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Rahu Kavacham in Sanskrit Lyrics

Rahu Kavacham

॥ राहुकवचम् ॥

श्रीगणेशाय नमः ।
प्रणमामि सदा राहुं शूर्पाकारं किरीटिनम् ।
सैंहिकेयं करालास्यं लोकानामभयप्रदम् ॥ १॥

नीलाम्बरः शिरः पातु ललाटं लोकवन्दितः ।
चक्षुषी पातु मे राहुः श्रोत्रे त्वर्धशरिरवान् ॥ २॥

नासिकां मे धूम्रवर्णः शूलपाणिर्मुखं मम ।
जिह्वां मे सिंहिकासूनुः कण्ठं मे कठिनाङ्घ्रिकः ॥ ३॥

भुजङ्गेशो भुजौ पातु नीलमाल्याम्बरः करौ ।
पातु वक्षःस्थलं मन्त्री पातु कुक्षिं विधुन्तुदः ॥ ४॥

कटिं मे विकटः पातु ऊरू मे सुरपूजितः ।
स्वर्भानुर्जानुनी पातु जङ्घे मे पातु जाड्यहा ॥ ५॥

गुल्फौ ग्रहपतिः पातु पादौ मे भीषणाकृतिः ।
सर्वाण्यङ्गानि मे पातु नीलचन्दनभूषणः ॥ ६॥

राहोरिदं कवचमृद्धिदवस्तुदं यो भक्त्या पठत्यनुदिनं नियतः शुचिः सन् ।
प्राप्नोति कीर्तिमतुलां श्रियमृद्धिमायुरारोग्यमात्मविजयं च हि तत्प्रसादात् ॥ ७॥

