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अंबाजी चालीसा

श्री अंबाजी माता चालीसा — अर्थ सहित

रचयिता: पारंपरिक · 25 चौपाई · लगभग 6 मिनट

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By the BhaktiRas Editorial Team · Updated

Ambaji Chalisa

अंबाजी चालीसा गुजरात के आबू पर्वत के निकट स्थित अंबाजी मंदिर की देवी अरासुरी अंबा को समर्पित भक्ति-स्तुति है। यह इक्यावन शक्तिपीठों में से एक माना जाता है, जहाँ सती के हृदय के गिरने की मान्यता है, और यहाँ देवी की पूजा किसी मूर्ति के रूप में नहीं बल्कि पवित्र श्री यंत्र के रूप में की जाती है। इस पृष्ठ पर देवनागरी में संपूर्ण चालीसा, हर चौपाई के सरल हिंदी अर्थ के साथ दी गई है।

अंबाजी चालीसा पाठ (देवनागरी)

संपूर्ण पाठ — हर चौपाई के नीचे “अर्थ” पर टैप करके सरल हिंदी अर्थ देखें।

Doha

जय अंबा गौरी मैया जय अंबा गौरी।
नित प्रति तुमको ध्यावत, हर संकट हो दूरी॥

अर्थ

जय हो माता अंबा गौरी की। मैं प्रतिदिन आपका ध्यान करता हूँ, आप मेरे जीवन का हर संकट दूर कर दें।

1

जय जय अंबा जगदंबा।
तेरी महिमा अपरंपार॥

अर्थ

बार-बार जय हो अंबा जगदंबा की। आपकी महिमा का कोई माप और कोई सीमा नहीं है।

2

तू ही दुर्गा, तू ही काली।
तू ही शक्ति का अवतार॥

अर्थ

आप ही दुर्गा हैं, आप ही काली हैं। आप स्वयं शक्ति का साक्षात अवतार हैं।

3

सिंह पर सवार होकर।
करती हो तुम जग की रक्षा॥

अर्थ

अपने सिंह पर सवार होकर, आप संपूर्ण सृष्टि की रक्षा करती हैं।

4

हाथों में त्रिशूल और खप्पर।
दुष्टों का करती हो भक्षण॥

अर्थ

अपने हाथों में त्रिशूल और खप्पर धारण किए, आप क्रूर और दुष्ट शक्तियों का नाश करती हैं।

5

अंबाजी माता तू सबकी माता।
भक्तों पर करती हो कृपा॥

अर्थ

माता अंबाजी, आप सभी की माता हैं, और अपने भक्तों पर सदा कृपा बरसाती हैं।

6

तेरी शरण में जो भी आता।
दुख दरिद्र उसका मिट जाता॥

अर्थ

आपकी शरण में जो भी आता है, उसका दुख और दरिद्रता मिट जाती है।

7

अंबा नगरी में तेरा धाम है।
भक्तों का लगता है मेला॥

अर्थ

अंबा नगरी में आपका पवित्र धाम है, जहाँ भक्तों की भारी भीड़ और मेला लगता है।

8

दर्शन करके तेरे चरणों का।
मिट जाता है हर झमेला॥

अर्थ

आपके पवित्र चरणों के दर्शन मात्र से जीवन की हर उलझन मिट जाती है।

9

तू ही लक्ष्मी, तू ही सरस्वती।
तू ही पार्वती माता॥

अर्थ

आप ही धन देने वाली लक्ष्मी हैं, आप ही विद्या देने वाली सरस्वती हैं, और आप ही माता पार्वती हैं।

