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बगलामुखी चालीसा

विजय, शांति और शत्रु-दमन के लिए माता को समर्पित

रचयिता: पारंपरिक · 40 चौपाई · लगभग 6 मिनट

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By the BhaktiRas Editorial Team · Updated

Bagalamukhi Chalisa

बगलामुखी चालीसा दस महाविद्याओं में से आठवीं देवी बगलामुखी को समर्पित एक चालीस पद्य का स्तुति गीत है। पीले रंग में सजी और सोने के सिंहासन पर विराजमान बगलामुखी माता को शत्रुओं को दबाने, विरोधियों को शांत करने और किसी भी संघर्ष में विजय दिलाने के लिए जाना जाता है। जो भी मुकदमेबाजी, वाद-विवाद या किसी प्रतिद्वंद्वी से निपटने की परिस्थिति में हो, वह इन श्लोकों का सहारा लेता है।

बगलामुखी चालीसा पाठ (देवनागरी)

संपूर्ण पाठ — हर चौपाई के नीचे “अर्थ” पर टैप करके सरल हिंदी अर्थ देखें।

Doha

सिर नवाइ बगलामुखी, लिखूँ चालीसा आज।
कृपा करहु मोपर सदा, पूरन हो मम काज॥

अर्थ

मैं श्री बगलामुखी माता के चरणों में सिर झुकाकर आज यह चालीसा रचता हूँ। हे माता, मेरे ऊपर सदा अपनी कृपा बनाए रखो और मेरे सभी कार्य पूर्ण करो।

1

जय जय जय श्री बगला माता।
आदिशक्ति सब जग की त्राता॥

अर्थ

श्री बगला माता को बार-बार नमन है। आप आदिशक्ति हैं, सम्पूर्ण संसार की रक्षक देवी हैं।

2

बगला सम तब आनन माता।
एहि ते भयउ नाम विख्याता॥

अर्थ

हे माता, आपका मुख बगुले (क्रेन) जैसा सुंदर है। इसी कारण आपका नाम बगलामुखी प्रसिद्ध हुआ।

3

शशि ललाट कुण्डल छवि न्यारी।
अस्तुति करहिं देव नर-नारी॥

अर्थ

चंद्रमा जैसा आपका माथा और अनूठी सौंदर्य वाली कुंडलें हैं। देवता, मनुष्य और महिलाएं सभी आपकी स्तुति करते हैं।

4

पीतवसन तन पर तव राजै।
हाथहिं मुद्गर गदा विराजै॥

अर्थ

पीले वस्त्र आपके शरीर को सुशोभित करते हैं। आपके हाथों में मुद्गर (हथौड़ी) और गदा शोभायमान हैं।

5

तीन नयन गल चम्पक माला।
अमित तेज प्रकटत है भाला॥

अर्थ

आपकी तीनों आँखें और गले में चंपा के फूलों की माला शोभा पाती है। आपके भाल पर अपार तेज प्रकट होता है।

6

रत्न-जटित सिंहासन सोहै।
शोभा निरखि सकल जन मोहै॥

अर्थ

रत्नों से जड़ा सिंहासन आपको सुशोभित करता है। आपकी सुंदरता को देखकर सभी लोग मुग्ध हो जाते हैं।

7

आसन पीतवर्ण महारानी।
भक्तन की तुम हो वरदानी॥

अर्थ

पीले रंग के सिंहासन पर बैठी महारानी, आप अपने भक्तों को वर और आशीर्वाद देने वाली हैं।

8

पीताभूषण पीतहिं चन्दन।
सुर नर नाग करत सब वन्दन॥

अर्थ

पीले गहने और पीती चंदन से सुसज्जित आप हैं। देवता, मनुष्य और नाग सभी आपको नमस्कार करते हैं।

9

एहि विधि ध्यान हृदय में राखै।
वेद पुराण सन्त अस भाखै॥

अर्थ

इसी प्रकार हृदय में ध्यान धारण करो। वेद, पुराण और संत सभी ऐसी ही कहते हैं।

10

अब पूजा विधि करौं प्रकाशा।
जाके किये होत दुख-नाशा॥

अर्थ

अब मैं पूजा की विधि को प्रकट करता हूँ। जिसने ऐसी पूजा की, उसके दुःख का नाश हो गया।