॥ इति श्रीमहाभारते धृतराष्ट्रसञ्जयसंवादे द्रोणपर्वणि राहुकवचं सम्पूर्णम् ॥

Shiv Chalisa Lyrics in Hindi

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Shiv Chalisa in Hindi

॥दोहा॥
जय गणेश गिरिजा सुवन, मंगल मूल सुजान।
कहत अयोध्यादास तुम, देहु अभय वरदान॥

॥चौपाई॥

जय गिरिजा पति दीन दयाला। सदा करत सन्तन प्रतिपाला॥

भाल चन्द्रमा सोहत नीके। कानन कुण्डल नागफनी के॥

अंग गौर शिर गंग बहाये। मुण्डमाल तन क्षार लगाए॥

वस्त्र खाल बाघम्बर सोहे। छवि को देखि नाग मन मोहे॥

मैना मातु की हवे दुलारी। बाम अंग सोहत छवि न्यारी॥

कर त्रिशूल सोहत छवि भारी। करत सदा शत्रुन क्षयकारी॥

नन्दि गणेश सोहै तहँ कैसे। सागर मध्य कमल हैं जैसे॥

कार्तिक श्याम और गणराऊ। या छवि को कहि जात न काऊ॥

देवन जबहीं जाय पुकारा। तब ही दुख प्रभु आप निवारा॥

किया उपद्रव तारक भारी। देवन सब मिलि तुमहिं जुहारी॥

तुरत षडानन आप पठायउ। लवनिमेष महँ मारि गिरायउ॥

आप जलंधर असुर संहारा। सुयश तुम्हार विदित संसारा॥

त्रिपुरासुर सन युद्ध मचाई। सबहिं कृपा कर लीन बचाई॥

किया तपहिं भागीरथ भारी। पुरब प्रतिज्ञा तासु पुरारी॥

दानिन महँ तुम सम कोउ नाहीं। सेवक स्तुति करत सदाहीं॥

वेद माहि महिमा तुम गाई। अकथ अनादि भेद नहिं पाई॥

प्रकटी उदधि मंथन में ज्वाला। जरत सुरासुर भए विहाला॥

कीन्ही दया तहं करी सहाई। नीलकण्ठ तब नाम कहाई॥

पूजन रामचन्द्र जब कीन्हा। जीत के लंक विभीषण दीन्हा॥

सहस कमल में हो रहे धारी। कीन्ह परीक्षा तबहिं पुरारी॥

एक कमल प्रभु राखेउ जोई। कमल नयन पूजन चहं सोई॥

कठिन भक्ति देखी प्रभु शंकर। भए प्रसन्न दिए इच्छित वर॥

जय जय जय अनन्त अविनाशी। करत कृपा सब के घटवासी॥

दुष्ट सकल नित मोहि सतावै। भ्रमत रहौं मोहि चैन न आवै॥

त्राहि त्राहि मैं नाथ पुकारो। येहि अवसर मोहि आन उबारो॥

लै त्रिशूल शत्रुन को मारो। संकट ते मोहि आन उबारो॥

मात-पिता भ्राता सब होई। संकट में पूछत नहिं कोई॥

स्वामी एक है आस तुम्हारी। आय हरहु मम संकट भारी॥

धन निर्धन को देत सदा हीं। जो कोई जांचे सो फल पाहीं॥

अस्तुति केहि विधि करैं तुम्हारी। क्षमहु नाथ अब चूक हमारी॥

शंकर हो संकट के नाशन। मंगल कारण विघ्न विनाशन॥

योगी यति मुनि ध्यान लगावैं। शारद नारद शीश नवावैं॥

नमो नमो जय नमः शिवाय। सुर ब्रह्मादिक पार न पाय॥

जो यह पाठ करे मन लाई। ता पर होत है शम्भु सहाई॥

ॠनियां जो कोई हो अधिकारी। पाठ करे सो पावन हारी॥

पुत्र होन कर इच्छा जोई। निश्चय शिव प्रसाद तेहि होई॥

पण्डित त्रयोदशी को लावे। ध्यान पूर्वक होम करावे॥

त्रयोदशी व्रत करै हमेशा। ताके तन नहीं रहै कलेशा॥

धूप दीप नैवेद्य चढ़ावे। शंकर सम्मुख पाठ सुनावे॥

जन्म जन्म के पाप नसावे। अन्त धाम शिवपुर में पावे॥

कहैं अयोध्यादास आस तुम्हारी। जानि सकल दुःख हरहु हमारी॥

॥दोहा॥

नित्त नेम उठि प्रातः ही, पाठ करो चालीसा।
तुम मेरी मनोकामना, पूर्ण करो जगदीश॥
मगसिर छठि हेमन्त ॠतु, संवत चौसठ जान।
स्तुति चालीसा शिवहि, पूर्ण कीन कल्याण॥

Shri Ganesh Chalisa in Hindi

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Ganesh Chalisa in Hindi Lyrics