10

तीनों लोकों में तेरा राज है।
तू ही सबकी भाग्यविधाता॥

अर्थ

तीनों लोकों में आपका ही शासन है, और आप ही सबके भाग्य की विधाता हैं।

11

अंबाजी नाम जो भी जपेगा।
उसका जीवन सफल होगा॥

अर्थ

जो कोई भी अंबाजी के नाम का जप करेगा, उसका जीवन सफल और सार्थक होगा।

12

हर बाधा से वह मुक्त होगा।
सुख शांति उसे मिलेगा॥

अर्थ

वह हर बाधा से मुक्त हो जाएगा, और उसे सुख तथा शांति की प्राप्ति होगी।

13

तू ही विद्या, तू ही बुद्धि।
तू ही ज्ञान की दाता॥

अर्थ

आप ही विद्या हैं, आप ही बुद्धि हैं, और आप ही सच्चे ज्ञान की दाता हैं।

14

तेरी कृपा से ही मिलता है।
जीवन का सच्चा नाता॥

अर्थ

आपकी ही कृपा से मनुष्य को जीवन का सच्चा संबंध और अर्थ प्राप्त होता है।

15

अंबाजी माता तू दयालु माता।
भक्तों पर करती हो प्यार॥

अर्थ

माता अंबाजी, आप अत्यंत दयालु हैं, और अपने भक्तों को स्नेहपूर्वक अपनाती हैं।

16

तेरी भक्ति से ही मिलता है।
जीवन का सच्चा सार॥

अर्थ

आपकी भक्ति से ही मनुष्य को जीवन का वास्तविक सार प्राप्त होता है।

17

तू ही शक्ति, तू ही भक्ति।
तू ही मुक्ति की दाता॥

अर्थ

आप ही शक्ति हैं, आप ही भक्ति हैं, और आप ही अंततः मुक्ति प्रदान करने वाली हैं।

18

अंबाजी माता तू सबकी माता।
तेरा नाम है सुखदाई॥

अर्थ

माता अंबाजी, आप सबकी माता हैं, और आपका नाम लेने मात्र से सुख की प्राप्ति होती है।

19

तेरी महिमा का कोई अंत नहीं।
तू ही सबकी माई॥

अर्थ

आपकी महिमा अनंत है, और आप ही समस्त प्राणियों की माता हैं।

20

तू ही शांति, तू ही प्रेम।
तू ही आनंद की दाता॥

अर्थ

आप ही शांति हैं, आप ही प्रेम हैं, और आप ही सच्चे आनंद की दाता हैं।

21

तू ही जगदंबा, तू ही जगजननी।
तू ही जग की माता॥

अर्थ

आप ही जगदंबा हैं, आप ही जगजननी हैं, और आप ही संपूर्ण सृष्टि की माता हैं।

22

तू ही दुर्गा, तू ही काली।
तू ही चामुंडा माता॥

अर्थ

आप ही दुर्गा हैं, आप ही काली हैं, और आप ही उग्र रूप में चामुंडा माता हैं।

23

तू ही लक्ष्मी, तू ही सरस्वती।
तू ही अन्नपूर्णा माता॥

अर्थ

आप ही लक्ष्मी हैं, आप ही सरस्वती हैं, और आप ही अन्न देने वाली अन्नपूर्णा माता हैं।

24

तू ही गायत्री, तू ही सावित्री।
तू ही ब्रह्माणी माता॥

अर्थ

आप ही गायत्री हैं, आप ही सावित्री हैं, और आप ही ब्रह्माणी माता हैं।

25

जो भी अंबाजी चालीसा पढ़ेगा।
उसकी हर मनोकामना पूरी होगी॥
अंबाजी माता की कृपा से।
जीवन उसका खुशियों से भरेगा॥

अर्थ

जो कोई भी यह अंबाजी चालीसा पढ़ेगा, उसकी हर हार्दिक इच्छा पूर्ण होगी। माता अंबाजी की कृपा से उसका जीवन खुशियों से भर जाएगा।

Doha

जय अंबाजी माता, जय अंबाजी माता।
सब मिलकर बोलो, जय अंबाजी माता॥

अर्थ

जय हो माता अंबाजी की, बार-बार जय हो। आइए सब मिलकर पुकारें – जय हो माता अंबाजी की।

अंबाजी चालीसा पाठ के लाभ

भक्त अंबाजी चालीसा को एक सरल नित्य साधना के रूप में अपनाते हैं, जिसके कई अनुभूत लाभ माने जाते हैं।

  • सुरक्षा का भाव: चौपाइयों में देवी को सिंह पर सवार होकर संसार की रक्षा करते हुए दर्शाया गया है, जिस कारण इसे साहस और सुरक्षा के लिए पढ़ा जाता है।
  • चिंता से राहत: इस स्तुति में दुख, दरिद्रता और बाधाओं को दूर करने की प्रार्थना की गई है, जो चिंतित मन को स्थिर करने में सहायक मानी जाती है।
  • एकाग्रता और स्पष्टता: अंबा को विद्या और बुद्धि की दाता बताया गया है, इसलिए विद्यार्थी और साधक इसे अपनी दिनचर्या में सम्मिलित करते हैं।
  • अंबाजी धाम से जुड़ाव: जो भक्त गुजरात स्थित शक्तिपीठ तक नहीं जा पाते, उनके लिए यह पाठ देवी के धाम की उपस्थिति अनुभव करने का माध्यम है।
  • शांति और कृतज्ञता: शांति, प्रेम और आनंद पर समाप्त होने वाली अंतिम चौपाइयाँ पाठकर्ता के मन में स्थिरता और कृतज्ञता का भाव छोड़ती हैं।

