेज से इन्हें उत्पन्न किया था। इनकी पूजा शुभ फलदायी होने के कारण इन्हें ‘शुभंकारी’ भी कहते हैं। देवी कालरात्रि का शरीर रात के अंधकार की तरह काला है इनके बाल बिखरे हुए हैं तथा इनके गले में विधुत की माला है। इनके चार हाथ है जिसमें इन्होंने एक हाथ में कटार तथा एक हाथ में लोहे कांटा धारण किया हुआ है। इसके अलावा इनके दो हाथ वरमुद्रा और अभय मुद्रा में है। इनके तीन नेत्र है तथा इनके श्वास से अग्नि निकलती है। कालरात्रि का वाहन गर्दभ(गधा) है।

माँ कालरात्रि का मंत्र (Mata Kaalratri Mantra)
नवरात्र के सातवें दिन माँ कालरात्रि की उपासना इस मंत्र से की जा सकती है-

एकवेणी जपाकर्णपूरा नग्ना खरास्थिता, लम्बोष्टी कर्णिकाकर्णी तैलाभ्यक्तशरीरिणी।
वामपादोल्लसल्लोहलताकण्टकभूषणा, वर्धनमूर्धध्वजा कृष्णा कालरात्रिर्भयङ्करी॥

नवरात्र का सातवां दिन (Seventh Day of Navratri २०१९ ): मां कालरात्रि की पूजा ५ अक्टूबर को की जाएगी।

कालरात्रि की ध्यान (Mata Kaalratri Dhyan)
करालवंदना धोरां मुक्तकेशी चतुर्भुजाम्।
कालरात्रिं करालिंका दिव्यां विद्युतमाला विभूषिताम॥
दिव्यं लौहवज्र खड्ग वामोघोर्ध्व कराम्बुजाम्।
अभयं वरदां चैव दक्षिणोध्वाघः पार्णिकाम् मम॥
महामेघ प्रभां श्यामां तक्षा चैव गर्दभारूढ़ा।
घोरदंश कारालास्यां पीनोन्नत पयोधराम्॥
सुख पप्रसन्न वदना स्मेरान्न सरोरूहाम्।
एवं सचियन्तयेत् कालरात्रिं सर्वकाम् समृध्दिदाम्॥

कालरात्रि की स्तोत्र पाठ (Mata Kaalratri Stotra)
हीं कालरात्रि श्री कराली च क्लीं कल्याणी कलावती।
कालमाता कलिदर्पध्नी कमदीश कुपान्विता॥
कामबीजजपान्दा कमबीजस्वरूपिणी।
कुमतिघ्नी कुलीनर्तिनाशिनी कुल कामिनी॥
क्लीं हीं श्रीं मन्त्र्वर्णेन कालकण्टकघातिनी।
कृपामयी कृपाधारा कृपापारा कृपागमा॥

कालरात्रि की कवच ( Mata Kaalratri Kavach)
ऊँ क्लीं मे हृदयं पातु पादौ श्रीकालरात्रि।
ललाटे सततं पातु तुष्टग्रह निवारिणी॥
रसनां पातु कौमारी, भैरवी चक्षुषोर्भम।
कटौ पृष्ठे महेशानी, कर्णोशंकरभामिनी॥
वर्जितानी तु स्थानाभि यानि च कवचेन हि।
तानि सर्वाणि मे देवीसततंपातु स्तम्भिनी॥

Maa Katyayani – Sixth Form of Nava Durgas

Maa Katyayani

कात्यायनी देवी दुर्गा जी का छठा अवतार हैं। शास्त्रों के अनुसार देवी ने कात्यायन ऋषि के घर उनकी पुत्री के रूप में जन्म लिया, इस कारण इनका नाम कात्यायनी पड़ गया। नवरात्र के छठे दिन कात्यायनी देवी की पूरे श्रद्धा भाव से पूजा की जाती है। दिव्य रुपा कात्यायनी देवी का शरीर सोने के समाना चमकीला है। चार भुजा धारी माँ कात्यायनी सिंह पर सवार हैं। अपने एक हाथ में तलवार और दूसरे में अपना प्रिय पुष्प कमल लिये हुए हैं। अन्य दो हाथ वरमुद्रा और अभयमुद्रा में हैं। इनका वाहन सिंह हैं। मां कात्यायनी अमोघ फलदायिनी मानी गई हैं। शिक्षा प्राप्ति के क्षेत्र में प्रयासरत भक्तों को माता की अवश्य उपासना करनी चाहिए।