जय गणपति सद्गुणसदन कविवर बदन कृपाल ।
विघ्न हरण मङ्गल करण जय जय गिरिजालाल ॥

जय जय जय गणपति राजू । मङ्गल भरण करण शुभ काजू ॥

जय गजबदन सदन सुखदाता । विश्व विनायक बुद्धि विधाता ॥

वक्र तुण्ड शुचि शुण्ड सुहावन । तिलक त्रिपुण्ड भाल मन भावन ॥

राजित मणि मुक्तन उर माला । स्वर्ण मुकुट शिर नयन विशाला ॥

पुस्तक पाणि कुठार त्रिशूलं । मोदक भोग सुगन्धित फूलं ॥

सुन्दर पीताम्बर तन साजित । चरण पादुका मुनि मन राजित ॥

धनि शिवसुवन षडानन भ्राता । गौरी ललन विश्व-विधाता ॥

ऋद्धि सिद्धि तव चँवर सुधारे । मूषक वाहन सोहत द्वारे ॥

कहौं जन्म शुभ कथा तुम्हारी । अति शुचि पावन मङ्गल कारी ॥

एक समय गिरिराज कुमारी । पुत्र हेतु तप कीन्हा भारी ॥

भयो यज्ञ जब पूर्ण अनूपा । तब पहुँच्यो तुम धरि द्विज रूपा ॥

अतिथि जानि कै गौरी सुखारी । बहु विधि सेवा करी तुम्हारी ॥

अति प्रसन्न ह्वै तुम वर दीन्हा । मातु पुत्र हित जो तप कीन्हा ॥

मिलहि पुत्र तुहि बुद्धि विशाला । बिना गर्भ धारण यहि काला ॥

गणनायक गुण ज्ञान निधाना । पूजित प्रथम रूप भगवाना ॥

अस कहि अन्तर्ध्यान रूप ह्वै । पलना पर बालक स्वरूप ह्वै ॥

बनि शिशु रुदन जबहि तुम ठाना । लखि मुख सुख नहिं गौरि समाना ॥

सकल मगन सुख मङ्गल गावहिं । नभ ते सुरन सुमन वर्षावहिं ॥

शम्भु उमा बहुदान लुटावहिं । सुर मुनि जन सुत देखन आवहिं ॥

लखि अति आनन्द मङ्गल साजा । देखन भी आये शनि राजा ॥

निज अवगुण गुनि शनि मन माहीं । बालक देखन चाहत नाहीं ॥

गिरजा कछु मन भेद बढ़ायो । उत्सव मोर न शनि तुहि भायो ॥

कहन लगे शनि मन सकुचाई । का करिहौ शिशु मोहि दिखाई ॥

नहिं विश्वास उमा कर भयऊ । शनि सों बालक देखन कह्यऊ ॥

पड़तहिं शनि दृग कोण प्रकाशा । बालक शिर इड़ि गयो आकाशा ॥

गिरजा गिरीं विकल ह्वै धरणी । सो दुख दशा गयो नहिं वरणी ॥

हाहाकार मच्यो कैलाशा । शनि कीन्ह्यों लखि सुत को नाशा ॥

तुरत गरुड़ चढ़ि विष्णु सिधाये । काटि चक्र सो गज शिर लाये ॥

बालक के धड़ ऊपर धारयो । प्राण मन्त्र पढ़ शङ्कर डारयो ॥

नाम गणेश शम्भु तब कीन्हे । प्रथम पूज्य बुद्धि निधि वर दीन्हे ॥

बुद्धि परीक्शा जब शिव कीन्हा । पृथ्वी की प्रदक्शिणा लीन्हा ॥

चले षडानन भरमि भुलाई । रची बैठ तुम बुद्धि उपाई ॥

चरण मातु-पितु के धर लीन्हें । तिनके सात प्रदक्शिण कीन्हें ॥

धनि गणेश कहि शिव हिय हरषे । नभ ते सुरन सुमन बहु बरसे ॥

तुम्हरी महिमा बुद्धि बड़ाई । शेष सहस मुख सकै न गाई ॥

मैं मति हीन मलीन दुखारी । करहुँ कौन बिधि विनय तुम्हारी ॥

भजत रामसुन्दर प्रभुदासा । लख प्रयाग ककरा दुर्वासा ॥

अब प्रभु दया दीन पर कीजै । अपनी शक्ति भक्ति कुछ दीजै ॥

दोहा

श्री गणेश यह चालीसा पाठ करें धर ध्यान ।
नित नव मङ्गल गृह बसै लहे जगत सन्मान ॥

सम्वत् अपन सहस्र दश ऋषि पञ्चमी दिनेश ।
पूरण चालीसा भयो मङ्गल मूर्ति गणेश ॥

Tulasi Stotram in Sanskrit

Tulasi Stotram in Sanskrit

जगद्धात्रि नमस्तुभ्यं विष्णोश्च प्रियवल्लभे ।
यतो ब्रह्मादयो देवाः सृष्टिस्थित्यन्तकारिणः ॥१॥

नमस्तुलसि कल्याणि नमो विष्णुप्रिये शुभे ।
नमो मोक्षप्रदे देवि नमः सम्पत्प्रदायिके ॥२॥

तुलसी पातु मां नित्यं सर्वापद्भ्योऽपि सर्वदा ।
कीर्तितापि स्मृता वापि पवित्रयति मानवम् ॥३॥