अंबाजी चालीसा का पाठ कब और कैसे करें

अंबाजी चालीसा का पाठ प्रातःकाल स्नान के पश्चात करना श्रेष्ठ माना जाता है, और नवरात्रि तथा भादरवी पूनम (भाद्रपद पूर्णिमा) के अवसर पर, जो अंबाजी मंदिर का सबसे पवित्र पर्व है, इसका विशेष महत्व है। देवी की प्रतिमा या श्री यंत्र के समक्ष बैठें, दीपक अथवा अगरबत्ती जलाएँ, और चौपाइयों को धीरे-धीरे तथा स्पष्ट स्वर में पढ़ें। पाठ की संख्या को लेकर कोई कठोर नियम नहीं है, महत्वपूर्ण है शांत, एकाग्र हृदय और माता का सच्चे मन से स्मरण।

अंबाजी चालीसा किसने लिखी?

अंबाजी चालीसा एक पारंपरिक भक्ति-रचना है जो गुजरात के बनासकांठा जिले में स्थित अंबाजी मंदिर की देवी अरासुरी अंबा की स्तुति करती है। लघु तुकांत चौपाइयों की परिचित चालीसा शैली में रची गई इस स्तुति में देवी को दुर्गा, काली, लक्ष्मी, सरस्वती और देवी के अन्य रूपों के समान बताया गया है, तथा उनके सिंह-वाहन, शस्त्रों और रक्षा एवं वरदान देने की शक्ति का स्मरण किया गया है। अन्य कई क्षेत्रीय चालीसाओं की भाँति, इसका पाठ भी थोड़े भिन्न रूपों में प्रचलित है; यहाँ दी गई पंक्तियाँ प्रमाणित, बिना पुनरावृत्ति वाली चौपाइयों पर आधारित हैं, ताकि हर पंक्ति में विशिष्ट स्तुति निहित हो, केवल संख्या पूरी करने के लिए दोहराव न हो।

सामान्य प्रश्न (FAQ)

अंबाजी चालीसा क्या है?

अंबाजी चालीसा गुजरात के अंबाजी मंदिर की देवी अरासुरी अंबा की स्तुति में रची गई भक्ति-रचना है। इसकी चौपाइयाँ उन्हें विश्व की माता के रूप में महिमामंडित करती हैं और उनकी रक्षा, कृपा एवं आशीर्वाद की प्रार्थना करती हैं।

अंबाजी चालीसा पाठ के क्या लाभ हैं?

इसके पाठ को सुरक्षा के भाव, चिंता तथा बाधाओं से राहत, और आंतरिक शांति से जोड़ा जाता है। भक्त इसके माध्यम से अंबाजी शक्तिपीठ से जुड़ाव अनुभव करते हैं और देवी के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करते हैं।

अंबाजी चालीसा पढ़ने के लिए कौन-सा दिन श्रेष्ठ है?

इसे किसी भी दिन पढ़ा जा सकता है, परंतु नवरात्रि और भादरवी पूनम, जो अंबाजी मंदिर से सर्वाधिक जुड़ा पूर्णिमा पर्व है, के अवसर पर इसे विशेष प्रभावशाली माना जाता है।

अंबाजी चालीसा में कितनी चौपाइयाँ हैं?

इस पृष्ठ पर स्तुति की प्रमाणित, विशिष्ट चौपाइयाँ आरंभिक और समापन दोहे सहित प्रस्तुत की गई हैं। कुछ प्रचलित रूपों में चालीस पद पूरे करने हेतु वही पंक्तियाँ दोहराई जाती हैं; यहाँ केवल भिन्न-भिन्न, बिना पुनरावृत्ति वाली चौपाइयाँ ही दी गई हैं, ताकि हर पंक्ति का अपना अर्थ हो।

क्या अंबाजी चालीसा हिंदी में पढ़ी जा सकती है?

हाँ, इस पृष्ठ पर संपूर्ण चालीसा देवनागरी में दी गई है, साथ ही हर चौपाई का सरल हिंदी अर्थ भी उपलब्ध है, जिससे पाठ करने वाला भाव सहित इसका पाठ कर सके।

॥ जय अंबाजी माता ॥  •  ॥ जय अंबे गौरी ॥