11

प्रथमहिं पीत ध्वजा फहरावै।
पीतवसन देवी पहिरावै॥

अर्थ

सबसे पहले पीले रंग का झंडा फहराओ। देवी को पीले वस्त्र पहनाओ।

12

कुंकुम अक्षत मोदक बेसन।
अबिर गुलाल सुपारी चन्दन॥

अर्थ

कुंकुम, अक्षत (चावल), मोदक (मिठाई), चने का आटा, रंगीन चूर्ण, सुपारी और चंदन ये सब चढ़ाओ।

13

माल्य हरिद्रा अरु फल पाना।
सबहिं चढ़इ धरै उर ध्याना॥

अर्थ

फूलों की माला, हल्दी, फल और पान चढ़ाओ। सब कुछ करते समय हृदय में माता का ध्यान रखो।

14

धूप दीप कर्पूर की बाती।
प्रेम-सहित तब करै आरती॥

अर्थ

धूप, दीपक और कपूर की बाती जलाओ। प्रेम से भरे हृदय से देवी की आरती करो।

15

अस्तुति करै हाथ दोउ जोरे।
पुरवहु मातु मनोरथ मोरे॥

अर्थ

दोनों हाथ जोड़कर देवी की स्तुति करो। हे माता, मेरी मनोकामना को पूरा करो।

16

मातु भगति तब सब सुख खानी।
करहु कृपा मोपर जनजानी॥

अर्थ

हे माता, तुम्हारी भक्ति ही सभी सुखों की खान है। अपने सेवक पर कृपा करो।

17

त्रिविध ताप सब दुःख नशावहु।
तिमिर मिटाकर ज्ञान बढ़ावहु॥

अर्थ

तीनों प्रकार के ताप और सभी दुःखों को नष्ट करो। अज्ञान का अंधकार मिटाओ और ज्ञान की वृद्धि करो।

18

बार-बार मैं बिनवउँ तोहीं।
अविरल भगति ज्ञान दो मोहीं॥

अर्थ

बार-बार मैं तुमसे प्रार्थना करता हूँ। मुझे निरंतर भक्ति और ज्ञान का दान दो।

19

पूजनान्त में हवन करावै।
सो नर मनवांछित फल पावै॥

अर्थ

जो पूजा के अंत में यज्ञ (होम) करता है, वह मनुष्य अपनी मनोकामना का फल पा लेता है।

20

सर्षप होम करै जो कोई।
ताके वश सचराचर होई॥

अर्थ

जो कोई सरसों का होम करता है, उसके वश में सभी चर-अचर (गतिशील-स्थिर) प्राणी हो जाते हैं।

21

तिल तण्डुल संग क्षीर मिरावै।
भक्ति प्रेम से हवन करावै॥

अर्थ

तिल, चावल और दूध को मिलाकर भक्ति और प्रेम के साथ होम करो।

22

दुःख दरिद्र व्यापै नहिं सोई।
निश्चय सुख-संपति सब होई॥

अर्थ

दुःख और दारिद्र्य उसे स्पर्श नहीं करेंगे। निश्चित रूप से उसे सुख और संपत्ति सब कुछ मिल जाएगा।

23

फूल अशोक हवन जो करई।
ताके गृह सुख-सम्पत्ति भरई॥

अर्थ

जो अशोक के फूलों का होम करता है, उसके घर सुख और संपत्ति से भर जाता है।

24

फल सेमर का होम करीजै।
निश्चय वाको रिपु सब छीजै॥

अर्थ

रेशम के पेड़ (सेमल) का फल होम में डालो। निश्चित रूप से उसके सभी शत्रु क्षीण हो जाएंगे।