माँ कात्यायनी का मंत्र (Mata Katyayani Mantra)
सरलता से अपने भक्तों की इच्छा पूरी करने वाली माँ कात्यायनी का उपासना मंत्र है-

चंद्र हासोज्ज वलकरा शार्दू लवर वाहना|
कात्यायनी शुभं दद्या देवी दानव घातिनि||

नवरात्र 2019 (6th Day of Navratri): मां भगवती के कात्यायनी स्वरूप की उपासना 4 अक्टूबर 2019 को की जाएगी।

कात्यायनी की ध्यान (Mata Katyayani Dhyan)
वन्दे वांछित मनोरथार्थ चन्द्रार्घकृत शेखराम्।
सिंहरूढ़ा चतुर्भुजा कात्यायनी यशस्वनीम्॥
स्वर्णाआज्ञा चक्र स्थितां षष्टम दुर्गा त्रिनेत्राम्।
वराभीत करां षगपदधरां कात्यायनसुतां भजामि॥
पटाम्बर परिधानां स्मेरमुखी नानालंकार भूषिताम्।
मंजीर, हार, केयूर, किंकिणि रत्नकुण्डल मण्डिताम्॥
प्रसन्नवदना पञ्वाधरां कांतकपोला तुंग कुचाम्।
कमनीयां लावण्यां त्रिवलीविभूषित निम्न नाभिम॥

कात्यायनी की स्तोत्र पाठ (Mata Katyayani Stotra)
कंचनाभा वराभयं पद्मधरा मुकटोज्जवलां।
स्मेरमुखीं शिवपत्नी कात्यायनेसुते नमोअस्तुते॥
पटाम्बर परिधानां नानालंकार भूषितां।
सिंहस्थितां पदमहस्तां कात्यायनसुते नमोअस्तुते॥
परमांवदमयी देवि परब्रह्म परमात्मा।
परमशक्ति, परमभक्ति,कात्यायनसुते नमोअस्तुते॥

कात्यायनी की कवच ( Mata Katyayani Kavach)
कात्यायनी मुखं पातु कां स्वाहास्वरूपिणी।
ललाटे विजया पातु मालिनी नित्य सुन्दरी॥
कल्याणी हृदयं पातु जया भगमालिनी॥

Maa Skandmata – Fifth Form of Nava Durgas

Maa Skandmata

नवरात्र के पांचवे दिन माँ दुर्गा के पांचवे स्वरुप भगवान स्कन्द की माता अर्थात “माँ स्कंदमाता” की उपासना की जाती है। कुमार कार्तिकेय को ही “भगवान स्कन्द” के नाम से जाना जाता है।

माँ स्कंदमाता का मंत्र (Mata Skandmata Mantra)
माँ स्कंदमाता का वाहन सिंह है। इस मंत्र के उच्चारण के साथ माँ की आराधना की जाती है-
सिंहासनगता नित्यं पद्माश्रितकरद्वया।
शुभदास्तु सदा देवी स्कन्दमाता यशस्विनी॥

स्कंदमाता की ध्यान (Mata Skandmata Dhyan)
वन्दे वांछित कामार्थे चन्द्रार्धकृतशेखराम्।
सिंहरूढ़ा चतुर्भुजा स्कन्दमाता यशस्वनीम्।।
धवलवर्णा विशुध्द चक्रस्थितों पंचम दुर्गा त्रिनेत्रम्।
अभय पद्म युग्म करां दक्षिण उरू पुत्रधराम् भजेम्॥
पटाम्बर परिधानां मृदुहास्या नानांलकार भूषिताम्।
मंजीर, हार, केयूर, किंकिणि रत्नकुण्डल धारिणीम्॥
प्रफुल्ल वंदना पल्ल्वांधरा कांत कपोला पीन पयोधराम्।
कमनीया लावण्या चारू त्रिवली नितम्बनीम्॥

