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भैरवी चालीसा

माता त्रिपुरा भैरवी को समर्पित तपस्या और आंतरिक शक्ति की स्तुति

रचयिता: पारंपरिक · 40 चौपाई · लगभग 6 मिनट

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By the BhaktiRas Editorial Team · Updated

Bhairavi Chalisa

भैरवी चालीसा माता त्रिपुरा भैरवी को समर्पित एक चालीस छंद की भक्तिपूर्ण स्तुति है। वह दस महाविद्याओं में पाँचवीं, अत्यंत प्रचंड देवी हैं जो तपस्या की अग्नि से अहंकार, भय और जड़ता को जलाती हैं। तांत्रिक साधना में भैरवी की पूजा की जाती है क्योंकि वह आंतरिक शक्ति जागृत करती हैं और साधक को शिव के पथ पर स्थिर रखती हैं।

भैरवी चालीसा पाठ (देवनागरी)

संपूर्ण पाठ — हर चौपाई के नीचे “अर्थ” पर टैप करके सरल हिंदी अर्थ देखें।

Doha

त्रिपुरा भैरवी माता तुम, तप अग्नि अपार
भय भंजन करुणामयी, करो भव से पार

अर्थ

हे माता त्रिपुरा भैरवी! आपकी तपस्या की अग्नि असीम है। भय को भंजन करने वाली, करुणामयी माता, हमें संसार-सागर से पार लगाओ।

1

जय जय त्रिपुरा भैरवी माता
तपशक्ति की तुम विख्यात

अर्थ

हे माता त्रिपुरा भैरवी को बार-बार जय हो! तपस्या की शक्ति के लिए आप सर्वत्र विख्यात हैं।

2

रक्त वर्ण तनु ज्योति अपारा
भय मिटाई रूप तुम्हारा

अर्थ

आपका शरीर रक्त-वर्ण का है और असीम ज्योति से युक्त है। आपके दर्शन मात्र से ही भय दूर हो जाता है।

3

मुंडमाला कपाल सुहावै
मृत्यु रहस्य मन समझावै

अर्थ

आपकी मुंड-माला और कपाल-कमंडल बहुत सुंदर लगते हैं। वह मन को मृत्यु और क्षणभंगुरता का गहरा सत्य सिखाते हैं।

4

जपमाला कर ज्ञान बताती
शास्त्र सुधा चित्त में लाती

अर्थ

आपके हाथ की जपमाला सच्चे ज्ञान की ओर ले जाती है। उससे शास्त्रों का अमृत मन में उतरता है।

5

वर दे करुणा बरसाओ
भक्त हृदय निर्भय बनाओ

अर्थ

आप अपने वर और करुणा की बरसात करो। अपने भक्तों के हृदय को सभी भय से मुक्त कर दो।

6

दश महाविद्या मध्य प्रचंडा
तुमसे जागे शक्ति अखंडा

अर्थ

दस महाविद्याओं में आप सबसे अधिक प्रचंड हैं। आपसे ही अखंड शक्ति जागृत होती है।

7

भैरव संग तुम्हारी महिमा
शिव-शक्ति की गुढ़ गरिमा

अर्थ

भैरव के साथ आपकी महिमा अद्भुत है। शिव और शक्ति के एकत्व में ही गहरी गरिमा निहित है।

8

तप से तुम प्रसन्न हो माता
आलस तिमिर करो विधाता

अर्थ

माता, तपस्या से आप प्रसन्न होती हैं। आप आलस और अज्ञान के अंधकार को दूर करने वाली हो।

9

कुंडलिनी की अग्नि जगाओ
सुषुम्ना पथ प्रकाश दिखाओ

अर्थ

कुंडलिनी की अग्नि को जागृत करो। सुषुम्ना नाड़ी का मार्ग प्रकाशित कर दो।

10

काम क्रोध मद मोह जलाओ
शुद्ध चित्त का दीप जलाओ

अर्थ

काम, क्रोध, मद और मोह को जला दो। शुद्ध मन का दीप प्रज्ज्वलित करो।

11

साधक जब जरातता में फंसता
भैरवी मंत्र चित्त को कसता

अर्थ

जब साधक जड़ता में फंस जाता है, तब भैरवी का मंत्र मन को कसकर पकड़ता है और स्थिर करता है।