25

गुग्गुल घृत होमै जो कोई।
तेहि के वश में राजा होई॥

अर्थ

जो गुग्गुल और घी का होम करता है, राजा भी उसके वश में हो जाता है।

26

गुग्गुल तिल सँग होम करावै।
ताको सकल बन्ध कट जावै॥

अर्थ

गुग्गुल और तिल का साथ-साथ होम करो। सभी बंधन उसके कट जाते हैं।

27

बीजाक्षर का पाठ जो करहीं।
बीजमन्त्र तुम्हरो उच्चरहीं॥

अर्थ

जो बीजाक्षर (बीज-मंत्र) का पाठ करता है, वह आपके बीज-मंत्र का उच्चारण करता है।

28

एक मास निशि जो कर जापा।
तेहि कर मिटत सकल सन्तापा॥

अर्थ

जो एक महीने तक रात में जप करता है, उसके सभी संताप मिट जाते हैं।

29

घर की शुद्ध भूमि जहँ होई।
साधक जाप करै तहँ सोई॥

अर्थ

जहाँ घर की शुद्ध भूमि हो, साधक को वहीं जप करना चाहिए।

30

सोइ इच्छित फल निश्चय पावै।
जामे नहिं कछु संशय लावै॥

अर्थ

वह साधक अपने इच्छित फल को निश्चित रूप से पा लेता है। इसमें कोई संदेह नहीं है।

31

अथवा तीर नदी के जाई।
साधक जाप करै मन लाई॥

अर्थ

या फिर नदी के किनारे जाकर, मन को एकाग्र करके जप करना चाहिए।

32

दस सहस्र जप करै जो कोई।
सकल काज तेहि कर सिधि होई॥

अर्थ

जो कोई दस हजार बार जप करता है, उसके सभी कार्य सिद्ध हो जाते हैं।

33

जाप करै जो लक्षहिं बारा।
ताकर होय सुयश विस्तारा॥

अर्थ

जो एक लाख बार जप करता है, उसकी सुख्याति और यश सर्वत्र फैल जाता है।

34

जो तव नाम जपै मन लाई।
अल्पकाल महँ रिपुहिं नसाई॥

अर्थ

जो आपका नाम मन लगाकर जपता है, वह शीघ्र ही अपने शत्रुओं को नष्ट कर देता है।

35

सप्तरात्रि जो जापहिं नामा।
वाको पूरन हो सब कामा॥

अर्थ

जो सात रातें आपका नाम जपता है, उसके सभी कार्य पूर्ण हो जाते हैं।

36

नव दिन जाप करे जो कोई।
व्याधि रहित ताकर तन होई॥

अर्थ

जो नौ दिन तक जप करता है, उसका शरीर रोग-मुक्त हो जाता है।

37

ध्यान करै जो बन्ध्या नारी।
पावै पुत्रादिक फल चारी॥

अर्थ

जो निःसंतान स्त्री आपका ध्यान करती है, उसे पुत्र आदि चारों फल मिल जाते हैं।

38

प्रातःकाले जो करै पठना।
ताके होत विपत्ति निवारना॥

अर्थ

जो प्रातःकाल इस चालीसा का पाठ करता है, उसकी विपत्तियाँ टल जाती हैं।

39

संध्या काले जो करे पाठ।
ताके मन हर सब क्लेश॥

अर्थ

जो संध्या के समय पाठ करता है, उसके मन के सभी कष्ट दूर हो जाते हैं।

40

जो नित्य करे पाठ नियम।
ताके होत सब काम संयम॥

अर्थ

जो नियम से प्रतिदिन पाठ करता है, उसके सभी कार्य समय पर संपन्न हो जाते हैं।

Doha

जो पढ़े श्री बगला चालीसा, प्रेम सहित ध्यान।
सब सुख सम्पत्ति पावै, होय सफल जेहि प्राण॥

अर्थ

जो श्री बगलामुखी की चालीसा को प्रेम और ध्यान के साथ पढ़ता है, वह सभी सुख और संपत्ति को प्राप्त करता है और उसका जीवन सफल हो जाता है।

बगलामुखी चालीसा पाठ के लाभ

बगलामुखी चालीसा का नियमित और श्रद्धापूर्वक पाठ करने से भक्तों को ये लाभ मिलते हैं:

  • संघर्ष में विजय: वाद-विवाद, मुकदमेबाजी, वार्ता और किसी भी ऐसी परिस्थिति में जहाँ विरोधी को शांत या नियंत्रित करना हो, विजय मिलती है।
  • सुरक्षा और शांति: दुर्भावना, शत्रुतापूर्ण मनोभाव और नुकसान पहुँचाने की नीयत से रक्षा मिलती है।
  • बाधाओं का निवारण: भय, कानूनी कठिनाई और जीवन के मार्ग की रुकावटें दूर हो जाती हैं।
  • समृद्धि और सम्मान: आरामदायक जीवन, आर्थिक सुस्थिरता और बहुसंख्य लोगों में अच्छी ख्याति मिलती है।
  • मन की शांति और बुद्धि: अज्ञान का अंधकार दूर होता है और निर्णय लेने की क्षमता बढ़ती है।
  • कष्ट और रोग से मुक्ति: भोर या संध्या को पाठ करने से दुःख, व्याधि और संसारी बंधन शीघ्र ही ढ़ल जाता है।