स्कंदमाता की स्तोत्र पाठ (Mata Skandmata Stotra)
नमामि स्कन्दमाता स्कन्दधारिणीम्।
समग्रतत्वसागररमपारपार गहराम्॥
शिवाप्रभा समुज्वलां स्फुच्छशागशेखराम्।
ललाटरत्नभास्करां जगत्प्रीन्तिभास्कराम्॥
महेन्द्रकश्यपार्चिता सनंतकुमाररसस्तुताम्।
सुरासुरेन्द्रवन्दिता यथार्थनिर्मलादभुताम्॥
अतर्क्यरोचिरूविजां विकार दोषवर्जिताम्।
मुमुक्षुभिर्विचिन्तता विशेषतत्वमुचिताम्॥
नानालंकार भूषितां मृगेन्द्रवाहनाग्रजाम्।
सुशुध्दतत्वतोषणां त्रिवेन्दमारभुषताम्॥
सुधार्मिकौपकारिणी सुरेन्द्रकौरिघातिनीम्।
शुभां पुष्पमालिनी सुकर्णकल्पशाखिनीम्॥
तमोन्धकारयामिनी शिवस्वभाव कामिनीम्।
सहस्त्र्सूर्यराजिका धनज्ज्योगकारिकाम्॥
सुशुध्द काल कन्दला सुभडवृन्दमजुल्लाम्।
प्रजायिनी प्रजावति नमामि मातरं सतीम्॥
स्वकर्मकारिणी गति हरिप्रयाच पार्वतीम्।
अनन्तशक्ति कान्तिदां यशोअर्थभुक्तिमुक्तिदाम्॥
पुनःपुनर्जगद्वितां नमाम्यहं सुरार्चिताम्।
जयेश्वरि त्रिलोचने प्रसीद देवीपाहिमाम्॥

स्कंदमाता की कवच ( Mata Skandmata Kavach)
ऐं बीजालिंका देवी पदयुग्मघरापरा।
हृदयं पातु सा देवी कार्तिकेययुता॥
श्री हीं हुं देवी पर्वस्या पातु सर्वदा।
सर्वांग में सदा पातु स्कन्धमाता पुत्रप्रदा॥
वाणंवपणमृते हुं फ्ट बीज समन्विता।
उत्तरस्या तथाग्नेव वारुणे नैॠतेअवतु॥
इन्द्राणां भैरवी चैवासितांगी च संहारिणी।
सर्वदा पातु मां देवी चान्यान्यासु हि दिक्षु वै॥

Maa Kushmanda – Fourth Form of Nava Durgas

Maa Kushmanda

4th Form of Navdurga: अपनी मंद हंसी से ब्रह्माण्ड का निर्माण करने वाली “माँ कूष्मांडा” देवी दुर्गा का चौथा स्वरुप हैं । माँ कुष्मांडा की पूजा नवरात्रि के चौथे दिन की जाती है। मान्यतानुसार सिंह पर सवार माँ कूष्मांडा सूर्यलोक में वास करती हैं, जो क्षमता किसी अन्य देवी देवता में नहीं है। माँ कूष्मांडा अष्टभुजा धारी हैं और अस्त्र- शस्त्र के साथ माँ के एक हाथ में अमृत कलश भी है।

माँ कूष्माण्डा का मंत्र (Mata Kushmanda Mantra)

देवी कूष्मांडा की उपासना इस मंत्र के उच्चारण से की जाती है-

सुरासम्पूर्णकलशं रुधिराप्लुतमेव च।
दधाना हस्तपद्माभ्यां कूष्माण्डा शुभदास्तु मे॥

कूष्माण्डा की ध्यान (Mata Kushmanda Dhyan)
वन्दे वांछित कामर्थे चन्द्रार्घकृत शेखराम्।
सिंहरूढ़ा अष्टभुजा कूष्माण्डा यशस्वनीम्॥
भास्वर भानु निभां अनाहत स्थितां चतुर्थ दुर्गा त्रिनेत्राम्।
कमण्डलु, चाप, बाण, पदमसुधाकलश, चक्र, गदा, जपवटीधराम्॥
पटाम्बर परिधानां कमनीयां मृदुहास्या नानालंकार भूषिताम्।
मंजीर, हार, केयूर, किंकिणि रत्नकुण्डल, मण्डिताम्॥
प्रफुल्ल वदनांचारू चिबुकां कांत कपोलां तुंग कुचाम्।
कोमलांगी स्मेरमुखी श्रीकंटि निम्ननाभि नितम्बनीम्॥

कूष्माण्डा की स्तोत्र पाठ (Mata Kushmanda Stotra)
दुर्गतिनाशिनी त्वंहि दरिद्रादि विनाशनीम्।
जयंदा धनदा कूष्माण्डे प्रणमाम्यहम्॥
जगतमाता जगतकत्री जगदाधार रूपणीम्।
चराचरेश्वरी कूष्माण्डे प्रणमाम्यहम्॥
त्रैलोक्यसुन्दरी त्वंहिदुःख शोक निवारिणीम्।
परमानन्दमयी, कूष्माण्डे प्रणमाभ्यहम्॥

कूष्माण्डा की कवच ( Mata Kushmanda Kavach)
हंसरै में शिर पातु कूष्माण्डे भवनाशिनीम्।
हसलकरीं नेत्रेच, हसरौश्च ललाटकम्॥
कौमारी पातु सर्वगात्रे, वाराही उत्तरे तथा,पूर्वे पातु वैष्णवी इन्द्राणी दक्षिणे मम।
दिगिव्दिक्षु सर्वत्रेव कूं बीजं सर्वदावतु॥