नमामि शिरसा देवीं तुलसीं विलसत्तनुम् ।
यां दृष्ट्वा पापिनो मर्त्या मुच्यन्ते सर्वकिल्बिषात् ॥४॥

तुलस्या रक्षितं सर्वं जगदेतच्चराचरम् ।
या विनिहन्ति पापानि दृष्ट्वा वा पापिभिर्नरैः ॥५॥

नमस्तुलस्यतितरां यस्यै बद्ध्वाञ्जलिं कलौ ।
कलयन्ति सुखं सर्वं स्त्रियो वैश्यास्तथाऽपरे ॥६॥

तुलस्या नापरं किञ्चिद् दैवतं जगतीतले ।
यथा पवित्रितो लोको विष्णुसङ्गेन वैष्णवः ॥७॥

तुलस्याः पल्लवं विष्णोः शिरस्यारोपितं कलौ ।
आरोपयति सर्वाणि श्रेयांसि वरमस्तके ॥८॥

तुलस्यां सकला देवा वसन्ति सततं यतः ।
अतस्तामर्चयेल्लोके सर्वान् देवान् समर्चयन् ॥९॥

नमस्तुलसि सर्वज्ञे पुरुषोत्तमवल्लभे ।
पाहि मां सर्वपापेभ्यः सर्वसम्पत्प्रदायिके ॥१०॥

इति स्तोत्रं पुरा गीतं पुण्डरीकेण धीमता ।
विष्णुमर्चयता नित्यं शोभनैस्तुलसीदलैः ॥११॥

तुलसी श्रीर्महालक्ष्मीर्विद्याविद्या यशस्विनी ।
धर्म्या धर्मानना देवी देवीदेवमनःप्रिया ॥२॥

लक्ष्मीप्रियसखी देवी द्यौर्भूमिरचला चला ।
षोडशैतानि नामानि तुलस्याः कीर्तयन्नरः ॥१३॥

लभते सुतरां भक्तिमन्ते विष्णुपदं लभेत् ।
तुलसी भूर्महालक्ष्मीः पद्मिनी श्रीर्हरिप्रिया ॥१४॥

तुलसि श्रीसखि शुभे पापहारिणि पुण्यदे ।
नमस्ते नारदनुते नारायणमनःप्रिये ॥१५॥

Santoshi Mata ki Aarti in Hindi

Santoshi Mata ki Aarti in Hindi

जय संतोषी माता, मैया जय संतोषी माता ।
अपने सेवक जन को, सुख संपति दाता ॥
जय सुंदर चीर सुनहरी, मां धारण कीन्हो ।
हीरा पन्ना दमके, तन श्रृंगार लीन्हो ॥

जय गेरू लाल छटा छवि, बदन कमल सोहे ।
मंद हँसत करूणामयी, त्रिभुवन जन मोहे ॥
जय स्वर्ण सिंहासन बैठी, चंवर ढुरे प्यारे ।
धूप, दीप, मधुमेवा, भोग धरें न्यारे ॥

जय गुड़ अरु चना परमप्रिय, तामे संतोष कियो।
संतोषी कहलाई, भक्तन वैभव दियो ॥
जय शुक्रवार प्रिय मानत, आज दिवस सोही ।
भक्त मण्डली छाई, कथा सुनत मोही ॥

जय मंदिर जगमग ज्योति, मंगल ध्वनि छाई ।
विनय करें हम बालक, चरनन सिर नाई ॥
जय भक्ति भावमय पूजा, अंगीकृत कीजै ।
जो मन बसे हमारे, इच्छा फल दीजै ॥

जय दुखी, दरिद्री ,रोगी , संकटमुक्त किए ।
बहु धनधान्य भरे घर, सुख सौभाग्य दिए ॥
जय ध्यान धर्यो जिस जन ने, मनवांछित फल पायो ।
पूजा कथा श्रवण कर, घर आनंद आयो ॥

