Pitru Paksha Shraddh Puja Vidhi in Hindi
पितृ पक्ष 2015 :भाद्रपद महीने के कृष्णपक्ष के पंद्रह दिन पितृपक्ष (पितृ = पिता) के नाम से विख्यात है। इन पंद्रह दिनों में लोग अपने पितरों (पूर्वजों) को जल देते हैं तथा उनकी मृत्युतिथि पर पार्वण श्राद्ध करते हैं। पिता-माता आदि पारिवारिक मनुष्यों की मृत्यु के पश्चात् उनकी तृप्ति के लिए श्रद्धापूर्वक किए जाने वाले कर्म को पितृ श्राद्ध कहते हैं।
श्रद्धया इदं श्राद्धम् (जो श्र्द्धा से किया जाय, वह श्राद्ध है।) भावार्थ है प्रेत और पित्त्तर के निमित्त, उनकी आत्मा की तृप्ति के लिए श्रद्धापूर्वक जो अर्पित किया जाए वह श्राद्ध है।
हिन्दू धर्म में माता-पिता की सेवा को सबसे बड़ी पूजा माना गया है। इसलिए हिंदू धर्म शास्त्रों में पितरों का उद्धार करने के लिए पुत्र की अनिवार्यता मानी गई हैं। जन्मदाता माता-पिता को मृत्यु-उपरांत लोग विस्मृत न कर दें, इसलिए उनका श्राद्ध करने का विशेष विधान बताया गया है। भाद्रपद पूर्णिमा से आश्विन कृष्णपक्ष अमावस्या तक के सोलह दिनों को पितृपक्ष कहते हैं जिसमे हम अपने पूर्वजों की सेवा करते हैं।इस वर्ष पितृ पक्ष 27 सितंबर से 12 अक्टूबर 2015 तक रहेगा।
पितृ पक्ष की अहम तारीखें (Dates of Pitru Paksha Shraddh in 2015):
पूर्णिमा और अमावस्या के दिन पितृपक्ष और पिण्डदान का बहुत महत्व माना गया है। इस वर्ष 12 अक्टूबर 2015 को सर्वपितर विसर्जन किया जाएगा।
२८ सितम्बर (सोमवार) पूर्णिमा श्राद्ध, प्रतिपदा श्राद्ध
२९ सितम्बर (मंगलवार) द्वितीया श्राद्ध
३० सितम्बर (बुधवार) तृतीया श्राद्ध
०१ अक्टूबर (बृहस्पतिवार) महा भरणी, चतुर्थी श्राद्ध
०२ अक्टूबर (शुक्रवार) पञ्चमी श्राद्ध
०३ अक्टूबर (शनिवार) षष्ठी श्राद्ध
०४ अक्टूबर (रविवार) सप्तमी श्राद्ध
०५ अक्टूबर (सोमवार) अष्टमी श्राद्ध
०६ अक्टूबर (मंगलवार) नवमी श्राद्ध
०७ अक्टूबर (बुधवार) दशमी श्राद्ध
०८ अक्टूबर (बृहस्पतिवार) एकादशी श्राद्ध
०९ अक्टूबर (शुक्रवार) मघा श्राद्ध, द्वादशी श्राद्ध
१० अक्टूबर (शनिवार) त्रयोदशी श्राद्ध
११ अक्टूबर (रविवार) चतुर्दशी श्राद्ध
१२ अक्टूबर (सोमवार) सर्वपित्रू अमावस्या
पितृ पक्ष का अन्तिम दिन सर्वपित्रू अमावस्या या महालय अमावस्या के नाम से जाना जाता है। पितृ पक्ष में महालय अमावस्या सबसे मुख्य दिन होता है।
कैसे करें पिण्ड दान? (Pitru Paksha Shraddh Pooja Vidhi in Hindi):
धार्मिक मान्यतानुसार आश्विन मास के कृष्णपक्ष में पितरों (अर्थात मृत्यु को प्राप्त कर चुके पूर्वजों) के नाम पर तर्पण व पिण्ड दान देने से पितरों को शांति मिलती है और वह जातक को सुखी रहने का आशीर्वाद देते हैं। पिण्ड दान और श्राद्ध से जुड़ी विशेष बातें:
- इस दिन ब्राह्मण व पंडितों को दान देना चाहिए और पशु-पक्षियों (विशेषकर गाय, कुत्ते या कौवे) को भोजन कराना चाहिए।
- श्राद्ध में ब्राह्मणों को भोजन कराना सबसे अहम माना जाता है। श्राद्ध के एक दिन पूर्व ब्राह्मणों को निमंत्रण भेजना चाहिए।
- गंगा के तटों पर श्राद्ध करना बेहद शुभ माना जाता है।
पितृ पक्ष मंत्र ( Pitrupaksha Puja Mantra)
यज्ञोपवीत को दाएं कंधे पर डालकर बाएं घुटने पर बैठकर पवित्र भाव से हाथों में कुश लेकर स्वर्गवासी पिता, दादा या दादी आदि को नाम व गोत्र बोते हुए तिल व चन्दनयुक्त जल से तर्पण करें। तर्पण के समय इस मंत्र को बोलें व जल छोड़ दें –
ये बान्धवा बान्धवा वा ये न्यजन्मनि बान्धवा:।
ते तृप्तिमखिला यान्तु यश्र्चास्मत्तो भिवाञ्छति।।
इसका अर्थ है मेरे अर्पण किए जल से जो मेरे बान्धव हो, जो बान्धव न हो, किसी दूसरे जन्म में बान्धव रहे हों तृप्त हों। इनके अलावा वे सभी प्राणी जो मुझसे जल की आशा रखें वे भी तृप्ति प्राप्त करें।
[…] Pitru Paksha starts on Ashwin Krishna Pratipada and closes on Ashwin Amavasya (Mahalaya Amavasya) in North Indian Hindi timetables.It is also called as Sarve Pitri Amavasya. The fortnight committed to dead ancestors begins on Bhadrapad Krishna Padyami and closes on Bhadrapada Amavasya in Marathi, Gujarati, Kannada, and Telugu calendars. Pitru Paksha 2015 begins on September 28 and closures on October 12. […]