Maa Chandraghanta – Third Form of Nava Durgas

Maa Chandraghanta

दुर्गा जी का तीसरा अवतार चंद्रघंटा हैं। देवी के माथे पर घंटे के आकार का अर्धचंद्र होने के कारण इन्हें चंद्रघंटा कहा जाता है। दअपने मस्तक पर घंटे के आकार के अर्धचन्द्र को धारण करने के कारण माँ “चंद्रघंटा” नाम से पुकारी जाती हैं। अपने वाहन सिंह पर सवार माँ का यह स्वरुप युद्ध व दुष्टों का नाश करने के लिए तत्पर रहता है। चंद्रघंटा को स्वर की देवी भी कहा जाता है।

माँ चंद्रघंटा का मंत्र (Mata Chandraghanta Mantra)

स्वर्ण के समान उज्जवल वर्ण वाली माँ चंद्रघंटा की पूजा का यह मंत्र है-
पिण्डजप्रवरारुढा चण्डकोपास्त्रकैर्युता।
प्रसादं तनुते मह्यां चन्द्रघण्टेति विश्रुता॥

नवरात्र का तीसरा दिन (Third Day of Navratri): मां चन्द्रघंटा की पूजा नवरात्र के तीसरे दिन की जाती है। साल २०१९ में मां चन्द्रघंटा जी की पूजा-अर्चना १ अक्टूबर को की जाएगी।

चंद्रघंटा की ध्यान (Mata Chandraghanta Dhyan)
वन्दे वांछित लाभाय चन्द्रार्धकृत शेखरम्।
सिंहारूढा चंद्रघंटा यशस्वनीम्॥
मणिपुर स्थितां तृतीय दुर्गा त्रिनेत्राम्।
खंग, गदा, त्रिशूल,चापशर,पदम कमण्डलु माला वराभीतकराम्॥
पटाम्बर परिधानां मृदुहास्या नानालंकार भूषिताम्।
मंजीर हार केयूर,किंकिणि, रत्नकुण्डल मण्डिताम॥
प्रफुल्ल वंदना बिबाधारा कांत कपोलां तुगं कुचाम्।
कमनीयां लावाण्यां क्षीणकटि नितम्बनीम्॥

चंद्रघंटा की स्तोत्र पाठ (Mata Chandraghanta Stotra)
आपदुध्दारिणी त्वंहि आद्या शक्तिः शुभपराम्।
अणिमादि सिध्दिदात्री चंद्रघटा प्रणमाभ्यम्॥
चन्द्रमुखी इष्ट दात्री इष्टं मन्त्र स्वरूपणीम्।
धनदात्री, आनन्ददात्री चन्द्रघंटे प्रणमाभ्यहम्॥
नानारूपधारिणी इच्छानयी ऐश्वर्यदायनीम्।
सौभाग्यारोग्यदायिनी चंद्रघंटप्रणमाभ्यहम्॥

चंद्रघंटा की कवच ( Mata Chandraghanta Kavach)
रहस्यं श्रुणु वक्ष्यामि शैवेशी कमलानने।
श्री चन्द्रघन्टास्य कवचं सर्वसिध्दिदायकम्॥
बिना न्यासं बिना विनियोगं बिना शापोध्दा बिना होमं।
स्नानं शौचादि नास्ति श्रध्दामात्रेण सिध्दिदाम॥
कुशिष्याम कुटिलाय वंचकाय निन्दकाय च न दातव्यं न दातव्यं न दातव्यं कदाचितम्॥

Navratri – Nine Colors of the night! 2020

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Navratri – Nine Colors of 2020

India is a land of festivals and celebrations. It is also known as a land of rituals and religious beliefs. Festivals and celebrations are an integral part of every household no matter from which economic strata he or she belongs.

One such festival is Navratri is the festival of nine nights. It is celebrated to mark the triumph of good over evil. During these nine days we revere the various forms of the Devi or Goddess. We also follow the colors for each day, which are symbolic of our association with nature

The nine forms of the Goddess which are worshiped are:

Day 1: Maa Shailaputri
Day 2: Maa Brahmacharini
Day 3: Maa Chandraghanta
Day 4: Maa Kushmanda
Day 5: Maa Skandamata (This day is also celebrated as Lalita Panchami)
Day 6: Maa Katyayani
Day 7: Maa Kaalratri
Day 8: Maa Maha Gauri
Day 9: Maa Siddhidatri

These nine days end with Dusshera which is also known as VijayaDashmi.