बगलामुखी चालीसा का पाठ कब और कैसे करें

गुरुवार को बगलामुखी की पूजा के लिए सबसे उपयुक्त माना जाता है, विशेषकर भोर या संध्या का समय। बगलामुखी जयंती इस पाठ के लिए सबसे शुभ दिन है। नियम से शुरू करें:

नहा-धोकर पवित्र हो जाओ। पीले वस्त्र पहनो (यदि संभव हो)। पूर्व या उत्तर की ओर मुँह करके बैठो। देवी की मूर्ति या चित्र के सामने दीपक और धूप जलाओ। पीले रंग के फूल, हल्दी और चने का आटा चढ़ा सकते हो। धीरे-धीरे और ध्यान से पाठ करो, हर शब्द का अर्थ समझते हुए। जल्दबाजी से कोई लाभ नहीं मिलता। स्थिरता और निष्ठा ही असली शक्ति है।

बगलामुखी चालीसा किसने लिखी?

यह चालीसा परंपरा से चली आ रही हिंदी स्तुति-गीत है, जिसे किसी एक नामचीन कवि ने रचा नहीं, बल्कि सदियों के दौरान भक्तों ने सँजो-सँवारकर एक निर्धारित रूप में ढाल दिया है। इसके छंद (दोहे और चौपाई) देश भर की मातृ-उपासना परंपराओं में गूँजते आए हैं। पाठ बगलामुखी के पीतांबर रूप, उनकी तीन आँखों, सिंहासन और शस्त्रों का वर्णन करता है। जब कोई साधक या जन भय, शत्रुता या अन्याय से जूझता है, तब उसे यह पाठ उस अदृश्य शक्ति का स्पर्श देता है जो सभी रुकावटों को दूर करती है।

सामान्य प्रश्न (FAQ)

बगलामुखी चालीसा क्या है?

यह बगलामुखी देवी (दस महाविद्याओं में से आठवीं) को समर्पित एक चालीस पद्य वाला स्तुति-गीत है। इसमें देवी के पीते रंग के रूप, सिंहासन और शस्त्रों का वर्णन है, और मंत्र-जप और पूजा के फलों को बताया गया है।

इसे पढ़ने से क्या लाभ मिलता है?

मुकदमेबाजी, बहस-मुहावरे और किसी भी ऐसी परिस्थिति में विजय, शत्रुओं से सुरक्षा, भय और कानूनी कठिनाइयों का दूर होना, धन-दौलत और यश, और मन की शांति व बुद्धि का विकास।

कौन-सा दिन सबसे अच्छा है?

गुरुवार को। भोर या संध्या का समय पढ़ने के लिए सर्वश्रेष्ठ है। बगलामुखी जयंती विशेषकर शुभ है, लेकिन कठिन परिस्थिति में कभी भी पढ़ा जा सकता है।

कितने पद्य हैं?

शुरुआत के दोहे के साथ चालीस चौपाई, और फिर अंत का दोहा। कुल मिलाकर चार दोहे और चालीस मुख्य पद्य हैं।

पीले रंग का क्या महत्व है?

बगलामुखी को 'पीतांबरा' (पीते कपड़ों वाली) देवी कहा जाता है। पीला रंग शक्ति, साहस और विजय का प्रतीक है। नियम से पीले फूल, हल्दी और पीले वस्त्र चढ़ाए जाते हैं। पाठ करते समय पीली पोशाक पहनना भी प्रथा है।

क्या इसे अंग्रेजी में पढ़ सकते हैं?

हाँ, इस पृष्ठ पर हर पद्य का रोमन लिप्यंतरण और अनुवाद दिया गया है। लेकिन मूल भाषा हिंदी है और मंत्र की शक्ति देवनागरी उच्चारण में निहित मानी जाती है।

॥ जय बगलामुखी माता ॥  •  ॥ ॐ ह्रीं बगलामुखि सर्वदुष्टानां वाचं मुखं पदं स्थापय जिह्वां कीलय बुद्धि विनाशय ॐ नमः ॥