जय शरण गहे की लज्जा, राखियो जगदंबे ।
संकट तू ही निवारे, दयामयी अंबे ॥
जय संतोषी मां की आरती, जो कोई नर गावे ।
ॠद्धिसिद्धि सुख संपत्ति, जी भरकर पावे ॥

Shri Hanuman Chalisa in Bengali

Hanuman Chalisa in Bengali Lyrics

দোহা
শ্রী গুরু চরণ সরোজ রজ নিজমন মুকুর সুধারি |
বরণৌ রঘুবর বিমলয়শ জো দায়ক ফলচারি ||
বুদ্ধিহীন তনুজানিকৈ সুমিরৌ পবন কুমার |
বল বুদ্ধি বিদ্য়া দেহু মোহি হরহু কলেশ বিকার ||

ধ্য়ানম
গোষ্পদীকৃত বারাশিং মশকীকৃত রাক্ষসম |
রামায়ণ মহামালা রত্নং বংদে অনিলাত্মজম ||
য়ত্র য়ত্র রঘুনাথ কীর্তনং তত্র তত্র কৃতমস্তকাংজলিম |
ভাষ্পবারি পরিপূর্ণ লোচনং মারুতিং নমত রাক্ষসাংতকম ||

চৌপাঈ

জয় হনুমান জ্ঞান গুণ সাগর |
জয় কপীশ তিহু লোক উজাগর ||

রামদূত অতুলিত বলধামা |
অংজনি পুত্র পবনসুত নামা ||

মহাবীর বিক্রম বজরঙ্গী |
কুমতি নিবার সুমতি কে সঙ্গী ||

কংচন বরণ বিরাজ সুবেশা |
কানন কুংডল কুংচিত কেশা ||

হাথবজ্র ঔ ধ্বজা বিরাজৈ |
কাংথে মূংজ জনেবূ সাজৈ ||

শংকর সুবন কেসরী নন্দন |
তেজ প্রতাপ মহাজগ বন্দন ||

বিদ্য়াবান গুণী অতি চাতুর |
রাম কাজ করিবে কো আতুর ||

প্রভু চরিত্র সুনিবে কো রসিয়া |
রামলখন সীতা মন বসিয়া ||

সূক্ষ্ম রূপধরি সিয়হি দিখাবা |
বিকট রূপধরি লংক জরাবা ||

ভীম রূপধরি অসুর সংহারে |
রামচংদ্র কে কাজ সংবারে ||

লায় সংজীবন লখন জিয়ায়ে |
শ্রী রঘুবীর হরষি উরলায়ে ||

রঘুপতি কীন্হী বহুত বডায়ী |
তুম মম প্রিয় ভরতহি সম ভায়ী ||

সহস বদন তুম্হরো য়শগাবৈ |
অস কহি শ্রীপতি কণ্ঠ লগাবৈ ||

সনকাদিক ব্রহ্মাদি মুনীশা |
নারদ শারদ সহিত অহীশা ||

য়ম কুবের দিগপাল জহাং তে |
কবি কোবিদ কহি সকে কহাং তে ||

তুম উপকার সুগ্রীবহি কীন্হা |
রাম মিলায় রাজপদ দীন্হা ||

তুম্হরো মন্ত্র বিভীষণ মানা |
লংকেশ্বর ভয়ে সব জগ জানা ||

য়ুগ সহস্র য়োজন পর ভানূ |
লীল্য়ো তাহি মধুর ফল জানূ ||

প্রভু মুদ্রিকা মেলি মুখ মাহী |
জলধি লাংঘি গয়ে অচরজ নাহী ||

দুর্গম কাজ জগত কে জেতে |
সুগম অনুগ্রহ তুম্হরে তেতে ||

রাম দুআরে তুম রখবারে |
হোত ন আজ্ঞা বিনু পৈসারে ||