This year Navratri commences on 29th September and will go on till 7th October. It is a common practice for people to follow the nine colors of the Goddess. People believe that following the colors is a sign of reverence to the Goddess. This is a part of the rituals to be followed and even the urban population tends to follow this trend. You will be surprised to see the entire city being transformed into a synergized congregation of the said color on any day. This shows how deeply rooted our religious beliefs are.

Each day is special for its worship to appease a particular form of the Goddess. Here we are sharing the colors for each day for this festival Navratri.

September 29, 2019 – Orange
September 30, 2019 – White
October 1, 2019 – Red
October 2, 2019 – Royal Blue
October 3, 2019 – Yellow
October 4, 2019 – Green
October 5, 2019 – Grey
October 6, 2019 – Purple
October 7, 2019 – Green

Garba and dandiya are the dance forms which are famous during Navratri and people here have given it a modern touch with DJ Dandiya and Disco Dandiya in the cities. The small towns and villages however have retained their traditional look and feel and stick to religious songs and the dance steps from the contemporary times. However, rural or urban, you will surely be caught up with the festive fever which engulfs the people for the entire nine days.

Maa Brahmacharini – Second Form of Nava Durgas

Maa Brahmacharini

2nd Form of Navdurga: कठोर तप और ध्यान की देवी “ब्रह्मचारिणी” माँ दुर्गा का दूसरा रूप हैं। इनकी उपासना नवरात्रि के दूसरे दिन की जाती है।
देवी ब्रह्मचारिणी: ‘ब्रहाचारिणी’ माँ पार्वती के जीवन काल का वो समय था जब वे भगवान शिव को अपने पति के रूप में पाने के लिए कठोर तपस्या कर रही थी। तपस्या के प्रथम चरण में उन्होंने केवल फलों का सेवन किया फिर बेल पत्र और अंत में निराहार रहकर कई वर्षो तक तप कर भगवान शिव को प्रसन्न किया। इनके दाहिने हाथ में जप की माला और बाएँ हाथ में कमण्डल है।

नवरात्र २०१९ (2nd Day of Navratri): ब्रह्मचारिणी देवी की पूजा नवरात्र के दूसरे दिन यानि ३० सितम्बर २०१९ को की जाएगी।

माँ ब्रह्मचारिणी का मंत्र (Mata Brahmacharini Mantra):

माँ ब्रह्मचारिणी की पूजा अर्चना के लिए यह मंत्र है-

दधाना करपद्माभ्यामक्षमालाकमण्डलू।
देवी प्रसीदतु मयि ब्रह्मचारिण्यनुत्तमा॥

ब्रह्मचारिणी की ध्यान (Mata Brahmacharini Dhyan)

वन्दे वांच्छितलाभाय चन्द्रार्धकृतशेखराम् । जपमालाकमण्डलुधरां ब्रह्मचारिणीं शुभाम् ।।
गौरवर्णां स्वाधिष्ठानास्थितां द्वितीय दुर्गां त्रिनेत्राम् । धवलपरिधानां ब्रह्मरूपां पुष्पालंकारभूषिताम् ।।
पद्मवदनां पल्लवाराधरां कातंकपोलां पीनपयोधराम् । कमनीयां लावण्यां स्मेरमुखीं निम्ननाभिं नितम्बिनीम् ।।

ब्रह्मचारिणी की स्तोत्र पाठ: (Mata Brahmacharini Stotra)

तपश्चारिणीं त्वां हि तापत्रयनिवारिणीम् । ब्रह्मरूपधरां ब्रह्मचारिणीं प्रणमाम्यहम ।।
नवचक्रभेदिनीं त्वां नवैश्वर्यप्रदायनीम् । धनदां सुखदां ब्रह्मचारिणीं प्रणमाम्यहम् ।।
शंकरस्य प्रिया त्वं हि भुक्तिमुक्तिप्रदायिनी । शान्तिदामानन्दां ब्रह्मचारिणीं प्रणमाम्यहम् ।।

ब्रह्मचारिणी की कवच  ( Mata Brahmacharini Kavach)

त्रिपुरा हृदये पातु ललाटे शिवभामिनी । अपर्णा मे सदा पातु नेत्रेSधरे कपोलके ॥
पंचदशी कण्ठे पातु मध्यदेशे महेश्वरी । षोडशी मे सदा पातु नाभौ गुदं च पादयोः ।
अंगं च सततं पातु प्रत्यंगं ब्रह्मचारिणी ।।