12

रक्त कमल आसन सुखकारी
रक्षा करो जगत महातारी

अर्थ

आप रक्त-कमल पर विराजमान हैं – यह सुख का स्रोत है। हे महातारी, संपूर्ण जगत की रक्षा करो।

13

उग्र रूप पर दया अपारी
दीन की तुम रक्षवली

अर्थ

आपका रूप प्रचंड है, पर दया अपरिमित है। आप दरिद्र और दुःखी की रक्षक हो।

14

रात्रि साधना सिद्धि दाती
गुरु वचन से रह दिखाती

अर्थ

रात की साधना में सिद्धि मिलती है। गुरु के वचनों से ही सही रास्ता दिख पड़ता है।

15

भीतर छिपे भय को काटो
धैर्य शौर्य हृदय में बांटो

अर्थ

अंदर छिपे भय को काट दो। सभी मनों में धैर्य और साहस का वितरण करो।

16

मंत्र बीज तुम अग्नि समना
जपे मिटे संशय अज्ञान

अर्थ

आपका मंत्र-बीज अग्नि के समान है। इसका जप करने से संशय और अज्ञान मिट जाता है।

17

शक्ति पीठ तुम उजियारा
भव भटके को मिले सहारा

अर्थ

आप शक्ति का पीठ हैं, प्रकाश के भंडार हैं। संसार में भटकने वालों को आप ही आधार देती हो।

18

रोग शोक संताप हरिजै
जीवन यज्ञ सफल करिजै

अर्थ

रोग, शोक और कष्ट को दूर करो। जीवन को एक सार्थक यज्ञ में परिणत कर दो।

19

वैराग्य की ज्वाला जलति
माया की दिवार पिघलति

अर्थ

वैराग्य की ज्वाला जलती रहती है। उसके आगे माया की दीवार पिघल जाती है।

20

भैरवी नाम जपे जो कोई
दुर्बलता से मुक्त होई

अर्थ

जो कोई भैरवी नाम का जप करता है, वह सभी दुर्बलताओं से मुक्त हो जाता है।

21

कर्म पथ पर दृढ़ता देना
सत्य वचन में शक्ति देना

अर्थ

कर्म के पथ पर हमें दृढ़ता दो। सच बोलने में हमें शक्ति प्रदान करो।

22

तुमसे वीर भव जग जवे
कायर मन सहस पवे

अर्थ

आपकी कृपा से यह संसार वीरता से जागृत होता है। कायर मन भी साहस पा जाता है।

23

त्रिपुर सुंदरी से नाता
रूप तुम्हारा तप का दाता

अर्थ

आप त्रिपुर सुंदरी से संबंधित हैं। आपका रूप ही तपस्या की शक्ति देने वाला है।

24

लाल चंद्रिका करुणा वली
मिटे अंतस की रात्रि कली

अर्थ

आपकी लाल चाँदनी करुणा से भरी है। वह अंदर की अंधकारमयी रात को मिटा देती है।

25

नारी शक्ति तुम आद्य पुनीता
तुम में साधक पावे गीता

अर्थ

आप नारी शक्ति की आदि, सर्वाधिक पवित्र रूप हो। साधक आपमें ही ज्ञान की गीता पाता है।

26

दुष्ट वृत्ति पर वज्र प्रहारा
सज्जन पर कृपा अपारा

अर्थ

बुरी प्रवृत्तियों पर आप वज्र का प्रहार करती हैं। भले मनों पर अपार कृपा बरसाती हो।