সব সুখ লহৈ তুম্হারী শরণা |
তুম রক্ষক কাহূ কো ডর না ||

আপন তেজ তুম্হারো আপৈ |
তীনোং লোক হাংক তে কাংপৈ ||

ভূত পিশাচ নিকট নহি আবৈ |
মহবীর জব নাম সুনাবৈ ||

নাসৈ রোগ হরৈ সব পীরা |
জপত নিরংতর হনুমত বীরা ||

সংকট সেং হনুমান ছুডাবৈ |
মন ক্রম বচন ধ্য়ান জো লাবৈ ||

সব পর রাম তপস্বী রাজা |
তিনকে কাজ সকল তুম সাজা ||

ঔর মনোরধ জো কোয়ি লাবৈ |
তাসু অমিত জীবন ফল পাবৈ ||

চারো য়ুগ পরিতাপ তুম্হারা |
হৈ পরসিদ্ধ জগত উজিয়ারা ||

সাধু সন্ত কে তুম রখবারে |
অসুর নিকন্দন রাম দুলারে ||

অষ্ঠসিদ্ধি নব নিধি কে দাতা |
অস বর দীন্হ জানকী মাতা ||

রাম রসায়ন তুম্হারে পাসা |
সাদ রহো রঘুপতি কে দাসা ||

তুম্হরে ভজন রামকো পাবৈ |
জন্ম জন্ম কে দুখ বিসরাবৈ ||

অংত কাল রঘুবর পুরজায়ী |
জহাং জন্ম হরিভক্ত কহায়ী ||

ঔর দেবতা চিত্ত ন ধরয়ী |
হনুমত সেয়ি সর্ব সুখ করয়ী ||

সংকট কটৈ মিটৈ সব পীরা |
জো সুমিরৈ হনুমত বল বীরা ||

জৈ জৈ জৈ হনুমান গোসায়ী |
কৃপা করো গুরুদেব কী নায়ী ||

জো শত বার পাঠ কর কোয়ী |
ছূটহি বন্দি মহা সুখ হোয়ী ||

জো য়হ পডৈ হনুমান চালীসা |
হোয় সিদ্ধি সাখী গৌরীশা ||

তুলসীদাস সদা হরি চেরা |
কীজৈ নাথ হৃদয় মহ ডেরা ||

দোহা
পবন তনয় সঙ্কট হরণ – মঙ্গল মূরতি রূপ |
রাম লখন সীতা সহিত – হৃদয় বসহু সুরভূপ ||
সিয়াবর রামচন্দ্রকী জয় | পবনসুত হনুমানকী জয় | বোলো ভায়ী সব সন্তনকী জয় |

Gayatri Chalisa in Hindi | गायत्री चालीसा

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Gayatri Chalisa in Hindi | गायत्री चालीसा

ह्रीं श्रीं क्लीं मेधा प्रभा जीवन ज्योति प्रचण्ड ।
शान्ति कान्ति जागृत प्रगति रचना शक्ति अखण्ड ॥ १॥

जगत जननी मङ्गल करनिं गायत्री सुखधाम ।
प्रणवों सावित्री स्वधा स्वाहा पूरन काम ॥ २॥

भूर्भुवः स्वः ॐ युत जननी ।
गायत्री नित कलिमल दहनी ॥ ३॥

अक्षर चौविस परम पुनीता ।
इनमें बसें शास्त्र श्रुति गीता ॥ ४॥

शाश्वत सतोगुणी सत रूपा ।
सत्य सनातन सुधा अनूपा ।
हंसारूढ सितम्बर धारी ।
स्वर्ण कान्ति शुचि गगन-बिहारी ॥ ५॥

पुस्तक पुष्प कमण्डलु माला ।
शुभ्र वर्ण तनु नयन विशाला ॥ ६॥

ध्यान धरत पुलकित हित होई ।
सुख उपजत दुःख दुर्मति खोई ॥ ७॥

कामधेनु तुम सुर तरु छाया ।
निराकार की अद्भुत माया ॥ ८॥

तुम्हरी शरण गहै जो कोई ।
तरै सकल सङ्कट सों सोई ॥ ९॥

सरस्वती लक्ष्मी तुम काली ।
दिपै तुम्हारी ज्योति निराली ॥ १०॥

तुम्हरी महिमा पार न पावैं ।
जो शारद शत मुख गुन गावैं ॥ ११॥

चार वेद की मात पुनीता ।
तुम ब्रह्माणी गौरी सीता ॥ १२॥

महामन्त्र जितने जग माहीं ।
कोई गायत्री सम नाहीं ॥ १३॥

सुमिरत हिय में ज्ञान प्रकासै ।
आलस पाप अविद्या नासै ॥ १४॥

सृष्टि बीज जग जननि भवानी ।
कालरात्रि वरदा कल्याणी ॥ १५॥

ब्रह्मा विष्णु रुद्र सुर जेते ।
तुम सों पावें सुरता तेते ॥ १६॥

तुम भक्तन की भकत तुम्हारे ।
जननिहिं पुत्र प्राण ते प्यारे ॥ १७॥

महिमा अपरम्पार तुम्हारी ।
जय जय जय त्रिपदा भयहारी ॥ १८॥

पूरित सकल ज्ञान विज्ञाना ।
तुम सम अधिक न जगमे आना ॥ १९॥

तुमहिं जानि कछु रहै न शेषा ।
तुमहिं पाय कछु रहै न कलेसा ॥ २०॥

जानत तुमहिं तुमहिं है जाई ।
पारस परसि कुधातु सुहाई ॥ २१॥

तुम्हरी शक्ति दिपै सब ठाई ।
माता तुम सब ठौर समाई ॥ २२॥

ग्रह नक्षत्र ब्रह्माण्ड घनेरे ।
सब गतिवान तुम्हारे प्रेरे ॥२३॥

सकल सृष्टि की प्राण विधाता ।
पालक पोषक नाशक त्राता ॥ २४॥

मातेश्वरी दया व्रत धारी ।
तुम सन तरे पातकी भारी ॥ २५॥

जापर कृपा तुम्हारी होई ।
तापर कृपा करें सब कोई ॥ २६॥

मन्द बुद्धि ते बुधि बल पावें ।
रोगी रोग रहित हो जावें ॥ २७॥

दरिद्र मिटै कटै सब पीरा ।
नाशै दूःख हरै भव भीरा ॥ २८॥

गृह क्लेश चित चिन्ता भारी ।
नासै गायत्री भय हारी ॥२९॥

सन्तति हीन सुसन्तति पावें ।
सुख सम्पति युत मोद मनावें ॥ ३०॥

भूत पिशाच सबै भय खावें ।
यम के दूत निकट नहिं आवें ॥ ३१॥

जे सधवा सुमिरें चित ठाई ।
अछत सुहाग सदा शुबदाई ॥ ३२॥

घर वर सुख प्रद लहैं कुमारी ।
विधवा रहें सत्य व्रत धारी ॥ ३३॥

जयति जयति जगदम्ब भवानी ।
तुम सम थोर दयालु न दानी ॥ ३४॥

जो सद्गुरु सो दीक्षा पावे ।
सो साधन को सफल बनावे ॥ ३५॥

सुमिरन करे सुरूयि बडभागी ।
लहै मनोरथ गृही विरागी ॥ ३६॥

अष्ट सिद्धि नवनिधि की दाता ।
सब समर्थ गायत्री माता ॥ ३७॥

ऋषि मुनि यती तपस्वी योगी ।
आरत अर्थी चिन्तित भोगी ॥ ३८॥

जो जो शरण तुम्हारी आवें ।
सो सो मन वाञ्छित फल पावें ॥ ३९॥

बल बुधि विद्या शील स्वभाओ ।
धन वैभव यश तेज उछाओ ॥ ४०॥

सकल बढें उपजें सुख नाना ।
जे यह पाठ करै धरि ध्याना ॥

यह चालीसा भक्ति युत पाठ करै जो कोई ।
तापर कृपा प्रसन्नता गायत्री की होय ॥

Surya Namaskar Mantra

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Surya Namskar Mantra

ॐ ध्येयः सदा सवितृमण्डल मध्यवर्ति ।

नारायणः सरसिजासन्संइविष्टः ।
केयूरवान मकरकुण्डलवान किरीटी ।
हारी हिरण्मयवपुधृतशङ्खचक्रः ॥