27

चित्त विकार जब उठ आते
भैरवी नाम उन्हें हर जाते

अर्थ

जब मन के विकार उठते हैं, तब भैरवी का नाम उन्हें हर लेता है।

28

श्रद्धा संयम तप की रानी
भक्तों की तुम अंतर्यामी

अर्थ

आप श्रद्धा, संयम और तपस्या की रानी हो। अपने भक्तों के हृदय में आप अंतर्यामी हो।

29

मंगा न छोटी केवल वर की
दे दो ज्वाल अंतर घर की

अर्थ

हम छोटे-छोटे सुख नहीं माँगते। हमारे अंदर आंतरिक आग जला दो।

30

भय से आगे सत्य दिखाओ
स्वधर्म पथ पर दृढ़ बनाओ

अर्थ

भय के आगे सच्चाई को दिखा दो। हमें अपने कर्तव्य के पथ पर दृढ़ रखो।

31

नित्य हवन मन में करो
अहम समिधा उस में डालो

अर्थ

मन में हर दिन यज्ञ करवाओ। अहंकार को उसमें समिधा के रूप में जला दो।

32

रक्त पुष्प जो प्रेम चढ़ावै
भैरवी कृपा शीघ्र ही पावै

अर्थ

जो सच्चे प्रेम से लाल फूल चढ़ाता है, वह शीघ्र ही भैरवी की कृपा पा जाता है।

33

रक्षा कवच नाम तुम्हारा
साधक का शुभ एक सहारा

अर्थ

आपका नाम ही रक्षा-कवच है। यही साधक का एकमात्र शुभ आश्रय है।

34

वाणी बने तेजस्वी माता
हृदय बने शिव ज्योति धाम

अर्थ

माता, हमारी वाणी तेजस्वी हो। हमारा हृदय शिव की ज्योति का मंदिर बने।

35

जो चालीसा पाठ करै
भीतर की दुर्बलता मरै

अर्थ

जो इस चालीसा का पाठ करता है, उसकी अंदर की सभी दुर्बलताएँ नष्ट हो जाती हैं।

36

दुर्गम पथ तुम सरल बनाओ
थके मनस में बल भर जाओ

अर्थ

कठिन रास्तों को सरल बना दो। थके हुए मन में नई ताकत भर दो।

37

देवी तुम तप की अधिरानी
कृपा करो जय जय भवानी

अर्थ

हे देवी, आप तपस्या की परम रानी हो। कृपा करो, हे भवानी को बार-बार जय हो।

38

अंत समय जब श्वास समै
भैरवी नाम मुक्त कर जै

अर्थ

अंतिम समय, जब आखिरी साँस निकले, तब भैरवी का नाम ही मुक्ति दे जाए।

39

भक्त तुम्हारा शीश नवावे
त्रिपुरा भैरवी कृपा बरसावे

अर्थ

आपका भक्त सिर झुकाता है। हे त्रिपुरा भैरवी, अपनी कृपा की वर्षा करो।

40

जय जय भैरवी सुखकारी
रक्षा करो माता हमारी

अर्थ

हे सुख-दायी भैरवी को बार-बार जय हो। हे माता, हमारी रक्षा करो।

Doha

भैरवी माता कृपा करो, जला दो अवगुन जाल
शिव पथ पर दृढ़ कर चलो, रखो भक्त प्रतिपाल

अर्थ

हे माता भैरवी, कृपा करो। हमारे दोषों के जाल को जला दो। हमें शिव के मार्ग पर दृढ़ रखो और सदा अपनी भक्त-वात्सल्य से पालन करो।

भैरवी चालीसा पाठ के लाभ

माता त्रिपुरा भैरवी की चालीसा का पाठ निम्नलिखित लाभ प्रदान करता है:

  • भय से मुक्ति: भैरवी बार-बार भय को तोड़ने वाली कही गई हैं। यह चालीसा चिंता, बेचैनी और भय के समय मन को शांत करती है।
  • अहंकार और जड़ता का विनाश: तपस्या की अग्नि से गर्व, आलस और मोह को जलाना – यह भैरवी की मुख्य शक्ति है जो साधक के मन को शुद्ध करती है।
  • साहस और दृढ़ता: चालीसा में वीरता और आत्मविश्वास की कामना की जाती है, जो भय की परिस्थितियों में संकल्प को मजबूत करती है।
  • बाधाओं का निवारण: महत्वपूर्ण कार्यों से पहले इसका पाठ सफलता और निर्विघ्न रूप से काम पूरे करने में सहायता देता है।
  • कष्ट और दुःख से राहत: रोग, शोक और तनाव को दूर करने के लिए भैरवी को प्रसन्न करने की याचना की जाती है।
  • आध्यात्मिक केंद्रण: प्रत्येक श्लोक का अर्थ ध्यान देकर सुनने से भक्ति, एकाग्रता और शांति मिलती है, जो साधक को शिव के मार्ग में दृढ़ करती है।

भैरवी चालीसा का पाठ कब और कैसे करें

भैरवी चालीसा का पाठ करने के लिए उचित विधि निम्नवत् है:

नवरात्रि और मंगलवार को यह पाठ विशेष फलदायक माना जाता है, किंतु किसी भी दिन इसे पढ़ा जा सकता है। प्रातः स्नान के बाद किसी शांत, स्वच्छ स्थान पर बैठें। भैरवी की मूर्ति या यंत्र के सामने दीप जलाएँ और लाल फूल अर्पित करें – ये फूल चालीसा में ही वर्णित हैं। पहले दोहे से आरंभ करके धीरे-धीरे सभी चालीस श्लोकों का पाठ करें, फिर अंतिम दोहे से समापन करें। अर्थ को ध्यान में रखकर पढ़ना अधिक महत्वपूर्ण है, बजाय बस शुद्ध उच्चारण के। श्रद्धा, निष्ठा और शांत मन ही सफलता की कुंजी है।

भैरवी चालीसा किसने लिखी?

भैरवी चालीसा परंपरागत भक्ति-साहित्य है, जो किसी एक कवि द्वारा रचित नहीं, वरन् भक्ति-परंपरा में से आई हुई है। यह चालीसा माता त्रिपुरा भैरवी, जो दस महाविद्याओं में पाँचवीं हैं, को समर्पित है। भैरवी का विचार तांत्रिक साधना में केंद्रीय है – वह वह शक्ति हैं जो तपस्या की अग्नि से अहंकार को जलाती हैं, भय को दूर करती हैं और साधक के भीतर आत्मशक्ति जागृत करती हैं। यह चालीसा शास्त्रीय संरचना में लिखी गई है: दो प्रारंभिक दोहे, चालीस चौपाइयाँ, और एक अंतिम दोहा। भैरवी की किंवदंतियाँ, उनकी मूर्ति, उनकी भयंकर और करुणामयी प्रकृति, और शिव के साथ उनका नाता – सब कुछ इस पाठ में गूँजता है। हिमालय से लेकर कश्मीर तक, तांत्रिक साधना की परंपरा में भैरवी की पूजा सुरक्षा, साहस और आंतरिक शक्ति के लिए की जाती है।

सामान्य प्रश्न (FAQ)

भैरवी चालीसा क्या है?

यह माता त्रिपुरा भैरवी को समर्पित एक चालीस छंद की भक्तिपूर्ण स्तुति है। दस महाविद्याओं में पाँचवीं, भैरवी वह देवी हैं जो तपस्या की अग्नि से अहंकार, भय और जड़ता को जलाती हैं। दो प्रारंभिक दोहे, चालीस चौपाइयाँ और एक अंतिम दोहे की परंपरागत संरचना में यह रचना है।

इसका पाठ करने से क्या लाभ होता है?

भय और चिंता से मुक्ति, अहंकार और आलस का विनाश, साहस और आत्मविश्वास की वृद्धि, कार्यों में सफलता, रोग और शोक से राहत, और आध्यात्मिक पथ में दृढ़ता – ये सभी लाभ भैरवी चालीसा के नियमित पाठ से मिलते हैं।

कौन सा दिन सबसे उत्तम है?

नवरात्रि और मंगलवार को यह पाठ विशेष फलदायक माना जाता है, किंतु यह किसी भी दिन किया जा सकता है। महत्वपूर्ण यह है कि हृदय में श्रद्धा और विश्वास हो।

कितने छंद हैं?

दो प्रारंभिक दोहे, चालीस चौपाइयाँ, और एक अंतिम दोहा – कुल चालीसा के पारंपरिक रूप का पालन करते हुए।

भैरवी कौन हैं और वह कैसी हैं?

माता त्रिपुरा भैरवी दस महाविद्याओं में पाँचवीं हैं। वह तांत्रिक साधना में महत्वपूर्ण हैं – उनका रूप अत्यंत प्रचंड है, किंतु करुणा अपरिमित है। वह तपस्या की देवी हैं, साधक के भीतर कुंडलिनी शक्ति जागृत करती हैं, और शिव के मार्ग पर चलने वालों को सहायता देती हैं।

क्या इसे हिंदी में पढ़ सकते हैं?

हाँ। यह संपूर्ण चालीसा हिंदी में उपलब्ध है – प्रत्येक श्लोक का देवनागरी पाठ और प्रत्येक के साथ प्राकृतिक, गहरा अर्थ दिया गया है।

॥ जय माता भैरवी ॥  •  ॥ ॐ त्रिपुरभैरव्यै नमः ॥