Surya Namaskar Mantra with Positions

ॐ ह्रां मित्राय नमः ।
ॐ ह्रीं रवये नमः ।
ॐ ह्रूं सूर्याय नमः ।
ॐ ह्रैं भानवे नमः ।
ॐ ह्रौं खगाय नमः ।
ॐ ह्रः पूष्णे नमः ।
ॐ ह्रां हिरण्यगर्भाय नमः ।
ॐ ह्रीं मरीचये नमः ।
ॐ ह्रूं आदित्याय नमः ।
ॐ ह्रैं सवित्रे नमः ।
ॐ ह्रौं अर्काय नमः ।
ॐ ह्रः भास्कराय नमः ।
ॐ ह्रां ह्रीं ह्रूं ह्रैं ह्रौं ह्रः
ॐ श्रीसवितृसूर्यनारायणाय नमः ॥

आदितस्य नमस्कारान् ये कुर्वन्ति दिने दिने ।
जन्मान्तरसहस्रेषु दारिद्र्यं दोष नाशते ।
अकालमृत्यु हरणं सर्वव्याधि विनाशनम् ।
सूर्यपादोदकं तीर्थं जठरे धारयाम्यहम् ॥

योगेन चित्तस्य पदेन वाचा मलं शरीरस्य च वैद्यकेन ।
योपाकरोत्तं प्रवरं मुनीनां पतञ्जलिं प्राञ्जलिरानतोऽस्मि ॥

Sai Vandana – Sai Reham Nazar Karna

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Sai Vandana – Sai Reham Nazar Karna

सांई रहम नजर करना, बच्चों का पालन करना ।
जाना तुमने जगत पसारा, सबही झूठ जमाना ।।

मैं अंधा हूँ बंदा आपका, मुझको प्रभु दिखलाना ।।
दास गनू कहे अब क्या बोलूं, थक गई मेरी रसना ।।

रहम नजर करो, अब मोरे साई ।
तुम बिन नहीं मुझे माँ बाप भाई ॥

मैं अंधा हूँ बंदा तुम्हारा ।
मैं ना जानूं अल्लाइलाही ।।

खाली जमाना मैंने गंवाया ।
साथी आखिर का किया न कोई ।।

अपने मस्जिद का झाडू गणू है ।
मालिक हमारे, तुम बाबा साई ।।

Jai Malhar Lyrics – Jai Deva Jai deva Jai Shiv Martanda

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Jai Malhar Lyrics – Jai Deva Jai deva Jai Shiv Martanda

जय देवा, जय देवा, जय देवा, जय देवा, जय देवा जय शिव मार्तंडा…
जय देवा, जय देवा, जय देवा, जय देवा, जय देवा जय शिव मार्तंडा…
हरी मदन मल्हारी तूची प्रचंडा…

अगड धूम नगारा सोन्याची जेजुरी,
देव गेले जेजुरा निळा घोडा…
अगड धूम नगारा सोन्याची जेजुरी
देव गेले जेजुरा निळा घोडा…

पाव मे तोडा… कमरी करगोटा,
बेंबी हिर, मस्तकी तुरा…

खोबर्‍याचा कुटका.. भंडार्‍याचा भडका
बोल अहंकरा, सदानंदाचा येळकोट…

जय देवा, जय देवा, जय देवा, जय देवा, जय देवा जय शिव मार्तंडा…
जय देवा, जय देवा, जय देवा, जय देवा, जय देवा जय शिव मार्तंडा…
हरी मदन मल्हारी तूची प्रचंडा…

जय देवा, जय देवा, जय देवा, जय देवा, जय देवा जय शिव मार्तंडा…
जय देवा, जय देवा, जय देवा, जय देवा, जय देवा जय शिव मार्तंडा…
हरी मदन मल्हारी तूची प्रचंडा…

सदानंदाचा येळकोट
येळकोट येळकोट जय मल्हार